नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG बिल्डिंग के ढहने से हुए दर्दनाक हादसे ने सिर्फ सात लोगों की जान नहीं ली, बल्कि राजधानी में छात्र आवास और PG की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित इस इलाके में बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए छात्र किराए के कमरों और PG में रहते हैं। हादसे के बाद अब इन छात्रों के बीच डर का माहौल है। कई छात्र अपना सामान लेकर सत्य निकेतन छोड़ रहे हैं, जबकि कुछ अपने परिवार के पास वापस जाने की तैयारी कर रहे हैं।
NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में छात्रों ने बताया कि हादसे के बाद उन्हें अपने आसपास की दूसरी इमारतों की हालत भी डराने लगी है। एक छात्र ने सत्य निकेतन की स्थिति को बेहद खराब बताते हुए कहा कि अगर इलाके को ऊपर से ड्रोन से देखा जाए तो यह यूक्रेन और गाजा के युद्धग्रस्त इलाकों जैसा बदहाल नजर आ सकता है। यह छात्र का बयान है और इसे इलाके की आधिकारिक स्थिति का आकलन नहीं माना जा सकता।
“अब PG में नींद नहीं आती”
सत्य निकेतन में रहने वाले छात्रों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि हादसे के बाद भी उन्हें उन्हीं पुरानी और आसपास की इमारतों में रहना है। NDTV से बातचीत में कई छात्रों ने कहा कि वे अपने कमरों की दीवारों को देखकर भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
पहली बार दिल्ली आए छात्रों का कहना है कि उन्होंने राजधानी में पढ़ाई और बेहतर भविष्य के सपने देखे थे, लेकिन दिल्ली पहुंचने के कुछ ही समय बाद हुए इस हादसे ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर दिया। कई छात्रों के परिवार उन्हें वापस घर बुला रहे हैं। हालांकि, हर छात्र के पास घर लौटने या सुरक्षित वैकल्पिक आवास लेने का विकल्प नहीं है।
“हमारे PG की दीवारों को देखकर डर लगता है”
NDTV से बात करने वाली एक छात्रा ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश से दिल्ली आकर समाजशास्त्र की पढ़ाई कर रही है और दिल्ली आए उसे करीब एक महीना ही हुआ था। सत्य निकेतन हादसे के बाद उसका कहना था कि अब उसे अपने PG की दीवारों को देखकर भी डर लगने लगा है।
एक अन्य छात्रा ने कहा कि परिवार बड़ी मुश्किल से बच्चों को पढ़ने के लिए दिल्ली भेजते हैं, इसलिए प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उन्हें सुरक्षित माहौल मिले। छात्रों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या PG मालिकों और मकान मालिकों को इमारत में छात्रों को रखने से पहले सुरक्षा मानकों की पर्याप्त जांच होती है।
पुराने छात्रों ने पहले भी देखे थे खराब हालात
सत्य निकेतन में लंबे समय से रहने वाले कुछ छात्रों ने बताया कि इलाके की खराब स्थिति उनके लिए नई नहीं है। एक छात्र ने NDTV को बताया कि करीब ढाई साल पहले जब वह यहां आया था, तब भी बारिश के दौरान सड़क और आसपास के इलाकों में पानी भर जाता था और इलाके की स्थिति देखकर उसके मन में सवाल उठा था कि यहां छात्र कैसे रहते हैं।
यानी हादसे के बाद सामने आई चिंता केवल रविवार को गिरी इमारत तक सीमित नहीं है। छात्रों का कहना है कि इलाके में पुरानी इमारतें, जलभराव, रखरखाव की समस्याएं और बढ़ती आबादी लंबे समय से चुनौती बनी हुई हैं।
पांच मंजिला PG कैसे बनी मलबे का ढेर?
