Roznama Khabrein
No Result
View All Result
  • होम
  • समाचार
  • देश-विदेश
  • पड़ताल
  • एजुकेशन
  • विचार
  • हेट क्राइम
  • अन्य
  • रोजनामा खबरें विशेष
  • اردو
اردو
  • होम
  • समाचार
  • देश-विदेश
  • पड़ताल
  • एजुकेशन
  • विचार
  • हेट क्राइम
  • अन्य
  • रोजनामा खबरें विशेष
  • اردو
No Result
View All Result
No Result
View All Result
Home समाचार

ट्रम्प ने कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए वीज़ा शुल्क बढ़ाकर 100,000 डॉलर (88लाख रुपये) की भारत के लोगो पर पड़ेगा बड़ा असर

RK News by RK News
September 20, 2025
Reading Time: 1 min read
0

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस आदेश पर दस्तख़्त कर दिया है, जिसमें एच-1बी वीज़ा की आवेदन फ़ीस बढ़ाकर सालाना एक लाख डॉलर यानी लगभग 88 लाख रुपये कर दी गई है.
इसके साथ ही ट्रंप ने गोल्ड कार्ड वीज़ा प्रोग्राम के आदेश पर भी दस्तख़्त कर दिए. किसी व्यक्ति के लिए इसकी क़ीमत दस लाख डॉलर यानी लगभग नौ करोड़ रुपये और कंपनियों के लिए 20 लाख डॉलर यानी 18 करोड़ रुपये रखी गई है.
अमेरिकी एच-1बी वीज़ा की शुरुआत 1990 में हुई थी. ये कुशल कर्मचारियों को दिया जाता है. सबसे ज़्यादा एच-1बी वीज़ा भारतीयों को मिलते हैं. इसके बाद चीन के लोगों को ये वीज़ा दिया जाता है.
ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीज़ा पर ये क़दम अपनी नई आप्रवासन नीति के तहत उठाया है. अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि ग़ैर अमेरिकी लोग अमेरिकी लोगों की नौकरियां खा रहे हैं.अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप ने बार-बार यह कहा था कि वह विदेशियों को अमेरिकी नौकरियां नहीं खाने देंगेट्रंप ने इस आदेश पर दस्तख़्त करते हुए अमेरिकी टेक कंपनियों की संभावित प्रतिक्रिया के बारे में कहा, ”मुझे लगता है कि वो इससे बेहद ख़ुश होंगे.”
व्हाइट हाउस के स्टाफ़ सेक्रेट्री विल शार्फ़ ने कहा, ”एच-1बी वीज़ा सिस्टम का सबसे ज़्यादा दुरुपयोग हो रहा था. ये वीज़ा ऐसे बेहद कुशल कर्मचारियों के लिए है जो उन क्षेत्रों में काम करते हैं, जिनमें अमेरिका के लोग काम नहीं करते हैं. ऐसे लोग ये काम करने अमेरिका आते हैं.”
उन्होंने कहा, ”अब कंपनियों को एच-1बी स्पॉन्सर करने के लिए एक लाख डॉलर देने होंगे. इसका मतलब ये है कि अब कंपनियां ऐसे बेहद कुशल कर्मचारियों को ही भेजेंगी जिनका यहां कोई विकल्प नहीं है.”दरअसल एच-1बी के तहत ऐसे कर्मचारी अमेरिका पहुंचने लगे थे जो सालाना 60 हज़ार डॉलर (न्यूनतम) पर काम करने लिए तैयार हैं जबकि अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों में काम करने वाले स्थानीय कर्मचारियों का औसत सालाना वेतन एक लाख डॉलर है.
इस फ़ैसले के बाद वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने कहा, “अब आप ट्रेनीज़ को एच-1बी वीज़ा पर नहीं रख पाएंगे. यह अब आर्थिक रूप से संभव नहीं है. अगर आपको लोगों को प्रशिक्षित करना है, तो आप अमेरिकी नागरिकों को प्रशिक्षित करेंगे. लेकिन अगर आपके पास कोई बहुत ही कुशल इंजीनियर है और आप उन्हें लाना चाहते हैं तो आपको एच-1बी वीज़ा के लिए सालाना एक लाख डॉलर का भुगतान करना होगा.”
