Roznama Khabrein
No Result
View All Result
  • होम
  • समाचार
  • देश-विदेश
  • पड़ताल
  • एजुकेशन
  • विचार
  • हेट क्राइम
  • अन्य
  • रोजनामा खबरें विशेष
  • اردو
اردو
  • होम
  • समाचार
  • देश-विदेश
  • पड़ताल
  • एजुकेशन
  • विचार
  • हेट क्राइम
  • अन्य
  • रोजनामा खबरें विशेष
  • اردو
No Result
View All Result
No Result
View All Result
Home समाचार

आख़िर कौन रोकेगा BJP का विजय रथ…? _एक नज़रिया :दिलीप पांडे

RK News by RK News
July 7, 2023
Reading Time: 1 min read
0

देश ने हाल ही में दो चुनावी नतीजे देखे. एक कर्नाटक का चुनावी परिणाम था, जिसमें कांग्रेस ने आशातीत सफलता हासिल करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को राज्य में सत्ता से बाहर कर दिया. इसी दिन एक और चुनाव परिणाम आया, लेकिन कर्नाटक के शोरशराबे में उसकी चर्चा थोड़ी दब गई. यह ख़बर थी जालंधर लोकसभा उपचुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) की शानदार जीत की. जालंधर पारम्परिक रूप से कांग्रेस का अभेद्य गढ़ रहा है. 1999 से ही इस सीट पर कांग्रेस का कब्ज़ा रहा है. गैर-कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर सिर्फ 1989 और 1998 में इंद्रकुमार गुजराल यहां से जीतने में सफल रहे थे. इस बार के चुनाव में AAP के सुशील कुमार रिंकू ने कांग्रेस के अमरिंदर सिंह राजा को पराजित कर कांग्रेस के इस मज़बूत क़िले को भी ध्वस्त कर दिया. इस जीत के बड़े मायने हैं. इससे आगामी लोकसभा में पंजाब में क्या होने वाला है, इसका संकेत साफ है. पंजाब का यह नतीजा राष्ट्रीय राजनीति, खासकर 2024 के आम चुनाव को भी एक दिशा देता दिखाई दे रहा है.
इसमें कोई शक नहीं कि कांग्रेस ने कर्नाटक का चुनाव जीता है. इस जीत के बाद से ही इस चुनाव परिणाम को 2024 में लोकसभा चुनाव के लिए संकेत बताने की कोशिश हो रही है. साथ ही एक नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की जा रही है कि विपक्षी एकता का केंद्र स्थल कांग्रेस ही है. हालांकि इसमें कोई दम नहीं दिखाई देता. कर्नाटक चुनाव का गणितीय और तार्किक विश्लेषण देखें, तो ज़बरदस्त सत्ता-विरोधी लहर के बावजूद BJP के मतों का प्रतिशत जस का तस बना हुआ है. इसका मतलब तो यह हुआ कि BJP के कोर मतदाताओं को लुभाने में कांग्रेस नाकाम रही है. इसलिए यह जीत स्थायी से ज्यादा तकनीकी है, क्योंकि जनता दल सेक्युलर (JDS) के मुस्लिम वोटरों ने इस बार BJP को हराने के लिए रणनीतिक रूप से कांग्रेस को वोट दिया है. हालांकि ये वोटर हमेशा साथ देंगे, इसकी कोई गारंटी कतई नहीं है, इसलिए यह जीत कांग्रेस या उसकी विचारधारा या उसके कामकाज की जीत नहीं है.
