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BSP में फिर बड़ा उलटफेर: मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निकाला

RK News by RK News
September 10, 2026
Reading Time: 1 min read
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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक और पारिवारिक घटनाक्रम सामने आया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को बीएसपी से पूरी तरह बाहर कर दिया है। मायावती ने कहा कि आकाश आनंद “डबल माइंड” होकर काम कर रहे थे और ऐसी स्थिति में पार्टी तथा बहुजन आंदोलन के व्यापक हितों की रक्षा करना संभव नहीं था। यह फैसला आकाश आनंद के ससुर और बीएसपी के पूर्व नेता अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा के कुछ ही समय बाद सामने आया।

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मायावती ने अपने बयान में आकाश आनंद के पार्टी के प्रति हालिया रवैये पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आकाश ने उनकी हाल की सोशल मीडिया पोस्ट को भी रीपोस्ट करना जरूरी नहीं समझा, जबकि पहले वह ऐसा करते रहे थे। मायावती ने इसे उनके पार्टी और आंदोलन के प्रति बदलते रुख के संकेत के तौर पर देखा।

मायावती ने आकाश आनंद पर क्या आरोप लगाए?

मायावती के मुताबिक, आकाश आनंद पार्टी और बहुजन आंदोलन के वास्तविक हितों को लेकर स्पष्ट नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि आकाश पर रिश्ते-नातों का मोह पार्टी के हितों से ज्यादा हावी हो गया था।

मायावती ने विशेष रूप से आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि अगर अशोक सिद्धार्थ को आकाश के राजनीतिक भविष्य और बीएसपी के व्यापक हितों की वास्तविक चिंता होती तो वह पहले ही राजनीति से संन्यास ले लेते। मायावती ने अशोक सिद्धार्थ की नीयत और राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल उठाए।

हालांकि ये मायावती के राजनीतिक आरोप और उनका आकलन हैं। आकाश आनंद की ओर से इन आरोपों पर अलग से क्या प्रतिक्रिया आती है, यह आगे महत्वपूर्ण होगा।

अशोक सिद्धार्थ ने अचानक राजनीति से क्यों लिया संन्यास?

आकाश आनंद के निष्कासन से कुछ समय पहले उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया था। सिद्धार्थ बीएसपी के वरिष्ठ नेताओं में रह चुके हैं और राज्यसभा के पूर्व सदस्य भी रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि वह राजनीति और सामाजिक जीवन से संन्यास ले रहे हैं।

अशोक सिद्धार्थ ने मायावती के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए कहा कि बहुजन मिशन के लिए उन्होंने लंबे समय तक काम किया है। उन्होंने उन आरोपों को भी खारिज किया कि वह पार्टी पर कब्जा करने या आकाश आनंद को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे।

दिलचस्प बात यह है कि मायावती ने इससे एक दिन पहले संकेत दिया था कि अगर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से संन्यास लेते हैं तो आकाश आनंद को पार्टी में दोबारा जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा सकता है। इसके बाद सिद्धार्थ ने संन्यास की घोषणा कर दी, लेकिन अगले ही चरण में मायावती ने आकाश को पार्टी से बाहर कर दिया।

आकाश आनंद का राजनीतिक सफर और मायावती से रिश्ता

आकाश आनंद को मायावती ने दिसंबर 2023 में अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था। उस समय बीएसपी में उन्हें भविष्य के नेतृत्व के तौर पर पेश किया गया था और उन्हें पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी दी गई थीं।

लेकिन इसके बाद उनका राजनीतिक सफर लगातार उतार-चढ़ाव से गुजरता रहा। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान एक भाषण को लेकर विवाद के बाद मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटा दिया और उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित करने का फैसला भी वापस ले लिया था। इसके बाद आकाश को कुछ समय के लिए चुनाव प्रचार से भी दूर रखा गया।

बाद में आकाश आनंद ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई और उन्हें फिर से राजनीतिक भूमिका मिली। लेकिन अब सितंबर 2026 में उन्हें दोबारा पार्टी से बाहर कर दिया गया है।

मायावती और आकाश के बीच विवाद में अशोक सिद्धार्थ की भूमिका क्यों आई?

मायावती और आकाश आनंद के बीच मतभेदों में अशोक सिद्धार्थ का नाम पहले भी सामने आता रहा है। आकाश आनंद के ससुर होने के साथ-साथ अशोक सिद्धार्थ बीएसपी के वरिष्ठ नेता रहे हैं। मायावती ने पहले भी आकाश के राजनीतिक फैसलों और उनके आसपास के प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी।

इस बार मायावती ने साफ तौर पर कहा कि आकाश को पार्टी में आगे बढ़ने के लिए पहले अपने आसपास के पारिवारिक प्रभाव से अलग राजनीतिक निर्णय लेने की जरूरत थी। हालांकि अब अशोक सिद्धार्थ के संन्यास की घोषणा के बावजूद आकाश को पार्टी से बाहर कर दिया गया है।

क्या आकाश आनंद की जगह ईशान आनंद को मौका मिलेगा?

इस पूरे घटनाक्रम के बीच मायावती के छोटे भतीजे ईशान आनंद का नाम भी चर्चा में आया है। हाल में बीएसपी की एक अहम बैठक में आकाश की अनुपस्थिति के दौरान ईशान आनंद की मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े किए थे।

कुछ रिपोर्टों में यह संभावना जताई गई है कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए मायावती ईशान आनंद को अधिक राजनीतिक जिम्मेदारी दे सकती हैं। हालांकि बीएसपी की ओर से अभी यह स्पष्ट घोषणा नहीं हुई है कि ईशान को आकाश की जगह कोई औपचारिक बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक अटकल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

2027 के यूपी चुनाव से पहले बड़ा फैसला

आकाश आनंद का निष्कासन ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं। बीएसपी लंबे समय से अपने संगठन को फिर से मजबूत करने और अपना पारंपरिक दलित वोट आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

आकाश आनंद को कभी युवा चेहरा और मायावती के बाद संभावित नेतृत्व के तौर पर पेश किया गया था। ऐसे में उनका पार्टी से बाहर होना बीएसपी की आगामी चुनावी रणनीति के लिए महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। अब पार्टी की कमान पूरी तरह मायावती के हाथों में बनी हुई है और यह देखना होगा कि वह युवा नेतृत्व को किस तरह आगे बढ़ाती हैं।

क्या यह सिर्फ परिवार का विवाद है?

इस घटनाक्रम को केवल पारिवारिक विवाद के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। मायावती के बयानों में पार्टी अनुशासन, नेतृत्व पर नियंत्रण, रिश्तों के प्रभाव और बहुजन आंदोलन के हित जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।

मायावती ने लगातार यह संदेश देने की कोशिश की है कि बीएसपी में व्यक्तिगत रिश्तों से ऊपर पार्टी और आंदोलन के हित होंगे। दूसरी ओर, आकाश आनंद को पहले उत्तराधिकारी घोषित करना और फिर हटाना, दोबारा जिम्मेदारी देना और अब फिर पार्टी से निकाल देना बीएसपी में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर लगातार बदलती रणनीति को दिखाता है।

Tags: Akash AnandAkash Anand ExpelledAshok SiddharthBahujan Samaj PartyBSPBSP CrisisMayawatiMayawati NephewMayawati NewsUP Politics
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