नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में पहुंचे, जहां उन्होंने जेन ज़ी यानी युवा पीढ़ी को संबोधित किया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने भारत की विकास यात्रा, युवाओं की भूमिका और अपने पुराने SRCC भाषण का जिक्र किया, लेकिन भाषण का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस, विपक्ष और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर राजनीतिक हमले के रूप में सामने आया। मोदी ने अपने हालिया स्वतंत्रता दिवस भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को एक बार फिर दोहराया और कांग्रेस के छात्र संवाद अभियान ‘छात्रों की गूंज’ पर भी तंज कसा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि लाल किले से उन्होंने जब ‘दिमागी नक्सल’ की बात की और इसे एक तरह की ‘होम्योपैथी की गोली’ बताया, तो देश में मौजूद ऐसे लोग एक-एक करके सामने आने लगे। मोदी ने कहा कि जो लोग इस कथित ‘बीमारी’ को बढ़ावा दे रहे हैं, जनता अब उनका भी असली रंग देख रही है।
‘दिमागी नक्सल’ पर फिर बोले मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा कि जैसे ही उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ वाली ‘होम्योपैथी की गोली’ दी, वैसे ही सारे ‘दिमागी नक्सल’ सामने आने लगे। उन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया, जिनके बारे में उनका आरोप है कि वे देश और समाज को गलत दिशा में ले जाने वाली विचारधारा को बढ़ावा दे रहे हैं।
यह टिप्पणी मोदी के 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस भाषण से जुड़ी हुई है। स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा था कि हथियारबंद नक्सलवाद को कमजोर किया गया है, लेकिन ‘मानसिक नक्सल’ अब भी मौजूद है और समाज को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने ऐसे लोगों की पहचान करने, उन्हें अलग-थलग करने और युवाओं को ‘विकसित भारत’ की मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही थी।
‘छात्रों की गूंज’ को बताया ‘झूठ की गूंज’
मोदी ने कांग्रेस के छात्र संवाद अभियान ‘छात्रों की गूंज’ पर भी सीधा निशाना साधा। राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान में छात्रों के बीच परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत, सरकारी भर्तियों में कथित अनियमितताओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं।
यह अभियान राजस्थान के कोटा, उत्तराखंड के देहरादून, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और महाराष्ट्र के पुणे समेत कई स्थानों पर आयोजित किया जा चुका है।
प्रधानमंत्री ने अभियान के नाम पर तंज कसते हुए इसे ‘झूठ की गूंज’ करार दिया। मोदी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि “सच की हुंकार के आगे झूठ की गूंज टिक नहीं सकेगी।” इस टिप्पणी को राहुल गांधी और कांग्रेस के छात्र अभियान पर प्रधानमंत्री के सीधे राजनीतिक हमले के तौर पर देखा जा रहा है।
‘माई-बाप कल्चर’ पर कांग्रेस को घेरा
प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस की राजनीति पर हमला करते हुए ‘माई-बाप संस्कृति’ का भी जिक्र किया। ‘माई-बाप’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर ऐसे राजनीतिक या संस्थागत माहौल के लिए किया जाता है, जहां किसी प्रभावशाली व्यक्ति या ‘गॉडफादर’ के सहारे काम आगे बढ़ने की धारणा हो।
मोदी ने कहा कि वह ऐसी राजनीति के सामने चट्टान की तरह खड़े हैं। उन्होंने इस तरह के राजनीतिक संरक्षण और निर्भरता की संस्कृति को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा।
‘नाराज फूफा’ वाला तंज
प्रधानमंत्री ने सरकार की योजनाओं और विकास परियोजनाओं का विरोध करने वालों के लिए ‘नाराज फूफा’ का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि कैंपस से बाहर निकलने के बाद छात्रों को दो तरह के लोग मिलेंगे। एक वे लोग होंगे जो समाज की ताकत को राष्ट्र की ताकत में बदलने में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं, जबकि दूसरे वे होंगे जो किसी भी काम की शुरुआत होते ही ‘नाराज फूफा’ बनकर हर चीज में कमी निकालने लगते हैं।
मोदी ने दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा, हाई-स्पीड ट्रेन, UPI और नए संसद भवन जैसे उदाहरण देते हुए कहा कि जब भी ऐसी परियोजनाएं शुरू हुईं, कुछ लोगों ने उनकी जरूरत पर सवाल उठाए। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत ने इन सवालों का जवाब अपने काम से दिया है और देश को जो जरूरी है, उसे करने से कोई नहीं रोक सकता।
2013 के SRCC भाषण को भी याद किया
प्रधानमंत्री ने अपने 2013 के SRCC दौरे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे और विपक्षी दल के नेता के तौर पर SRCC आए थे। मोदी के मुताबिक, उन्होंने उस मंच का इस्तेमाल तत्कालीन केंद्र सरकार पर केवल राजनीतिक हमला करने के बजाय अपना विजन सामने रखने के लिए किया था।
उन्होंने कहा कि 2013 में उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ की बात की थी। उस समय कई लोगों को यह विचार असंभव लगता था, लेकिन आज ‘मेक इन इंडिया’ की ब्रांड वैल्यू दिखाई देती है।
मोदी ने 2013 के भारत की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का जिक्र करते हुए तत्कालीन यूपीए सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने उस समय देश में ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ की चर्चा और भारत को ‘फ्रैजाइल फाइव’ देशों में गिने जाने का उल्लेख किया। उन्होंने आतंकवाद और पाकिस्तान की चुनौती को लेकर भी उस दौर के माहौल पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी का नाम लेकर नहीं, लेकिन निशाना साफ?