कर्नाटक में BJP के 40 प्रतिशत के कमीशनराज और कुशासन से जनता का हर वर्ग त्रस्त था. हालांकि यह बात भी बहुत पुरानी नहीं है, जब इससे पहले वाला सिद्धारमैया का शासनकाल भी 20 प्रतिशत कमीशन की सरकार के रूप में कुख्यात था. तब अपने कुशासन की वजह से ही कांग्रेस सरकार चुनाव हार गई थी. इस बार चुनाव जीतने के चक्कर में कांग्रेस ने खूब बढ़-चढ़कर वादे किए. इसके लिए कांग्रेस ने किसी और पार्टी के नहीं, आम आदमी पार्टी के ही घोषणापत्र का सहारा लिया. कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में महिलाओं के लिए फ्री बस यात्रा और बेसिक इनकम गारंटी जैसे आम आदमी पार्टी के कई वादे शामिल तो कर लिए, लेकिन इसे पूरा करने की नीयत शुरू से ही दिखाई नहीं दे रही है. महिलाओं को फ्री बस यात्रा पर डी.के. शिवकुमार पहले ही साफ कह चुके हैं कि ऐसा करना मुमकिन नहीं है
इससे साफ है कि चुनावी फायदे के लिए इन्होंने कॉपी-पेस्ट अंदाज़ में आम आदमी पार्टी की कुछ सफल गारंटियों की नकल तो की, लेकिन उन्हें पूरा करने की कोई ठोस कार्ययोजना दिखाई नहीं देती. वादे पूरा करने की गारंटी तो सिर्फ केजरीवाल मॉडल ही दे सकता है, क्योंकि ठोस वित्तीय प्रबंधन की कला और और टैक्स के पैसे का सदुपयोग करने में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली और पंजाब में अपनी क्षमता साबित भी की है.
दूसरी बात, मुख्यमंत्री बनने के सवाल को लेकर कांग्रेस के अंदर ही जिस तरह का नाटक हुआ, उसे पूरे देश ने देखा. अब मुख्यमंत्री फिर से भले ही सिद्धारमैया बन गए हों, लेकिन कुर्सी की खींचतान में फिलहाल पीछे रह गए डी.के. शिवकुमार से उनकी कितने दिन तक बनेगी, यह प्रश्न विचारणीय है. साथ ही इस तरह की अंदरूनी खींचतान के बीच सरकार जनाकांक्षाओं पर कितनी खरी उतरेगी, यह भी देखने वाली बात होगी.
कर्नाटक की इस जीत से मीडिया का एक तबका ऐसा नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहा है कि कांग्रेस ही BJP को टक्कर देने वाली एकमात्र राजनीतिक पार्टी है और विपक्षी ख़ेमे में राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री पद के एकमात्र योग्य उम्मीदवार हैं, जबकि सच्चाई यह है कि कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस को मजबूरी में वोट दिया है. चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी कांग्रेस को गलतफहमी न पालने की सलाह दी है. उनकी इस बात में दम भी है. 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (SP) पूर्ण बहुमत से चुनकर आई, लेकिन दो साल बाद ही लोकसभा चुनाव में BJP ने 80 में 70 से ज़्यादा सीटें जीत लीं. कई और राज्यों में भी ऐसे अनेक उदाहरण हैं. विधानसभा में जीत लोकसभा में भी जीत की गारंटी क़तई नहीं देती. जनता किसी सरकार को बार-बार तभी दोहराती है, जब वास्तव में सरकार के कामकाज में दम हो
ई राजनीतिक दलों को ऐसा लगता है कि अरविंद केजरीवाल की AAP सरकार की सफलता सिर्फ मुफ्त बिजली-पानी देने की वजह से है.

