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JNU में प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप, 11 छात्राओं की शिकायत से मचा हड़कंप

RK News by RK News
September 7, 2026
Reading Time: 1 min read
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JNU में प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप, 11 छात्राओं की शिकायत से मचा हड़कंप

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में एक प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों ने कैंपस में विवाद खड़ा कर दिया है। विश्वविद्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक 11 छात्राओं ने प्रोफेसर के खिलाफ आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee-ICC) में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतों के बाद ICC ने मामले की जांच शुरू कर दी है और संबंधित छात्राओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। मामले की जांच फिलहाल आंतरिक प्रक्रिया के तहत चल रही है और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

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मई में ICC के पास पहुंची शिकायतें

रिपोर्टों के अनुसार, छात्राओं की शिकायतें मई में विश्वविद्यालय की ICC के पास पहुंची थीं। इसके बाद समिति ने मामले को औपचारिक रूप से जांच के लिए लिया। ICC ने शिकायतकर्ताओं को अपने बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान समिति आरोपों से जुड़े अन्य लोगों और उपलब्ध साक्ष्यों को भी देख रही है।

शुरुआत में मामला एक छात्रा के अनुभव सामने रखने के बाद चर्चा में आया। रिपोर्टों के मुताबिक मई के पहले सप्ताह में हुई viva परीक्षा के बाद एक छात्रा ने अपने अनुभव के बारे में छात्रों के एक WhatsApp समूह में बताया। इसके बाद कुछ अन्य छात्राओं ने भी कथित तौर पर अपने साथ हुए व्यवहार को साझा किया और मामला ICC तक पहुंचा।

Viva के दौरान अनुचित टिप्पणियों का आरोप

शिकायतों में प्रोफेसर पर कथित तौर पर viva और शैक्षणिक बातचीत के दौरान आपत्तिजनक या यौन संकेत वाले कमेंट करने के आरोप लगाए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्हें बेहतर अंक देने के बदले कथित तौर पर अनुचित व्यक्तिगत या यौन अपेक्षाओं का संकेत दिया गया।

यह आरोप विशेष रूप से गंभीर है क्योंकि विश्वविद्यालय में शिक्षक और छात्र के बीच मूल्यांकन तथा अकादमिक अधिकार का सीधा संबंध होता है। हालांकि, ये सभी बातें फिलहाल शिकायतों में लगाए गए आरोप हैं और ICC की जांच पूरी होने के बाद ही इनके तथ्यात्मक आधार पर कोई निष्कर्ष निकलेगा।

कैंपस में बुलाने और अनुचित व्यवहार के भी आरोप

कुछ रिपोर्टों के मुताबिक शिकायतों में प्रोफेसर द्वारा छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर स्थित अपने आवास पर किसी आयोजन या मुलाकात के लिए बुलाने और वहां कथित रूप से अनुचित व्यवहार करने के आरोप भी शामिल हैं।

इसके अलावा कुछ छात्राओं ने कक्षा के दौरान कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों और व्यवहार की शिकायत की है। हालांकि, इन आरोपों का पूरा विवरण ICC की जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और विश्वविद्यालय ने अभी तक शिकायतों के सभी बिंदुओं पर सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी जारी नहीं की है।

शिकायतों की संख्या बढ़ने से मामला गंभीर हुआ

मामले की खास बात यह है कि शिकायत केवल एक छात्रा तक सीमित नहीं रही। अलग-अलग छात्राओं के समान प्रकृति के आरोप सामने आने के बाद शिकायतों की संख्या बढ़ी और ICC के स्तर पर जांच शुरू हुई। कुछ रिपोर्टों में “कम से कम 10” शिकायतों का उल्लेख किया गया है, जबकि अन्य रिपोर्टों में कुल संख्या 11 बताई गई है।

यह भी बताया गया है कि आगे की जांच के दौरान वर्तमान या पूर्व छात्राओं की ओर से अतिरिक्त शिकायतें सामने आ सकती हैं। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

प्रोफेसर का नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?

मामले की जांच अभी चल रही है और सार्वजनिक रिपोर्टों में संबंधित प्रोफेसर की पहचान स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखी गई है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि केवल शिकायत दर्ज होने से किसी व्यक्ति का अपराध साबित नहीं होता।

ICC की प्रक्रिया का उद्देश्य शिकायतों की जांच करना, दोनों पक्षों को सुनना और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले आरोपी प्रोफेसर को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

JNU प्रशासन की ओर से क्या कहा गया?

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, JNU प्रशासन और कुलपति कार्यालय की ओर से मामले पर विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। ICC अपनी निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायतों की जांच कर रही है।

वहीं, रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली पुलिस के पास इस मामले में फिलहाल कोई अलग पुलिस शिकायत दर्ज होने की जानकारी नहीं है। यानी मौजूदा घटनाक्रम मुख्य रूप से विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत प्रक्रिया के स्तर पर है।

ICC की जांच में आगे क्या होगा?

अब ICC शिकायतकर्ताओं के बयान, आरोपी प्रोफेसर का पक्ष और मामले से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी। जरूरत पड़ने पर समिति संबंधित छात्रों, शिक्षकों या अन्य संभावित गवाहों से भी जानकारी ले सकती है। जांच के बाद ICC अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रख सकती है। यदि आरोप साबित होते हैं तो विश्वविद्यालय के नियमों और लागू कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।

JNU में पहले भी सामने आते रहे हैं ऐसे मामले

यह मामला JNU में शिक्षक और छात्रों के बीच लैंगिक उत्पीड़न से जुड़े पुराने विवादों की पृष्ठभूमि में भी चर्चा में आया है। रिपोर्टों में विश्वविद्यालय में पहले सामने आए यौन उत्पीड़न के मामलों का उल्लेख किया गया है। अप्रैल 2025 में JNU की Executive Council ने यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े एक फैकल्टी सदस्य को बर्खास्त भी किया था। हालांकि, मौजूदा मामले को उस पुराने मामले से अलग रखते हुए इसकी स्वतंत्र जांच की जा रही है।

Tags: 11 Students Complaint JNUJNU ICC InvestigationJNU NewsJNU Professor CaseJNU Professor Sexual HarassmentJNU Sexual Harassment Case
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