6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्रों के लिए इस्तेमाल हो रही पांच मंजिला इमारत अचानक ढह गई। इमारत में PG/हॉस्टल संचालित हो रहा था। हादसे के बाद NDRF, दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस और अन्य बचाव दलों ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारी मशीनों और स्निफर डॉग्स की मदद ली गई।
रिपोर्टों के अनुसार हादसे में छात्रों समेत कई लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। शुरुआती घंटों में मृतकों की संख्या लगातार बदलती रही। बाद की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या सात और कुछ रिपोर्टों में आठ तक बताई गई। इसलिए अंतिम आधिकारिक आंकड़ा संबंधित प्रशासनिक अपडेट के आधार पर ही उद्धृत किया जाना चाहिए।
बेसमेंट में चल रहे काम पर भी सवाल
हादसे के बाद जांच में इमारत के बेसमेंट में चल रहे निर्माण या मरम्मत कार्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों और जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल है कि क्या बेसमेंट में किए जा रहे काम से इमारत की संरचना प्रभावित हुई थी।
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हादसे की वजह केवल बेसमेंट का काम था। इसकी वास्तविक वजह तकनीकी और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मालिक गिरफ्तार, परिवार के सदस्य भी जांच के दायरे में
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम बंसल को राजस्थान के भिवाड़ी से पकड़ा। बाद की रिपोर्टों के मुताबिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई हुई। पुलिस के अनुसार संपत्ति उर्मिला गुप्ता के नाम पर दर्ज थी, जबकि बिजली कनेक्शन हरिराम के नाम पर था और बेटे पर संपत्ति की देखरेख की जिम्मेदारी होने की बात सामने आई है।
इन लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई चल रही है, लेकिन केवल गिरफ्तारी या FIR को दोष सिद्ध होना नहीं माना जा सकता। हादसे की जिम्मेदारी और कथित लापरवाही का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया से होगा।
MCD के अधिकारियों पर भी कार्रवाई
हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका पर भी कार्रवाई की है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार MCD के दक्षिणी जोन के पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया। इनमें डिप्टी कमिश्नर, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और अन्य भवन विभाग के अधिकारी शामिल हैं।
इस कार्रवाई के बाद सवाल और बड़ा हो गया है कि आखिर जिस इलाके में बड़ी संख्या में छात्र PG में रहते हैं, वहां इमारतों की नियमित जांच और संरचनात्मक सुरक्षा का सिस्टम कितना प्रभावी है।
दिल्ली में PG और हॉस्टल की कमी भी बड़ी वजह
सत्य निकेतन की समस्या को केवल एक इमारत तक सीमित करके देखना पर्याप्त नहीं होगा। दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या बहुत बड़ी है, जबकि विश्वविद्यालय के पास उपलब्ध हॉस्टल सीटें इसकी तुलना में बेहद कम हैं। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार DU में 2.5 लाख से अधिक छात्र हैं, जबकि विश्वविद्यालय के पास करीब 9,000 हॉस्टल बेड हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्रों को निजी PG और किराए के मकानों पर निर्भर रहना पड़ता है।
यही वजह है कि सत्य निकेतन, मुखर्जी नगर और दिल्ली के अन्य छात्र इलाकों में निजी PG और किराए के कमरों की मांग लगातार बनी रहती है। लेकिन जब छात्र आवास की मांग तेजी से बढ़ती है और नियमन तथा सुरक्षा जांच उसी गति से नहीं बढ़ती, तो जोखिम बढ़ जाता है।
सत्य निकेतन के बाद मुखर्जी नगर पर भी नजर
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली के दूसरे छात्र इलाकों की स्थिति भी चर्चा में आ गई है। NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट में मुखर्जी नगर के छात्रों ने सीलन, छोटे कमरों, महंगे किराए और रहने की कठिन परिस्थितियों की शिकायत की। इससे यह सवाल उठता है कि क्या दिल्ली में केवल हादसे के बाद किसी इलाके की इमारतों की जांच की जाती है या नियमित सुरक्षा ऑडिट की व्यवस्था भी प्रभावी है।
“अब सवाल सिर्फ एक PG का नहीं है”
सत्य निकेतन में रहने वाले छात्रों का डर इस हादसे की सबसे गंभीर तस्वीर सामने लाता है। जिन छात्रों के लिए दिल्ली शिक्षा और करियर का रास्ता है, उनके लिए सुरक्षित आवास भी उतना ही जरूरी है जितना कॉलेज और पढ़ाई।
एक इमारत गिरने के बाद अगर छात्र अपने आसपास की हर दीवार, छत और सीढ़ी को शक की नजर से देखने लगें, तो समस्या सिर्फ एक भवन की नहीं रह जाती। यह उस पूरे सिस्टम पर सवाल है जो छात्रों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने, पुरानी इमारतों की जांच करने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद प्रशासन ने जांच और कार्रवाई शुरू कर दी है। लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि कार्रवाई केवल इस एक हादसे तक सीमित रहती है या दिल्ली के सभी बड़े PG और छात्र आवासों की संरचनात्मक सुरक्षा, निर्माण अनुमति और बेसमेंट निर्माण की व्यापक जांच भी होती है। MCD ने अब दिल्लीभर में इमारतों की जांच का आदेश दिया है और 10 सितंबर तक रिपोर्ट मांगी गई है।












