नई दिल्ली: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच संघर्ष तेज होने और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते विवाद के बीच आशंका जताई जा रही है कि यदि यह अहम समुद्री मार्ग बाधित हुआ तो भारत में पेट्रोल, डीजल, LPG और LNG की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे ईंधन की कीमतों में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत कच्चे तेल का कुछ हिस्सा अमेरिका और रूस जैसे देशों से खरीद सकता है, लेकिन रसोई गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस (LNG) के लिए अब भी खाड़ी देशों पर उसकी निर्भरता काफी अधिक है।
कच्चे तेल की कीमत बढ़ी तो महंगे होंगे पेट्रोल, डीजल और गैस
देश की सरकारी तेल कंपनियां—IOCL, BPCL और HPCL—अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर पेट्रोल, डीजल, LPG और LNG की लागत तय करती हैं।
यदि मध्य पूर्व में युद्ध लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल आता है, तो इसका सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में सरकार और तेल कंपनियों पर ईंधन की कीमतें बढ़ाने का दबाव बन सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है। युद्ध शुरू होने से पहले भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से पूरा करता था।
- लगभग 40% कच्चा तेल
- करीब 60% LNG
- और लगभग 90% LPG
भारत खाड़ी देशों से इसी समुद्री रास्ते के जरिए आयात करता था।
अगर यह मार्ग बंद होता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।
युद्ध के बीच सप्लाई पहले ही हुई प्रभावित
रिपोर्टों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति और नई खरीद दोनों में कमी आई है। 28 फरवरी से 8 जुलाई के बीच होर्मुज स्ट्रेट के जरिए भारत पहुंचे लगभग 50 जहाजों में अधिकतर पहले से बुक या रुकी हुई खेप थीं।
मौजूदा हालात में नए जहाजों को इस समुद्री मार्ग से भेजना जोखिम भरा माना जा रहा है। सुरक्षा चिंताओं के कारण कई शिपिंग कंपनियां भी अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बाधित रहता है तो भारत को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशने होंगे। हालांकि कच्चे तेल के लिए कुछ विकल्प मौजूद हैं, लेकिन LPG और LNG की आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
यदि वैश्विक संकट और गहराता है तो आने वाले दिनों में ईंधन बाजार में अस्थिरता और कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।










