नवी मुंबई: महाराष्ट्र के नवी मुंबई में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता डेटा की सुरक्षा से जुड़ा एक मामला सामने आया है। अधिकारियों के मुताबिक, गुरुवार 27 अगस्त 2026 को एक स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ता को 3,400 से ज्यादा Special Intensive Revision यानी SIR फॉर्म की फोटोकॉपी करते हुए पकड़ा गया। ये फॉर्म पनवेल विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं से संबंधित थे और इनमें मतदाताओं की तस्वीरों के साथ व्यक्तिगत जानकारी तथा बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के आधिकारिक हस्ताक्षर भी मौजूद थे। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने संबंधित क्षेत्र के पांच BLO को निलंबित कर दिया है, जबकि पुलिस ने बीजेपी कार्यकर्ता के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
3,404 SIR फॉर्म के साथ पकड़ा गया BJP कार्यकर्ता
अधिकारियों के अनुसार, घटना नवी मुंबई के खारघर इलाके की एक फोटोकॉपी दुकान पर सामने आई। स्थानीय शिवसेना (UBT) नेता ने कथित तौर पर भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के पदाधिकारी सूरज पाटिल को 3,404 SIR फॉर्म के साथ पकड़ा। ये सभी फॉर्म पनवेल विधानसभा क्षेत्र से संबंधित बताए गए हैं। मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद राजस्व अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की।
जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि जब्त किए गए दस्तावेज सामान्य कागज या अनधिकृत फॉर्म नहीं थे, बल्कि 188 पनवेल विधानसभा क्षेत्र से जुड़े वास्तविक SIR फॉर्म थे। इन दस्तावेजों में मतदाताओं की फोटो, व्यक्तिगत जानकारी और संबंधित BLOs के आधिकारिक हस्ताक्षर शामिल थे। इसी वजह से प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित BLOs की जिम्मेदारी की भी जांच शुरू की।
फॉर्म असली मिलने के बाद 5 BLO सस्पेंड
रायगढ़ जिला प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक, जब्त किए गए दस्तावेजों का सत्यापन किया गया और उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि हुई। रायगढ़ कलेक्टर ने बताया कि ये मूल SIR फॉर्म थे और संबंधित क्षेत्र के BLOs की जिम्मेदारी में थे। दस्तावेजों की सुरक्षा और उनके अनधिकृत तरीके से कॉपी किए जाने की घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने पांच BLOs को निलंबित कर दिया।
अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना भी है कि मतदाताओं से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज फोटोकॉपी की दुकान तक कैसे पहुंचे और उन्हें बाहर ले जाने की अनुमति या पहुंच किस स्तर पर मिली। प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या केवल फोटोकॉपी तैयार की जा रही थी या इन दस्तावेजों की प्रतियां आगे कहीं वितरित भी की गईं।
SIR फॉर्म में क्या-क्या जानकारी थी?
SIR यानी Special Intensive Revision प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की समीक्षा और उसे अपडेट करना है। इसके तहत मतदाताओं से संबंधित विभिन्न जानकारियां दर्ज की जाती हैं। पनवेल क्षेत्र से जब्त किए गए फॉर्म में मतदाताओं की तस्वीरें, व्यक्तिगत विवरण और BLOs के आधिकारिक हस्ताक्षर मौजूद होने की बात अधिकारियों ने कही है।
यही वजह है कि मामले में केवल सरकारी दस्तावेजों की फोटोकॉपी का सवाल नहीं है, बल्कि मतदाता डेटा की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। यदि ऐसे दस्तावेज बिना अनुमति के कॉपी किए गए या उनकी प्रतियां आगे साझा की गईं, तो इससे मतदाताओं की निजी जानकारी के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इन दस्तावेजों की प्रतियां किसी अन्य व्यक्ति या संगठन को दी गई थीं या नहीं।
नायब तहसीलदार ने दर्ज कराई शिकायत
घटना की जानकारी मिलने के बाद राजस्व अधिकारियों ने जब्त दस्तावेजों की जांच की। सत्यापन के बाद नायब तहसीलदार की ओर से आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई। इसके आधार पर खारघर पुलिस ने सूरज पाटिल के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने बताया कि मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ-साथ Representation of the People Act के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस ने पाटिल को हिरासत में लिया था और कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस देने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
BJP कार्यकर्ता की भूमिका पर जांच जारी
सूरज पाटिल की ओर से SIR फॉर्म की इतनी बड़ी संख्या में फोटोकॉपी किए जाने के पीछे क्या उद्देश्य था, इसकी जांच की जा रही है। अधिकारियों के सामने मुख्य सवाल यह है कि 3,404 आधिकारिक SIR फॉर्म उन्हें कैसे मिले और इन्हें फोटोकॉपी कराने की जरूरत क्यों पड़ी।
फिलहाल प्रशासन ने इस मामले में किसी राजनीतिक दल या संगठन की आधिकारिक संलिप्तता का निष्कर्ष नहीं दिया है। कार्रवाई एक व्यक्ति द्वारा कथित तौर पर सरकारी चुनावी दस्तावेजों की अनधिकृत फोटोकॉपी किए जाने के मामले में की गई है। पुलिस और प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि फॉर्म किस उद्देश्य से कॉपी किए जा रहे थे और उनकी प्रतियों का इस्तेमाल कहां किया जाना था।
मतदाता डेटा की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनावी प्रक्रिया में BLOs के पास बड़ी संख्या में मतदाताओं से जुड़े दस्तावेज और व्यक्तिगत जानकारी होती है। ऐसे में इन दस्तावेजों का सुरक्षित रखरखाव और बिना अनुमति उनके इस्तेमाल को रोकना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
एक तरफ प्रशासन ने मामले में पांच BLOs को निलंबित कर अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि 3,404 फॉर्म की फोटोकॉपी किस उद्देश्य से की जा रही थी। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी सामने आ सकता है कि क्या केवल दस्तावेजों की कॉपी तैयार की गई थी या मतदाता जानकारी को किसी अन्य तरीके से इस्तेमाल करने की कोशिश की गई।