RELATED POSTS

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर अखिलेश यादव के पोस्टर से बवाल, ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ से गरमाई यूपी की सियासत

JNU में प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप, 11 छात्राओं की शिकायत से मचा हड़कंप

दिल्ली में छात्रों की PG बनी मौत का मलबा! 5 मंजिला इमारत ढही

ऐसे दल या विश्लेषक आम आदमी पार्टी के शानदार प्रशासन और सुविचारित वित्तीय प्रबंधन को अक्सर नजरअंदाज़ कर देते हैं. अधिकतर लोगों को यह साधारण गणित समझ नहीं आता कि चुनावी वादे पूरे करने के लिए ईमानदार सरकार और कुशल प्रशासनिक प्रबंधन की ज़रूरत होती है. यही वजह है कि आम आदमी पार्टी न सिर्फ दिल्ली में लगातार तीसरी बार जीती, बल्कि पंजाब में भी परचम लहराया. इसके अलावा गोवा, गुजरात और कर्नाटक में भी चुनाव भले ही न जीती हो, लेकिन लोगों को आम आदमी पार्टी और उसके नेता अरविंद केजरीवाल के बारे में विचार करने को विवश किया है. आज करोड़ों लोग AAP को विकल्प के रूप में देख रहे हैं. आम आदमी पार्टी एक नई पार्टी होने के बाद भी गुजरात जैसे राज्य में BJP जैसी स्थापित पार्टी को ख़ौफ़ज़दा कर देती है.
अगर आम आदमी पार्टी सबसे तेज गति से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने वाला राजनीतिक दल बनी है, तो इसके पीछे सुशासन और गरीबोन्मुख नीतियों के अलावा शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक समरसता के प्रति उसका समर्पण भाव भी है. आज जो लोग कांग्रेस में BJP का विकल्प देख रहे हैं, उन्हें 2014 के पहले की कांग्रेस के कारनामे शायद याद नहीं हैं. भ्रष्टाचार के मामले पर तो BJP और कांग्रेस दोनों का ही ट्रैक रिकॉर्ड एक जैसा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने पर कहा था – न खाऊंगा और न खाने दूंगा. दूसरी ओर, हक़ीक़त यह है कि वर्तमान में कुल चुनावी चंदे का 90 प्रतिशत BJP को मिलता है.
क्या जनता इतनी भोली है कि इन बातों को नहीं समझती है. वास्तव में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही दल शिक्षा, स्वास्थ्य, भूख और रोज़गार जैसी मौलिक समस्याओं को हल करने के प्रति गंभीर नहीं है. इन दोनों ही पार्टियों ने क्रोनी कैपिटलिज़्म को बढ़ावा दिया है. इससे एक ऐसा भ्रष्ट गठजोड़ बना है, जिसका फायदा उठाकर सिर्फ चंद उद्योगपति ही आगे बढ़ते हैं. कांग्रेस और BJP की इन्हीं विफलताओं की वजह से आम आदमी पार्टी का त्वरित और राष्ट्रीय विस्तार हुआ है. आम आदमी पार्टी समाज के सभी तबकों के लिए समान अवसर मुहैया कराने की नीति पर काम करती है. साथ ही समाज के हर तबके को प्रतिनिधित्व देने के चलते जनता उससे सीधे जुड़ाव भी महसूस करती है.
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी दिल्ली के बाद पंजाब में न सिर्फ सरकार बनाने में सफल रही, बल्कि सुशासन का विशिष्ट मॉडल भी पेश किया. जालंधर की जीत ने भगवंत मान सरकार के एक साल के कामकाज के साथ-साथ केजरीवाल मॉडल पर भी अपने विश्वास की मुहर लगा दी है. AAP ने सिद्ध किया है कि जाति या धर्म जैसे विभाजनकारी मुददों के बगैर भी राजनीति की जा सकती है. भारत को नंबर वन बनाने के लिए ऐसी ही राजनीति की आवश्यकता भी है.

(लेखक आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता है , लेख में ज़ाहिर किए गए विचार उनके निजी हैं)

ShareTweetSend
RK News

RK News

Related Posts

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर अखिलेश यादव के पोस्टर से बवाल, ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ से गरमाई यूपी की सियासत
समाचार

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर अखिलेश यादव के पोस्टर से बवाल, ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ से गरमाई यूपी की सियासत

September 7, 2026
JNU में प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप, 11 छात्राओं की शिकायत से मचा हड़कंप
समाचार

JNU में प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप, 11 छात्राओं की शिकायत से मचा हड़कंप

September 7, 2026
दिल्ली में छात्रों की PG बनी मौत का मलबा! 5 मंजिला इमारत ढही
समाचार

