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H-1B Visa पर ट्रंप प्रशासन का बड़ा प्रस्ताव, नौकरी गई तो 60 दिन का Grace Period खत्म? भारतीय IT Professionals पर बड़ा असर

RK News by RK News
September 11, 2026
Reading Time: 2 mins read
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H-1B Visa पर ट्रंप प्रशासन का बड़ा प्रस्ताव, नौकरी गई तो 60 दिन का Grace Period खत्म? भारतीय IT Professionals पर बड़ा असर

नई दिल्ली: अमेरिका में काम कर रहे भारतीय IT Professionals के लिए H-1B Visa से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने H-1B और कुछ अन्य employment-based visas पर मिलने वाले 60 दिन के Grace Period को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है। यह बदलाव लागू होने पर नौकरी जाने के बाद विदेशी कर्मचारियों को नई नौकरी या दूसरा वैध इमिग्रेशन स्टेटस तलाशने के लिए मिलने वाला मौजूदा समय काफी कम हो सकता है।

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हालांकि, अभी यह नियम लागू नहीं हुआ है। अमेरिकी Department of Homeland Security (DHS) ने इसका प्रस्ताव रखा है और इसे final rule बनाने से पहले public comments लिए जाएंगे। इसलिए फिलहाल H-1B holders के लिए मौजूदा 60-day grace period लागू है।

H-1B का 60 दिन का Grace Period क्या है?

मौजूदा व्यवस्था के तहत H-1B visa holder की नौकरी खत्म होने के बाद उसे आम तौर पर अधिकतम 60 दिनों तक अमेरिका में रहने की अनुमति मिल सकती है। इस दौरान कर्मचारी नई नौकरी खोज सकता है, नया H-1B sponsor तलाश सकता है या कुछ परिस्थितियों में अपना immigration status बदलने की कोशिश कर सकता है। यह व्यवस्था खास तौर पर उन विदेशी कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा रही है जिनकी नौकरी अचानक चली जाती है। टेक कंपनियों में layoffs के दौरान इसका महत्व और बढ़ जाता है।

DHS के नए प्रस्ताव का उद्देश्य इस buffer period को हटाना है। प्रस्ताव लागू होने पर रोजगार खत्म होते ही H-1B holder की स्थिति पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो सकती है और उसे अमेरिका में रहने का वैध आधार तुरंत तलाशना होगा।

भारतीय IT Professionals के लिए क्यों बड़ा झटका?

इस प्रस्ताव का असर भारतीय Professionals पर खास तौर पर पड़ सकता है क्योंकि भारतीय नागरिक H-1B programme के सबसे बड़े beneficiaries में शामिल हैं। अमेरिका की IT और technology कंपनियों में बड़ी संख्या में भारतीय professionals H-1B के जरिए काम करते हैं।

TCS, Infosys और दूसरी भारतीय IT कंपनियां भी अमेरिका में H-1B workers की बड़ी sponsors रही हैं। ऐसे में layoffs या project cancellations की स्थिति में कर्मचारियों को नई sponsorship तलाशने के लिए मिलने वाला समय कम होना उनके लिए बड़ा जोखिम बन सकता है।

Layoff हुआ तो क्या बदल जाएगा?

मौजूदा व्यवस्था में किसी H-1B employee की नौकरी चली जाती है तो उसके पास तुरंत देश छोड़ने के बजाय नई नौकरी तलाशने के लिए कुछ समय होता है। यही समय immigration paperwork, employer transfer और दूसरे विकल्पों को व्यवस्थित करने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर प्रस्तावित बदलाव लागू होता है, तो नौकरी खत्म होने और अमेरिका में वैध रूप से बने रहने के बीच का gap काफी कम हो जाएगा। इससे कर्मचारियों पर तुरंत नई sponsorship हासिल करने या अमेरिका से बाहर जाने का दबाव बढ़ सकता है।

Immigration experts के मुताबिक, ऐसी स्थिति में H-1B holders को अपनी नौकरी खत्म होने का इंतजार करने के बजाय पहले से contingency planning करनी पड़ सकती है।

सिर्फ H-1B ही नहीं, इन Visa holders पर भी असर

DHS का प्रस्ताव केवल H-1B तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार इसमें E-1, E-2, L-1, O-1, TN, H-1B1 और E-3 जैसी कुछ अन्य temporary work visa categories भी शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि प्रस्ताव लागू होने पर अमेरिकी कंपनियों में काम करने वाले कई विदेशी professionals के लिए नौकरी जाने के बाद immigration transition का समय कम हो सकता है।