पिछले साल ट्रंप ने एच-1बी वीज़ा का समर्थन किया था लेकिन उनके समर्थक उनसे नाराज़ हो गए थे.हालांकि इस वीज़ा के समर्थकों का कहना है कि इसी वजह से अमेरिकी इंडस्ट्री को दुनिया भर की बेहतरीन प्रतिभाओं का लाभ मिलता है.
दरअसल एच-1बी के तहत ऐसे कर्मचारी अमेरिका पहुंचने लगे थे जो सालाना 60 हज़ार डॉलर (न्यूनतम) पर काम करने लिए तैयार हैं जबकि अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों में काम करने वाले स्थानीय कर्मचारियों का औसत सालाना वेतन एक लाख डॉलर है.
इस फ़ैसले के बाद वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने कहा, “अब आप ट्रेनीज़ को एच-1बी वीज़ा पर नहीं रख पाएंगे. यह अब आर्थिक रूप से संभव नहीं है. अगर आपको लोगों को प्रशिक्षित करना है, तो आप अमेरिकी नागरिकों को प्रशिक्षित करेंगे. लेकिन अगर आपके पास कोई बहुत ही कुशल इंजीनियर है?उन्हें लाना चाहते हैं तो आपको एच-1बी वीज़ा के लिए सालाना एक लाख डॉलर का भुगतान करना होगा.”
**क्या है एच-1बी वीज़ा और किन लोगों को मिलता है?
कुशल कर्मचारियों के लिए1990 में शुरू हुए एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम के तहत मिलने वाले वीज़ा की संख्या 2004 में 84 हज़ार कर दी गई थी.
ये वीज़ा लॉटरी के ज़रिये जारी किया जाता है.अब तक एच-1बी वीज़ा की कुल प्रशासनिक फ़ीस डेढ़ हज़ार डॉलर थी.यूएस सिटिज़नशिप एंड इमिग्रेशनन सर्विसेज़ के आंकड़ों के मुताबिक़ अगले वित्त वर्ष के लिए एच-1बी वीज़ा की संख्या घट कर 3,59,000 रह गई है. ये चार साल का सबसे कम आंकड़ा है.
दरअसल ट्रंप की कठोर आप्रवासन नीति की वजह से वीज़ा आवेदनों की संख्या में ये कमी आई है.अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़ पिछले वित्त वर्ष में इसका सबसे ज़्यादा फ़ायदा टेक कंपनियों अमेज़न, टाटा, मेटा, एप्पल और गूगल को हुआ था.
साल 2025 की पहली छमाही में, अमेज़न डॉट कॉम और उसकी क्लाउड-कंप्यूटिंग इकाई एडब्ल्यूएस को 12,000 से अधिक एच-1बी वीज़ा की मंज़ूरी मिली थी, जबकि माइक्रोसॉफ़्ट और मेटा प्लेटफ़ॉर्म्स को 5,000 से अधिक एच-1बी वीज़ा मंज़ूरी मिली थी.
दरअसल ये वीज़ा साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथेमेटिक्स क्षेत्र यानी स्टेम के उन प्रतिभाशाली कर्मचारियों के लिए है जिनका अमेरिका में विकल्प नहीं मिल रहा है.लेकिन इसके आलोचकों का कहना है कि इसके तहत कम वेतन वाले कर्मचारी यहां आने लगे. इससे अमेरिकी कंपनियां यहां बाहरी कर्मचारियों को तरजीह देने लगीं और स्थानीय लोगों की नौकरियां घटने लगीं.एच-1बी वीज़ा पाने वाले लोगों में सबसे ज़्यादा लोग भारतीय हैं. हाल के आंकड़ों के मुताबिक़ 72 फ़ीसदी वीज़ा भारतीय नागरिकों को दिए गए. इसके बाद 12 फ़ीसदी वीज़ा चीनी नागरिकों को दिए गए.फिलीपींस, कनाडा और दक्षिण कोरिया के नागरिकों को एक-एक फ़ीसदी वीज़ा मिले.आभार: बीबीसी

