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प्रेस की आजादी पर बहस तेज , दिल्ली में पत्रकारों पर पुलिस की कार्रवाई के गंभीर आरोप; 20 से ज्यादा पत्रकारों ने उठाए सवाल

RK News by RK News
October 13, 2026
Reading Time: 1 min read
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प्रेस की आजादी पर बहस तेज , दिल्ली में पत्रकारों पर पुलिस की कार्रवाई के गंभीर आरोप; 20 से ज्यादा पत्रकारों ने उठाए सवाल

नई दिल्ली: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे पत्रकारों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्रकारों का कहना है कि उन्हें रिपोर्टिंग के दौरान रोका गया, धक्का दिया गया, हिरासत में लिया गया और कुछ मामलों में उनके मोबाइल फोन तथा रिपोर्टिंग उपकरण भी जब्त किए गए। इन घटनाओं के बाद प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) के अनुसार, 10 और 11 अक्टूबर को दिल्ली, अहमदाबाद और पुणे में विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान कम से कम 37 पत्रकारों को हिरासत में लिया गया और कुछ के साथ कथित तौर पर मारपीट भी हुई।

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रिपोर्टिंग के दौरान हिरासत में लेने और धक्का देने के आरोप

दिल्ली में 10 अक्टूबर को कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान कई मीडिया संस्थानों के पत्रकारों को पुलिस ने हिरासत में लिया। न्यूज़लॉन्ड्री के पत्रकारों ने आरोप लगाया कि रिपोर्टिंग करते समय उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और कुछ के फोन छीन लिए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकारों के पहचान बताने के बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया और प्रदर्शनकारियों के साथ बस में बैठाकर छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया। बाद में पत्रकारों को रिहा कर दिया गया।

ऑल्ट न्यूज़ के पत्रकार अग्निव राय ने भी अपने अनुभव में बताया कि वह कनॉट प्लेस के पास प्रदर्शन की कवरेज कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें और अन्य लोगों को हिरासत में ले लिया। उनका आरोप है कि हिरासत में लेने के बाद उन्हें घटनास्थल से काफी दूर ले जाया गया और पुलिसकर्मियों ने उनकी पूछताछ का स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

37 पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट

पत्रकारों के अधिकारों पर काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था CPJ ने 12 अक्टूबर को बताया कि दिल्ली में कम से कम 35 पत्रकारों को हिरासत में लिया गया, जबकि अहमदाबाद और पुणे में एक-एक पत्रकार को प्रदर्शन की कवरेज के दौरान हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। संस्था ने समाचार रिपोर्टों, पत्रकारों और न्यूज़रूम से बातचीत तथा सोशल मीडिया पर उपलब्ध सत्यापित सामग्री के आधार पर यह जानकारी जुटाई।

CPJ ने पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और उन्हें काम करने से रोकने की घटनाओं पर चिंता जताई है। संस्था का कहना है कि पत्रकारों को केवल अपना पेशेवर काम करने के कारण हिरासत में लेना और उनके उपकरणों को जब्त करना प्रेस की स्वतंत्रता के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

महिला पत्रकारों ने भी लगाए थे गंभीर आरोप

यह विवाद केवल 10 और 11 अक्टूबर की घटनाओं तक सीमित नहीं है। इससे पहले 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शन की कवरेज के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिसकर्मियों पर यौन दुर्व्यवहार और अनुचित शारीरिक व्यवहार के आरोप लगाए थे।

दिल्ली पुलिस ने इन शिकायतों की पुष्टि करते हुए बताया था कि उन्हें आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है। पुलिस ने कहा था कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। आरोपों की स्वतंत्र जांच और उसके निष्कर्षों के सामने आने तक इन्हें सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद क्यों उठ रहे सवाल?

पत्रकारों की हिरासत और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकारों, वकीलों और अन्य पेशेवरों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से गैरकानूनी तरीके से नहीं रोकने पर जोर दिया। इसके बावजूद 11 अक्टूबर को भी प्रदर्शन की कवरेज कर रहे पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं।

इस घटनाक्रम ने सवाल खड़े किए हैं कि भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पत्रकारों की पहचान तथा उनके पेशेवर अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। पुलिस को सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने का अधिकार है, लेकिन पत्रकारों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान उन्हें रिपोर्टिंग करने से रोका गया और उनके साथ बल प्रयोग किया गया। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

CJP प्रदर्शन और SIR विवाद क्या है?

CJP और अन्य प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और इससे पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में हेरफेर और राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।

इसी राजनीतिक विवाद के बीच प्रदर्शन स्थलों पर प्रतिबंध, बड़े पैमाने पर हिरासत और पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले सामने आए हैं। अब पत्रकार संगठनों और मीडिया अधिकार समूहों की मांग है कि घटनाओं की जांच की जाए, जिम्मेदारी तय हो और पत्रकारों को बिना किसी बाधा के अपना काम करने दिया जाए।

Tags: CJP ProtestDelhi Newsdelhi policeIndia NewsJantar MantarjournalistsMedia RightsPress Freedom
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