नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित मारपीट के मामले में स्वयं को हिंदुत्व एक्टिविस्ट और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बताने वाले स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ पुलिस कार्रवाई तेज हो गई है। 4 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली पुलिस ने भारद्वाज को मामले में हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब एक पुराने इंटरव्यू का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें भारद्वाज ने कथित तौर पर प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार पर हमला करने और उनका सिर फोड़ने जैसी बात कही थी। इसके बाद Cockroach Janta Party (CJP) और अन्य लोगों ने उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर दिल्ली पुलिस के सामने प्रदर्शन किया।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत जंतर-मंतर पर CJP की ओर से आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान हुई कथित झड़प से हुई। पुलिस के अनुसार संजय कुमार, जो छात्र प्रदर्शनकारी निशु आजाद के पिता हैं, इस दौरान घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस ने शुरुआती तौर पर उनकी चोट को साधारण सिर की चोट बताया था और उनकी खोपड़ी टूटने के दावे को खारिज किया था। पुलिस के मुताबिक मौके से स्वतंत्र भारद्वाज और एक अन्य व्यक्ति सूरज कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई थी तथा बाद में दोनों को कानून के अनुसार नोटिस दिया गया था।
मामला उस समय दोबारा सुर्खियों में आया जब भारद्वाज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में उनके द्वारा कथित तौर पर यह दावा किया गया कि उन्होंने प्रदर्शन में एक व्यक्ति का सिर फोड़ा था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा। इस कथित बयान में उन्होंने अपने राजनीतिक संपर्कों का भी जिक्र किया। हालांकि इन बयानों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से नहीं हुई है और पुलिस ने भी उनके द्वारा किए गए “खोपड़ी फोड़ने” के दावे की पुष्टि नहीं की है।
वायरल वीडियो में क्या दावा किया गया?
वायरल इंटरव्यू में भारद्वाज ने कथित तौर पर संजय कुमार के साथ हुई झड़प और अपनी भूमिका को लेकर बात की। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने दावा किया कि उन्होंने संजय कुमार पर हमला किया था और राजनीतिक पहुंच के कारण उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा। उन्होंने दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का नाम भी लिया और उन्हें अपना “बड़ा भाई” बताया। इन राजनीतिक संरक्षण से जुड़े दावों को संबंधित नेताओं की ओर से स्वीकार किए जाने की कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
यही वीडियो इस पूरे मामले में अहम मोड़ साबित हुआ। वीडियो सामने आने के बाद CJP ने सवाल उठाया कि अगर भारद्वाज ने सार्वजनिक रूप से हमले की बात कही थी तो उनके खिलाफ तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
CJP ने संसद मार्ग थाने तक निकाला मार्च
4 सितंबर को CJP के कार्यकर्ता संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे और भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग की। प्रदर्शन में CJP के प्रतिनिधियों के साथ आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद तथा पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में कड़ी धाराएं लगाने और निष्पक्ष जांच की मांग की।
CJP का आरोप है कि शुरुआती FIR में लगाए गए प्रावधान मामले की गंभीरता के अनुरूप नहीं थे। संगठन ने संजय कुमार पर कथित हमले में SC/ST Act, आपराधिक धमकी और हत्या के प्रयास जैसी धाराएं जोड़ने की मांग की। पुलिस से बातचीत के बाद संबंधित धाराओं को लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई और मेडिकल जांच का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई।
पुलिस ने 72 घंटे में गिरफ्तारी का दिया आश्वासन
CJP प्रतिनिधिमंडल और पुलिस के बीच बातचीत के बाद प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र भारद्वाज को 72 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया है। छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद ने भी मीडिया से कहा कि पुलिस ने कार्रवाई का भरोसा दिया है। CJP ने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस अपने आश्वासन को पूरा नहीं करती है तो संगठन दोबारा थाने पहुंचकर प्रदर्शन करेगा।
इसके बाद भारद्वाज को लेकर पुलिस की गतिविधियां तेज हुईं। बाद की रिपोर्टों में सामने आया कि दिल्ली पुलिस की टीम उनकी तलाश में बुलंदशहर पहुंची थी। पुलिस के पहुंचने से पहले भारद्वाज के वहां से निकल जाने की खबर भी सामने आई। PTI के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया कि वह बाइक से खुर्जा की ओर निकल गए थे और पुलिस की कई टीमें उनकी तलाश में लगाई गई थीं।
निशु आजाद ने लगाए धमकी के आरोप
मामला केवल संजय कुमार पर कथित हमले तक सीमित नहीं रहा। निशु आजाद ने आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्हें ऑनलाइन गालियां और रेप की धमकियां भी दी गईं। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद कुछ समय तक वह घर से बाहर निकलने और स्कूल जाने को लेकर भी परेशान रहीं। पुलिस के सामने इन धमकियों को लेकर अलग शिकायत/FIR की मांग भी उठी।
CJP ने पुलिस से इस मामले में भी कार्रवाई करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन धमकी और आपत्तिजनक सामग्री के मामले में भी जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
पुलिस का क्या कहना है?