RELATED POSTS

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीसरे दिन भी विपक्ष का प्रदर्शन, देशभर में SIR पर घमासान; क्या है पूरा विवाद?

42 पूर्व जजों ने चुनाव आयोग का किया बचाव, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध के बीच खुला पत्र जारी

महाराष्ट्र, बंगाल और तमिलनाडु में दोबारा चुनाव कराने की मांग; उद्धव, ममता और केजरीवाल क्या बोले?

Tags: $100000feesIndiaproblemskilled foreign workersTrump H1-b visaworkers
ShareTweetSend
RK News

RK News

Related Posts

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीसरे दिन भी विपक्ष का प्रदर्शन, देशभर में SIR पर घमासान; क्या है पूरा विवाद?
समाचार

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीसरे दिन भी विपक्ष का प्रदर्शन, देशभर में SIR पर घमासान; क्या है पूरा विवाद?

October 8, 2026
42 पूर्व जजों ने चुनाव आयोग का किया बचाव, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध के बीच खुला पत्र जारी
समाचार

42 पूर्व जजों ने चुनाव आयोग का किया बचाव, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध के बीच खुला पत्र जारी

October 8, 2026
समाचार

महाराष्ट्र, बंगाल और तमिलनाडु में दोबारा चुनाव कराने की मांग; उद्धव, ममता और केजरीवाल क्या बोले?

September 24, 2026
14 बार उठी अंदर से आवाज… 10 महीने में दो Election Commissioners ने दर्ज कराई आपत्ति, चुनाव आयोग के भीतर क्या चल रहा था?
समाचार

14 बार उठी अंदर से आवाज… 10 महीने में दो Election Commissioners ने दर्ज कराई आपत्ति, चुनाव आयोग के भीतर क्या चल रहा था?

September 24, 2026
रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, अमेरिका में प्रतिबंध वाला बिल आगे बढ़ा
समाचार

रूसी तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ का खतरा, अमेरिका में प्रतिबंध वाला बिल आगे बढ़ा

September 16, 2026
हूतियों का सऊदी अरब पर मिसाइल-ड्रोन हमला, मक्का की ओर ड्रोन भेजने से इनकार; बढ़ा तनाव
समाचार

हूतियों का सऊदी अरब पर मिसाइल-ड्रोन हमला, मक्का की ओर ड्रोन भेजने से इनकार; बढ़ा तनाव

September 16, 2026
Next Post

भारत को UAPA के खिलाफ एक जन आंदोलन की जरूरत है

“आरएसएस कोई धार्मिक संगठन नहीं है,” बेंगलुरु कोर्ट ने कहा,सिद्धारमई के खिलाफ मानहानि की शिकायत खारिज

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended Stories

फिलिस्तीन से एकजुटता दिखाने के लिए चेन्नई रैली में हजारों शामिल,कहा ‘गाजा के बारे में बोलते रहेंगे’

September 20, 2025
अमरोहा में बाइक सवार दो कांवडि़यों की मौत के बाद हिंसा

अमरोहा में बाइक सवार दो कांवडि़यों की मौत के बाद हिंसा

July 18, 2022

स्टॉक मार्केट में कत्लेआम, बाजार खुलते ही निवेशकों के 19 लाख करोड़ डूबे,एशिया के शेयर बाज़ारका भी बुरा हाल

April 7, 2025

Popular Stories

  • दिल्ली में 1396 कॉलोनियां हैं अवैध, देखें इनमें आपका इलाका भी तो नहीं शामिल ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • मेवात के नूह में तनाव, 3 दिन इंटरनेट सेवा बंद, 600 परFIR

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • हमारे  पास ठोस सबूत नहीं, कनाडा  ने माना|भारत ने कहा- हमारे आरोपों की पुष्टि

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • कौन हैं जामिया मिलिया इस्लामिया के नए चांसलर डॉक्टर सैय्यदना सैफुद्दीन?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • NCERT Recruitment 2023 में नौकरी पाने का जबरदस्त मौका, कल से शुरू होगा आवेदन, जानें तमाम डिटेल

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में महिला यूट्यूबर ज्योति गिरफ्तार, पूछताछ में किए बड़े खुलासे

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Roznama Khabrein

The Roznama Khabrein advocates rule of law, human rights, minority rights, national interests, press freedom, and transparency on which the newspaper and newsportal has never compromised and will never compromise whatever the costs.

More... »

Recent Posts

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीसरे दिन भी विपक्ष का प्रदर्शन, देशभर में SIR पर घमासान; क्या है पूरा विवाद?
  • 42 पूर्व जजों ने चुनाव आयोग का किया बचाव, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध के बीच खुला पत्र जारी
  • महाराष्ट्र, बंगाल और तमिलनाडु में दोबारा चुनाव कराने की मांग; उद्धव, ममता और केजरीवाल क्या बोले?

Categories

  • Uncategorized
  • अन्य
  • एजुकेशन
  • देश-विदेश
  • पड़ताल
  • रोजनामा खबरें विशेष
  • विचार
  • समाचार
  • हेट क्राइम

Quick Links

  • About Us
  • Support Us
  • Terms & Conditions
  • Privacy Policy
  • Grievance
  • Contact Us

© 2021 Roznama Khabrein Hindi

No Result
View All Result
  • होम
  • समाचार
  • देश-विदेश
  • पड़ताल
  • एजुकेशन
  • विचार
  • हेट क्राइम
  • अन्य
  • रोजनामा खबरें विशेष
  • اردو

© 2021 Roznama Khabrein Hindi