दोहा: अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर संकट और गहरा गया है। कतर ने चेतावनी दी है कि अगर हॉर्मुज संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो दुनिया को “औद्योगिक तबाही” जैसी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद अल-अंसारी ने कहा है कि इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलना है, क्योंकि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में लगातार बाधा वैश्विक ऊर्जा और औद्योगिक आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।
हॉर्मुज से जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट
कतर की चेतावनी ऐसे समय आई है जब स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले कमोडिटी जहाजों की संख्या लगातार कम हो रही है। Kpler के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 10 दिनों में इस समुद्री मार्ग से प्रतिदिन औसतन करीब 10 कमोडिटी जहाज ही गुजरे हैं। यह मई के बाद का सबसे निचला स्तर है। Reuters के मुताबिक, सोमवार को हॉर्मुज से सिर्फ सात कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि एक दिन पहले यह संख्या आठ थी। हालांकि कुछ जहाज अपने ट्रांसपोंडर बंद करके भी चल सकते हैं, इसलिए वास्तविक संख्या इससे अलग हो सकती है।
क्यों इतना अहम है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ने वाला दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले तेल और LNG के बड़े हिस्से की वैश्विक बाजारों तक पहुंच इसी रास्ते पर निर्भर करती है।
इस मार्ग में लंबे समय तक व्यवधान का मतलब सिर्फ जहाजों की आवाजाही में कमी नहीं है, बल्कि तेल, प्राकृतिक गैस और दूसरे औद्योगिक कच्चे माल की सप्लाई पर भी दबाव बढ़ना है। यही वजह है कि कतर इसे संभावित “औद्योगिक तबाही” से जोड़ रहा है।
कतर की LNG सप्लाई भी संकट के केंद्र में
कतर दुनिया के सबसे बड़े LNG निर्यातकों में शामिल है और उसका रास लाफान औद्योगिक परिसर वैश्विक गैस बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मार्च में ईरानी हमलों के दौरान रास लाफान की LNG सुविधाओं को नुकसान पहुंचा था। अल जज़ीरा के अनुसार, युद्ध से पहले रास लाफान दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत LNG सप्लाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
जून में रास लाफान के बारजान गैस सप्लाई केंद्र में हुए एक अलग विस्फोट में 13 लोगों की मौत हुई थी और 66 लोग घायल हुए थे। कतर के ऊर्जा मंत्री ने उस घटना को परिचालन संबंधी दुर्घटना बताया था और कहा था कि इसका LNG निर्यात क्षमता पर असर नहीं पड़ा।
ईरान ने हॉर्मुज को लेकर क्या रुख अपनाया है?
ईरान ने अमेरिका की कार्रवाई और आर्थिक दबाव के जवाब में हॉर्मुज के आसपास समुद्री गतिविधियों पर अपना दबाव बढ़ाने की धमकी दी है। Reuters के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की स्थिति में जवाबी कदम उठाने की चेतावनी दी है और खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे को भी संभावित जोखिम में बताया है। तेहरान ने अमेरिका पर “आर्थिक युद्ध” छेड़ने का आरोप लगाते हुए खाड़ी में एक प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र लागू करने की बात भी कही है।
तेल की कीमतों पर भी बढ़ा दबाव
हॉर्मुज संकट का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। Reuters के मुताबिक, 8 सितंबर को बढ़ते मध्य पूर्वी तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.25 डॉलर बढ़कर करीब 98.25 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI 2.22 डॉलर बढ़कर करीब 93.70 डॉलर प्रति बैरल रहा। Goldman Sachs ने भी 2026 और 2027 के लिए अपने तेल मूल्य अनुमान बढ़ाए हैं।
अगर हॉर्मुज से होकर ऊर्जा आपूर्ति में लंबे समय तक व्यवधान रहता है तो इसका असर पेट्रोलियम कीमतों से आगे बढ़कर परिवहन, बिजली उत्पादन, उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स और कई दूसरे उद्योगों की लागत पर पड़ सकता है।
कतर क्यों चाहता है कि हॉर्मुज जल्द खुले?
कतर के लिए यह संकट सीधे उसकी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा निर्यात से जुड़ा हुआ है। हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं होने पर LNG कार्गो की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और वैश्विक खरीदारों तक ऊर्जा पहुंचाने में मुश्किल बढ़ सकती है।
कतर पहले ही ईरानी हमलों से अपने ऊर्जा ढांचे को हुए नुकसान का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा चुका है। 4 सितंबर को कतर ने संयुक्त राष्ट्र को भेजे पत्र में ईरान पर अपने क्षेत्र और ऊर्जा सुविधाओं पर हमलों का आरोप लगाया और कहा कि ऐसे हमलों के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का अगला असर क्या होगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही कब सामान्य होगी। कतर का मानना है कि संकट जारी रहने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और औद्योगिक उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
वहीं ईरान अमेरिकी दबाव के बावजूद अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका और उसके सहयोगी तेहरान पर दबाव बनाए हुए हैं। ऐसे में हॉर्मुज सिर्फ सैन्य टकराव का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक तेल, LNG और औद्योगिक सप्लाई चेन के लिए सबसे बड़ा जोखिम बनता जा रहा है।