दिल्ली में छात्रों की PG बनी मौत का मलबा! 5 मंजिला इमारत ढही

September 7, 2026
ज़ोहरान ममदानी के RSS कार्यक्रम के विरोध पर विवाद,RSS ने दिया जवाब
समाचार

लंदन में भागवत ने दी ‘हिंदू राष्ट्र’ की नई परिभाषा ! बोले- विविधता ही आधार

September 7, 2026
₹22,006 करोड़ के दावे पर सिर्फ ₹6.5 करोड़! सुभाष चंद्रा केस के फैसले को HDFC बैंक देगा चुनौती
समाचार

सुभाष चंद्रा पर CBI का शिकंजा, ₹1,322 करोड़ के LIC Housing Finance मामले में FIR

September 6, 2026
ट्रंप के टैरिफ का जवाब देने के लिए PM मोदी की नई रणनीति?
समाचार

राहुल का डर या हमला? ‘दिमागी नक्सल’ से ‘झूठ की गूंज’ तक, राहुल गांधी और कांग्रेस पर मोदी का हमला

September 6, 2026
Next Post

Neha Singh Rathore: सीधी पेशाब कांड में नेहा सिंह राठौर पर FIR; संघ की ड्रेस पहने व्यक्ति का मीम किया था पोस्ट

उत्तराखंड सरकार को 15 जुलाई तक यू सी सी का मसौदा क़ानून सौंपे जाने की उम्मीद

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended Stories

रात के अंधेरे में पुलिस का काम लोगो को सुरक्षा देना है, ना की प्रधानमंत्री का बैनर लगाना- गोपाल राय

July 24, 2022

कब्रिस्तान पर बना है की स्टाल, मुर्दों के साथ खाते पीते हैं लोग

June 13, 2023

शराब घोटाला: ‘मोदी जी अगर केजरीवाल भ्रष्टाचारी है तो फिर दुनिया में कोई ईमानदार नहीं’-अरविंद केजरीवाल

April 15, 2023

Popular Stories

  • दिल्ली में 1396 कॉलोनियां हैं अवैध, देखें इनमें आपका इलाका भी तो नहीं शामिल ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • मेवात के नूह में तनाव, 3 दिन इंटरनेट सेवा बंद, 600 परFIR

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • कौन हैं जामिया मिलिया इस्लामिया के नए चांसलर डॉक्टर सैय्यदना सैफुद्दीन?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • हमारे  पास ठोस सबूत नहीं, कनाडा  ने माना|भारत ने कहा- हमारे आरोपों की पुष्टि

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • NCERT Recruitment 2023 में नौकरी पाने का जबरदस्त मौका, कल से शुरू होगा आवेदन, जानें तमाम डिटेल

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में महिला यूट्यूबर ज्योति गिरफ्तार, पूछताछ में किए बड़े खुलासे

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Roznama Khabrein

The Roznama Khabrein advocates rule of law, human rights, minority rights, national interests, press freedom, and transparency on which the newspaper and newsportal has never compromised and will never compromise whatever the costs.

More... »

Recent Posts

  • मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर अखिलेश यादव के पोस्टर से बवाल, ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ से गरमाई यूपी की सियासत
  • JNU में प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप, 11 छात्राओं की शिकायत से मचा हड़कंप
  • दिल्ली में छात्रों की PG बनी मौत का मलबा! 5 मंजिला इमारत ढही

Categories

  • Uncategorized
  • अन्य
  • एजुकेशन
  • देश-विदेश
  • पड़ताल
  • रोजनामा खबरें विशेष
  • विचार
  • समाचार
  • हेट क्राइम

Quick Links

  • About Us
  • Support Us
  • Terms & Conditions
  • Privacy Policy
  • Grievance
  • Contact Us

© 2021 Roznama Khabrein Hindi

No Result
View All Result
  • होम
  • समाचार
  • देश-विदेश
  • पड़ताल
  • एजुकेशन
  • विचार
  • हेट क्राइम
  • अन्य
  • रोजनामा खबरें विशेष
  • اردو

© 2021 Roznama Khabrein Hindi