H-1B Visa पर पहले ही बढ़ चुका है दबाव

Grace Period को खत्म करने का प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब H-1B programme को लेकर ट्रंप प्रशासन पहले ही कई बड़े बदलाव और restrictions सामने ला चुका है।

H-1B petitions पर $100,000 की अतिरिक्त fee को लेकर भी बड़ा विवाद चल रहा है। इसके अलावा DHS ने H-1B cap-subject petitions के लिए $103,265 की नई filing fee का प्रस्ताव रखा है। दोनों व्यवस्थाओं की कानूनी स्थिति अलग है और इन्हें एक साथ लागू होना अभी तय नहीं है। इसलिए $200,000 से ज्यादा की संभावित लागत को फिलहाल संभावित scenario के रूप में ही देखा जाना चाहिए, final fee के रूप में नहीं।

Indian IT companies पर क्या असर पड़ सकता है?

H-1B policies में लगातार सख्ती भारतीय IT companies के US staffing model को प्रभावित कर सकती है। अगर अमेरिका में foreign workers को sponsor करना महंगा और जोखिम भरा होता है, तो कंपनियां कुछ काम भारत या दूसरे देशों में offshore centres से कराने पर ज्यादा जोर दे सकती हैं।

हाल के USCIS data पर आधारित रिपोर्टों के मुताबिक, सितंबर 2025 से मई 2026 के बीच कुछ consular H-1B filings में 91% से ज्यादा की गिरावट देखी गई थी। Indian IT companies, खासकर Infosys और TCS, इस बदलाव से प्रभावित प्रमुख कंपनियों में शामिल थीं।

इसका एक संभावित असर यह हो सकता है कि भारतीय IT companies अमेरिका में onsite hiring कम करें और भारत में delivery तथा technology teams को मजबूत करें। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि प्रस्तावित grace-period बदलाव से कितनी नौकरियां भारत की ओर वापस आएंगी।

क्या मौजूदा H-1B holders को तुरंत अमेरिका छोड़ना होगा?

फिलहाल मौजूदा H-1B visa holders को तुरंत अमेरिका छोड़ने की जरूरत नहीं है। अमेरिकी Department of Homeland Security (DHS) ने 60 दिन के grace period को खत्म करने का प्रस्ताव जरूर रखा है, लेकिन यह अभी अंतिम नियम नहीं बना है। प्रस्ताव को लागू करने से पहले अमेरिकी प्रशासन को public comments की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद DHS इस पर मिले सुझावों की समीक्षा करेगा और तय करेगा कि प्रस्ताव को उसी रूप में लागू किया जाए, उसमें बदलाव किया जाए या इसे वापस ले लिया जाए।

इसका मतलब है कि फिलहाल नौकरी जाने की स्थिति में पात्र H-1B visa holders को मौजूदा नियमों के तहत अधिकतम 60 दिन तक अमेरिका में रहने और इस दौरान नई नौकरी, नए employer sponsorship या किसी अन्य वैध immigration status की तलाश करने का अवसर मिल सकता है।

अगर DHS का प्रस्ताव आगे चलकर final rule बन जाता है, तो उसका असर तुरंत या पिछली तारीख से लागू होगा, यह जरूरी नहीं है। नियम की effective date और उसमें शामिल transitional provisions यह तय करेंगे कि बदलाव किन लोगों पर और किस तारीख से लागू होगा। इसलिए मौजूदा H-1B workers पर नई व्यवस्था का असर तभी स्पष्ट होगा, जब DHS अंतिम नियम जारी करेगा और उसके लागू होने की तारीख बताएगा।

भारतीय Professionals को क्या ध्यान रखना चाहिए?

H-1B पर काम कर रहे भारतीय professionals के लिए मौजूदा स्थिति में सबसे अहम बात यह है कि वे policy proposal और final rule के बीच अंतर समझें। नौकरी जाने की स्थिति में immigration attorney से तुरंत सलाह लेना, employer transfer की प्रक्रिया को समझना और वैकल्पिक immigration options की जानकारी रखना महत्वपूर्ण हो सकता है।

खासकर US में लंबे समय से काम कर रहे professionals के लिए H-1B status, spouse/dependent status, green card process और employer sponsorship की स्थिति अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसी एक सामान्य नियम को हर व्यक्ति पर लागू नहीं किया जा सकता।

Tags: H-1B Grace PeriodH-1B VisaH-1B Visa UpdateIndian IT ProfessionalsInfosysIT JobsTCSTrumpUS Visaअमेरिका
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