नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े विचारक और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व राज्य बौद्धिक प्रकोष्ठ प्रमुख टी.जी. मोहनदास के कथित विवादित बयानों ने देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी है। जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक और शिक्षा सुधारों को लेकर हुए छात्र आंदोलनों पर टिप्पणी करते हुए मोहनदास द्वारा दिए गए कथित बयानों के बाद केरल पुलिस ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
क्या है पूरा विवाद?
शिकायतों के बाद पुलिस हरकत में
ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (AIYF), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) और अन्य संगठनों ने केरल के पुलिस महानिदेशक और राज्य सरकार के समक्ष औपचारिक शिकायतें दर्ज कराते हुए आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस प्रकार के बयान लोकतांत्रिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ हैं तथा समाज में हिंसा और भय का माहौल पैदा कर सकते हैं।
शिकायतों के बाद केरल गृह विभाग ने मामले की जांच साइबर सेल के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वायरल सामग्री मूल रूप में प्रकाशित की गई थी या उसमें किसी प्रकार का संपादन किया गया है।
RSS ने बनाई दूरी
विवाद बढ़ने के बाद RSS की केरल इकाई ने स्पष्ट किया कि टी.जी. मोहनदास संगठन के किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं और उनके कथित बयान उनके व्यक्तिगत विचार हैं। संघ से जुड़े सूत्रों के अनुसार, संगठन इस प्रकार की भाषा और हिंसा के समर्थन से स्वयं को अलग रखता है।
विपक्ष ने साधा निशाना
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यदि लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जंतर-मंतर आंदोलन और उससे जुड़े घटनाक्रम पहले ही राष्ट्रीय राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बन चुके हैं। ऐसे में इस प्रकार के विवादित बयानों ने बहस को और तेज कर दिया है। अब सबकी नजरें केरल पुलिस की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल बयानों की वास्तविकता क्या है और क्या इस मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।










