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” वैश्विक GDP में BRICS की हिस्सेदारी 40%” – पुतिन का G7 पर तंज

RK News by RK News
September 12, 2026
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” वैश्विक GDP में BRICS की हिस्सेदारी 40%” – पुतिन का G7 पर तंज

नई दिल्ली: भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित BRICS Business Forum में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने G7 पर निशाना साधते हुए BRICS की बढ़ती आर्थिक ताकत का जिक्र किया। पुतिन ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS देशों का योगदान 40 फीसदी से अधिक हो चुका है और यह G7 देशों की हिस्सेदारी से कहीं ज्यादा है। उनके इस बयान को BRICS और पश्चिमी देशों के बीच बदलते आर्थिक संतुलन को लेकर रूस के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

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पुतिन ने G7 पर क्या कहा?

पुतिन ने BRICS Business Forum में पश्चिमी देशों की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था में नए विकास केंद्र तेजी से उभर रहे हैं। उनके मुताबिक 20वीं सदी के दूसरे हिस्से में वैश्विक आर्थिक विकास का नेतृत्व करने वाले देशों की स्थिति अब बदल रही है और BRICS जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

पुतिन ने BRICS की आर्थिक हिस्सेदारी को G7 से जोड़ते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में BRICS देशों ने वैश्विक GDP में 40 फीसदी से अधिक योगदान दिया है। कुछ रिपोर्टों में उनके हवाले से G7 की हिस्सेदारी 29 फीसदी बताई गई है, जबकि अन्य रिपोर्टों में 18 फीसदी का आंकड़ा दिया गया है। इसलिए इन आंकड़ों को पुतिन के दावे के रूप में देखना जरूरी है, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित तुलना के रूप में।

BRICS की आर्थिक ताकत पर मोदी ने भी दिया जोर

BRICS Business Forum में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी समूह की बढ़ती आर्थिक ताकत का उल्लेख किया। मोदी ने कहा कि BRICS देश आज दुनिया की करीब आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, वैश्विक GDP में करीब 40 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उनकी हिस्सेदारी 25 फीसदी से अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि BRICS अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि दर वैश्विक औसत की तुलना में तेज रही है।

मोदी ने BRICS देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करने और कारोबार के अवसर बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने भारत को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच विकास और स्थिरता के भरोसेमंद केंद्र के तौर पर पेश किया।

पुतिन ने पश्चिमी आर्थिक नीतियों पर भी साधा निशाना

पुतिन ने BRICS Business Forum में पश्चिमी देशों की व्यापार और आर्थिक नीतियों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा कई बार ऐसे रूप ले रही है जिसमें प्रतिबंध, व्यापारिक बाधाएं और परिवहन मार्गों को प्रभावित करने जैसे कदम शामिल हैं।

रूसी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि कुछ पश्चिमी देश अपनी पुरानी आर्थिक स्थिति और नेतृत्व को बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धियों पर दबाव डाल रहे हैं। उन्होंने BRICS को वैश्विक विकास के लिए एक नए और टिकाऊ मंच के रूप में विकसित करने की जरूरत बताई।

BRICS अब सिर्फ राजनीतिक मंच नहीं?

BRICS के विस्तार के साथ समूह का आर्थिक महत्व भी बढ़ा है। रूस के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव ने Reuters से कहा कि BRICS अब केवल भू-राजनीतिक समूह से आगे बढ़कर अधिक व्यावहारिक आर्थिक साझेदारी की दिशा में जा रहा है। इसमें कारोबार, टेक्नोलॉजी कंपनियों, निवेश, भुगतान व्यवस्था और साझा बुनियादी ढांचे पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश शामिल है।

BRICS देशों के बीच सीमा-पार भुगतान को आसान बनाने और राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी काम चल रहा है। समूह BRICS Pay जैसी व्यवस्था और केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर भी विचार कर रहा है।

डॉलर पर निर्भरता कम करने की चर्चा

BRICS में डॉलर पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था विकसित करने की चर्चा लंबे समय से होती रही है। हालांकि रूस ने हाल में स्पष्ट किया है कि वह औपचारिक रूप से “de-dollarisation” की नीति नहीं अपना रहा है और सभी स्वीकार्य भुगतान माध्यमों के लिए खुला है।

इससे साफ है कि BRICS के भीतर वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था को लेकर रुचि जरूर है, लेकिन सदस्य देशों की आर्थिक प्राथमिकताएं पूरी तरह एक जैसी नहीं हैं।

BRICS और G7 में क्या अंतर है?

G7 में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं। यह दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है।

इसके मुकाबले BRICS का विस्तार हाल के वर्षों में हुआ है। मौजूदा समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं। BRICS का उद्देश्य विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक और राजनीतिक सहयोग बढ़ाना तथा वैश्विक संस्थानों में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग करना है।

BRICS के सामने चुनौतियां भी कम नहीं

BRICS की बढ़ती आर्थिक ताकत के बावजूद समूह के सामने कई चुनौतियां हैं। इसके सदस्य देशों की विदेश नीति और क्षेत्रीय हित हमेशा एक जैसे नहीं होते। खासकर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने समूह के भीतर मतभेदों को उजागर किया है।

ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मौजूदा तनाव BRICS के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में नई दिल्ली में हो रहे शिखर सम्मेलन में सभी सदस्य देशों के लिए स्वीकार्य साझा रुख तैयार करना आसान नहीं होगा।

भारत के लिए क्यों अहम है पुतिन का बयान?

भारत BRICS का संस्थापक सदस्य है और इस साल समूह की अध्यक्षता कर रहा है। ऐसे समय में जब अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ व्यापार, टैरिफ और रणनीतिक संबंधों को लेकर कई मुद्दे सामने हैं, वहीं रूस और चीन जैसे देशों के साथ भारत के संबंध भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

पुतिन का G7 के मुकाबले BRICS की आर्थिक ताकत का उल्लेख ऐसे समय हुआ है जब भारत नई दिल्ली में 18वें BRICS Summit की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है।

पुतिन का यह बयान BRICS की बढ़ती आर्थिक भूमिका को लेकर रूस के दृष्टिकोण को सामने रखता है। हालांकि BRICS की आर्थिक ताकत बढ़ने के बावजूद समूह की वास्तविक वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसके सदस्य देश अपने मतभेदों के बावजूद कितनी प्रभावी तरीके से साझा नीतियां और आर्थिक तंत्र विकसित कर पाते हैं।

Tags: BRICS 2026BRICS SummitBRICS vs G7G7Global EconomyGlobal GDPNarendra ModiRussia India RelationsVladimir Putin
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