नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े Cockroach Janata Party (CJP) के नेताओं सौरव दास और अशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद राजनीतिक और छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया सामने आई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दोनों नेताओं की हिरासत की आलोचना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा फहराना अपराध नहीं है। वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा भी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा चुकी हैं।
‘जंतर-मंतर देश के लोगों का है’: राहुल गांधी
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने युवाओं को जेल भेजे जाने की आलोचना करते हुए कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और विपक्षी दल अलग-अलग मंचों से नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर को देश के लोगों का स्थान बताते हुए कहा कि इसे दोबारा जनता के लिए हासिल किया जाएगा। उनकी प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाने की घोषणा की है।
AISA ने भी पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की आलोचना करते हुए कहा था कि ऐसी स्थिति को सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की जरूरत पर जोर दिया।
11 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान नेहा बोरा और कई अन्य छात्र कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया था। AISA सहित विभिन्न छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि भारी पुलिस तैनाती और हिरासत की कार्रवाई ने प्रदर्शनकारियों को अपनी बात रखने से रोका।
सौरव दास और अशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत
सौरव दास और अशुतोष रांका को मंगलवार को जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश करने के बाद हिरासत में लिया गया था। बुधवार को दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। CJP के एक अन्य नेता अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा किया गया। पुलिस के अनुसार, नेताओं ने बैरिकेड पार कर उस क्षेत्र में प्रवेश किया, जिसे हाल ही में प्रदर्शन स्थल के रूप में निर्धारित सूची से हटाया गया था। अधिकारियों ने उन पर पहले दिए गए शांति बनाए रखने के बांड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने सहित आरोप लगाए हैं।
इसके विपरीत, CJP और उससे जुड़े कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई को आंदोलन रोकने की कोशिश बताया है। संगठन के नेताओं का कहना है कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना विरोध जारी रखेंगे।
SIR और चुनाव आयोग को लेकर जारी है विवाद
दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) भी है। प्रदर्शनकारी संगठनों और विपक्ष के कुछ नेताओं ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की है। हालांकि, चुनाव आयोग ने किसी राजनीतिक दल को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों से इनकार किया है। भाजपा ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। इसलिए मतदाता सूची में बदलाव को लेकर लगाए गए आरोप और संबंधित संस्थाओं का पक्ष, दोनों इस विवाद का हिस्सा हैं।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और नेताओं की न्यायिक हिरासत ने शांतिपूर्ण विरोध तथा नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विपक्षी दलों और छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।