प्रधानमंत्री के भाषण में कांग्रेस और राहुल गांधी से जुड़े अभियानों पर टिप्पणियां एक साथ आईं। खास तौर पर ‘छात्रों की गूंज’ को ‘झूठ की गूंज’ कहना और ‘दिमागी नक्सल’ के मुद्दे को फिर उठाना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, यह कहना कि प्रधानमंत्री का पूरा भाषण केवल राहुल गांधी पर केंद्रित था, एक राजनीतिक व्याख्या होगी। कार्यक्रम का आधिकारिक संदर्भ SRCC के शताब्दी समारोह और छात्रों को संबोधित करना था, जिसमें मोदी ने विकास, युवाओं, भारत की अर्थव्यवस्था और अपनी सरकार की उपलब्धियों पर भी बात की।
पाकिस्तान को भी दी चेतावनी
SRCC में प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान को लेकर भी कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश करता है तो भारतीय सशस्त्र बल उसकी सीमा के भीतर जाकर जवाब देंगे। मोदी ने ‘घर में घुसकर मारते हैं’ वाली अपनी पुरानी राजनीतिक भाषा को दोहराते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान ने कोई दुस्साहस किया तो भारतीय सेना उसके इलाके में जाकर कार्रवाई करेगी।
प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में शांति की स्थिति में सुधार का दावा किया और कहा कि माओवादी आतंकवाद तथा नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है।
मोदी ने युवाओं को क्या संदेश दिया?
SRCC के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री का मुख्य संदेश युवाओं को देश की विकास यात्रा में सक्रिय भूमिका निभाने का था। उन्होंने छात्रों से कहा कि उन्हें केवल समस्याओं पर सवाल उठाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश की क्षमता को आगे बढ़ाने में भी योगदान देना चाहिए।
इसी संदर्भ में मोदी ने उन लोगों पर निशाना साधा जिन्हें वह विकास कार्यों का लगातार विरोध करने वाला वर्ग मानते हैं। ‘नाराज फूफा’, ‘दिमागी नक्सल’ और ‘झूठ की गूंज’ जैसे शब्दों के जरिए उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों पर व्यंग्य किया।
क्या यह 2026 की राजनीति का नया चुनावी अंदाज है?
SRCC जैसे विश्वविद्यालयी मंच पर प्रधानमंत्री द्वारा कांग्रेस और राहुल गांधी से जुड़े राजनीतिक अभियानों पर तीखे हमले किए जाने ने उनके भाषण के राजनीतिक पक्ष को भी चर्चा में ला दिया है। खास तौर पर ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्द का दोबारा इस्तेमाल और ‘छात्रों की गूंज’ को ‘झूठ की गूंज’ कहना बताता है कि युवा और छात्र राजनीति भी मौजूदा राजनीतिक टकराव का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है।
एक तरफ मोदी सरकार विकास, रोजगार, डिजिटल अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को अपने राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बना रही है, वहीं कांग्रेस और विपक्ष छात्रों के बीच बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रिया, पेपर लीक और शिक्षा की लागत जैसे मुद्दों को उठाने की कोशिश कर रहे हैं। SRCC का भाषण इसी व्यापक राजनीतिक टकराव की एक और कड़ी के रूप में देखा जा सकता है।