दिल्ली पुलिस ने मामले को राजनीतिक प्रभाव के कारण दबाने के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक घटना के बाद भारद्वाज और दूसरे आरोपी से पूछताछ की गई थी तथा उन्हें कानून के अनुसार नोटिस दिया गया था। पुलिस ने यह भी कहा था कि मामले की जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
पुलिस ने संजय कुमार की चोट को लेकर भी CJP के दावे से अलग जानकारी दी। जहां प्रदर्शनकारियों की ओर से गंभीर सिर की चोट और “खोपड़ी फटने” का दावा किया गया, वहीं पुलिस ने कहा कि मेडिकल जांच में साधारण सिर की चोट सामने आई थी और खोपड़ी टूटने की पुष्टि नहीं हुई थी। अब आगे की मेडिकल और कानूनी जांच के आधार पर यह तय किया जाना है कि FIR में कौन-कौन सी गंभीर धाराएं लागू होती हैं।
SC/ST Act और हत्या के प्रयास की मांग क्यों?
CJP का कहना है कि संजय कुमार पर कथित हमला गंभीर था और इसलिए सामान्य मारपीट की धाराओं के बजाय मामले के तथ्यों के आधार पर SC/ST Act तथा हत्या के प्रयास से संबंधित प्रावधानों की जांच होनी चाहिए। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण और जांच के आधार पर हत्या के प्रयास की धारा लागू करने की संभावना पर विचार करने की बात कही है।
यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि किसी FIR में किसी धारा को जोड़ने की मांग या पुलिस द्वारा उसकी जांच किया जाना अपने आप में आरोपी के खिलाफ अपराध साबित नहीं करता। अंतिम कानूनी स्थिति जांच, साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
राजनीतिक संरक्षण के दावे पर भी विवाद
इस मामले का सबसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील पहलू भारद्वाज के कथित वीडियो में किए गए राजनीतिक संरक्षण के दावे हैं। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने दावा किया कि कुछ BJP नेताओं की मदद के कारण उनके खिलाफ जेल जैसी कार्रवाई नहीं हुई। CJP ने BJP के वरिष्ठ नेताओं से इन दावों पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है।
हालांकि, फिलहाल यह आरोप स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं है। किसी नेता का नाम किसी आरोपी द्वारा लिए जाने मात्र से यह साबित नहीं होता कि उस नेता ने पुलिस कार्रवाई को प्रभावित किया था। इसलिए इस पहलू की पुष्टि के लिए स्वतंत्र सबूत और संबंधित नेताओं का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण होगा।
जंतर-मंतर विवाद का पुराना संदर्भ
यह घटना जून-जुलाई 2026 के दौरान जंतर-मंतर पर हुए राजनीतिक और छात्र प्रदर्शनों के व्यापक विवाद से जुड़ी है। CJP की ओर से आयोजित प्रदर्शन के दौरान पुलिस की भारी मौजूदगी और प्रदर्शनकारियों तथा विरोधी समूहों के बीच तनाव की तस्वीरें और वीडियो सामने आए थे। संजय कुमार पर कथित हमले के बाद यह विवाद व्यक्तिगत हिंसा से आगे बढ़कर पुलिस कार्रवाई, राजनीतिक प्रभाव और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा का मुद्दा बन गया।
दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि मौके पर मौजूद लोगों की पहचान और घटना की जांच की जा रही है। इसी दौरान भारद्वाज और सूरज कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई थी। अब वायरल वीडियो और CJP के दबाव के बाद मामले ने फिर से राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है।
अब आगे क्या होगा?
स्वतंत्र भारद्वाज की हिरासत के बाद अब जांच का केंद्र यह रहेगा कि जंतर-मंतर की घटना में वास्तव में क्या हुआ था, संजय कुमार को किस तरह की चोट लगी, वायरल वीडियो में किए गए दावों की कानूनी पुष्टि होती है या नहीं और FIR में किन धाराओं को लागू किया जाना चाहिए।इसके साथ ही पुलिस को निशु आजाद की ओर से लगाए गए ऑनलाइन धमकी के आरोपों की भी जांच करनी होगी। अगर जांच में गंभीर अपराध के पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो आरोपी के खिलाफ उसी आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे मामले में राजनीतिक आरोपों और सोशल मीडिया दावों के बजाय CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और पुलिस जांच महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ आरोपों को अदालत द्वारा सिद्ध अपराध नहीं माना जा सकता; मामला जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन है।










