अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी की जांच के साथ अब ट्रस्ट की भर्ती प्रक्रिया भी जांच एजेंसियों के निशाने पर आ गई है। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों ने नियुक्तियों की पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संवेदनशील वित्तीय जिम्मेदारियां किन आधारों पर सौंपी गईं और क्या नियुक्तियों में तय नियमों का पालन किया गया था।
भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मंदिर के कैश मैनेजमेंट और चढ़ावे से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर ऐसे लोगों की नियुक्ति की गई, जिनकी पृष्ठभूमि सामान्य थी और जो ट्रस्ट के प्रभावशाली लोगों के करीबी बताए जाते हैं। आरोप है कि कुछ नियुक्तियां बिना पर्याप्त सत्यापन और आवश्यक प्रक्रिया पूरी किए की गईं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मुख्य आरोपियों के करीबी होने का दावा
मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपियों में शामिल लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा के नाम भी चर्चा में हैं। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि उन्हें ट्रस्ट और बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े संवेदनशील कार्यों तक पहुंच कैसे मिली और इस पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।
नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली के भी आरोप
जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आए हैं कि मंदिर में नौकरी दिलाने के नाम पर कई लोगों से बड़ी रकम वसूली गई। बताया जा रहा है कि विभिन्न पदों पर भर्ती कराने के बदले उम्मीदवारों से कथित रूप से लाखों रुपये लिए गए। पुलिस और एसआईटी इन आरोपों की भी जांच कर रही हैं और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों तथा संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है।
राम मंदिर ट्रस्ट की भर्ती व्यवस्था को लेकर उठे इन सवालों के बीच जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.










