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दिल्ली में छात्रों की PG बनी मौत का मलबा! 5 मंजिला इमारत ढही

RK News by RK News
September 7, 2026
Reading Time: 1 min read
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सत्य निकेतन में PG बिल्डिंग गिरने के बाद डरे छात्र अब अपनी इमारतों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में छात्रों के लिए चल रही एक पांच मंजिला PG बिल्डिंग के अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुई इस दुर्घटना में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित थी और इसमें बड़ी संख्या में छात्र रहते थे। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और कई घंटे तक मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया गया।

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दिल्ली पुलिस ने मामले में इमारत के कथित मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस के मुताबिक दक्षिण कैंपस थाने में FIR संख्या 153/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105, 290 और 125(a) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों का पता लगाने के लिए कई टीमें गठित की हैं। FIR में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में साबित होना बाकी है।

कैसे हुआ हादसा?

प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के मुताबिक, इमारत रविवार दोपहर अचानक भरभराकर नीचे आ गई। हादसे के समय बिल्डिंग में PG के तौर पर रहने वाले छात्र और अन्य लोग मौजूद थे। देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे में बदल गई और कई लोग उसके नीचे दब गए।

हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, NDRF, दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी और CATS एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं। करीब 200 आपातकालीन कर्मियों ने बचाव अभियान में हिस्सा लिया। भारी मलबे के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण रहा और इस आशंका के बीच सावधानी से काम किया गया कि कहीं अंदर फंसे लोगों को नुकसान न पहुंचे।

छह लोगों की मौत, कई घायल

बचाव अभियान के दौरान कई लोगों को मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। AIIMS के जेपीएन एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में कई घायल लाए गए। अस्पताल की शुरुआती जानकारी के मुताबिक कुछ लोगों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था, जबकि एक गंभीर घायल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बाद में मलबे से एक और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई।

हादसे में घायल लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज कराया गया। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई थी, जबकि कुछ को प्राथमिक उपचार के बाद निगरानी में रखा गया। राहत अभियान के दौरान स्थानीय लोग भी बचावकर्मियों के साथ मलबा हटाने और फंसे लोगों की तलाश में जुटे रहे।

बेसमेंट में चल रहा था मरम्मत का काम

हादसे की जांच में सबसे महत्वपूर्ण सवाल इमारत में चल रहे मरम्मत और निर्माण कार्य को लेकर उठ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था और बेसमेंट में भी काम किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी वजह से यह जांच का विषय बन गया है कि क्या निर्माण या मरम्मत के दौरान किसी संरचनात्मक हिस्से को नुकसान पहुंचा था।

कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि लगातार बारिश के कारण बेसमेंट में पानी जमा था और इससे नींव कमजोर हुई हो सकती है। हालांकि, यह स्थानीय लोगों का दावा है और अभी इसे हादसे का आधिकारिक कारण नहीं माना गया है। दुर्घटना की वास्तविक वजह मजिस्ट्रियल जांच और तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगी।

करीब 30 से 50 साल पुरानी बताई जा रही थी इमारत

इमारत की उम्र को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। कुछ रिपोर्टों में इसे करीब 30 साल पुरानी बताया गया, जबकि अन्य रिपोर्टों में स्थानीय लोगों के हवाले से करीब 50 साल पुरानी इमारत होने की बात कही गई है। इसलिए फिलहाल इसकी सटीक निर्माण वर्ष की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

यह इमारत ‘Hostel Daze’ के नाम से भी जानी जाती थी और इसमें दिल्ली विश्वविद्यालय के अलग-अलग कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र रहते थे। इलाके में बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं, जिसके कारण हादसे ने आसपास की दूसरी इमारतों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मालिक के खिलाफ FIR, पुलिस की कई टीमें जांच में जुटीं

दिल्ली पुलिस ने कथित मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को ट्रेस करने के लिए कई टीमें लगाई गई हैं। FIR में संरचना की देखभाल में लापरवाही और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने से जुड़े आरोप शामिल हैं।

यह स्पष्ट करना जरूरी है कि FIR दर्ज होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाएंगी कि इमारत का निर्माण और इस्तेमाल किन नियमों के तहत हो रहा था, मरम्मत की अनुमति थी या नहीं, सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं और हादसे के लिए किसी व्यक्ति या संस्था की आपराधिक लापरवाही जिम्मेदार थी या नहीं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का जायजा लेने के बाद मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए। मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक प्रारंभिक आकलन के आधार पर इमारत के मालिक के खिलाफ FIR और जांच के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने यह भी कहा है कि घटना के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

PG और अवैध निर्माण पर फिर उठे सवाल

सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में छात्रों के लिए चल रहे PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साउथ कैंपस के आसपास के इलाकों में कई पुराने मकानों को PG और छात्र आवास में बदला गया है। स्थानीय लोगों और रिपोर्टों में ऐसे भवनों के रखरखाव, निर्माण मानकों और नियामकीय निगरानी को लेकर चिंता जताई गई है।

हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने वाली ऊंची इमारतों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। इससे यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि राजधानी में PG के रूप में इस्तेमाल हो रही इमारतों की नियमित संरचनात्मक जांच और सुरक्षा ऑडिट किस स्तर पर किए जाते हैं।

CCTV में कैद हुआ इमारत गिरने का खौफनाक पल

हादसे का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिसमें इमारत अचानक कुछ ही सेकंड में ढहती दिखाई देती है। फुटेज में आसपास मौजूद लोग और दुकानदार इमारत गिरते ही जान बचाने के लिए भागते नजर आते हैं। वीडियो सामने आने के बाद हादसे की भयावहता और स्पष्ट हुई है।

अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे?

मजिस्ट्रियल जांच और पुलिस जांच में मुख्य रूप से यह देखा जाएगा कि इमारत की संरचनात्मक स्थिति कैसी थी, PG चलाने के लिए जरूरी अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं, मरम्मत या बेसमेंट में चल रहे काम के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं और क्या किसी तरह की लापरवाही ने इमारत की संरचना को कमजोर किया। इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि इमारत में उस समय कितने लोग रह रहे थे और क्या वहां अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन निकासी तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं मौजूद थीं।

हादसे ने दिल्ली के छात्र इलाकों की सुरक्षा पर बढ़ाई चिंता

सत्य निकेतन का हादसा सिर्फ एक इमारत के गिरने तक सीमित नहीं है। दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास हजारों छात्र PG और किराए के मकानों में रहते हैं। ऐसे में पुराने भवनों को बिना पर्याप्त संरचनात्मक जांच के छात्र आवास के रूप में इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में बड़े हादसे का खतरा बना रहता है।

अब सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस हादसे के बाद केवल दोषियों पर कार्रवाई होगी या दिल्ली के छात्र इलाकों में चल रहे PG और हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा भी की जाएगी।

फिलहाल पुलिस जांच और मजिस्ट्रियल जांच जारी है। हादसे की अंतिम वजह और जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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