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सोनिया गांधी की किताब पर क्यों मचा विवाद? RSS, चीन और PM मोदी के जिक्र वाले 3 हिस्सों पर क्यों अटका मामला?

RK News by RK News
August 29, 2026
Reading Time: 1 min read
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सोनिया गांधी की किताब पर क्यों मचा विवाद? RSS, चीन और PM मोदी के जिक्र वाले 3 हिस्सों पर क्यों अटका मामला?

नई दिल्ली: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की आगामी संस्मरण पुस्तक ‘Belonging: A Journey of Love’ के भारत में प्रकाशन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अमेरिकी प्रकाशक Alfred A. Knopf ने किताब के 10 नवंबर 2026 को जारी होने की घोषणा की है, लेकिन भारत में इसे कौन प्रकाशित करेगा, इसे लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। इसी बीच कांग्रेस सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, पांडुलिपि पर चर्चा के दौरान तीन प्रमुख विषयों से जुड़े हिस्से प्रकाशक और सोनिया गांधी के बीच मतभेद का केंद्र बने थे। इनमें भारत-चीन सीमा पर चीनी घुसपैठ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व और केंद्र सरकार की नीतियां तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका शामिल बताई जा रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और Penguin Random House India ने कहा है कि वह किताब का भारत में प्रकाशक नहीं है तथा तथ्य-जांच और संपादकीय सुझाव प्रकाशन प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं।

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RSS, चीन और PM मोदी से जुड़े हिस्से क्यों बने विवाद की वजह?

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, सोनिया गांधी की किताब में भारत-चीन सीमा विवाद और सीमा पर चीनी घुसपैठ से जुड़े घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा की गई है। यह मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस की राजनीति का भी प्रमुख हिस्सा रहा है और राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेता संसद तथा सार्वजनिक मंचों पर चीन के साथ सीमा संबंधी मामलों को उठाते रहे हैं। बताया गया है कि किताब में मौजूदा सीमा स्थिति और इस पूरे विषय को लेकर सोनिया गांधी के नजरिए को भी जगह दी गई है। यही वजह है कि पांडुलिपि के तथ्यात्मक हिस्सों को लेकर प्रकाशन प्रक्रिया के दौरान चर्चा हुई।

दूसरा संवेदनशील मुद्दा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र सरकार की नीतियों से जुड़ा बताया जा रहा है। कांग्रेस सूत्रों का दावा है कि सोनिया गांधी ने अपने राजनीतिक अनुभव और अपने नजरिए के आधार पर मोदी के नेतृत्व, उनकी कार्यशैली और केंद्र सरकार की कई प्रमुख नीतियों पर टिप्पणी की है। चूंकि ये टिप्पणियां सीधे मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व से जुड़ी हैं, इसलिए पांडुलिपि की तथ्य-जांच और संपादकीय समीक्षा को लेकर विवाद पैदा हुआ। हालांकि, किताब के ये अंश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए उनमें दर्ज विशिष्ट दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल संभव नहीं है।

तीसरा मुद्दा RSS की भूमिका से जुड़ा है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, संस्मरण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भारत के सामाजिक और राजनीतिक जीवन पर प्रभाव को लेकर सोनिया गांधी के विचार शामिल हैं। RSS भारतीय जनता पार्टी से वैचारिक रूप से जुड़ा संगठन है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सक्रिय राजनीति में आने से पहले RSS से जुड़े रहे हैं। ऐसे में RSS पर सोनिया गांधी के दृष्टिकोण को भी किताब के उन हिस्सों में माना जा रहा है, जिन पर पांडुलिपि के स्तर पर चर्चा हुई।

क्या सोनिया गांधी ने बदलाव करने से इनकार किया?

कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, प्रकाशन प्रक्रिया के दौरान कुछ हिस्सों में संपादन या बदलाव का सुझाव दिया गया था। इन सूत्रों का दावा है कि सोनिया गांधी ने उन हिस्सों को हटाने या बदलने पर सहमति नहीं दी। उनका कथित रुख यह था कि किताब उनके व्यक्तिगत अनुभवों, राजनीतिक जीवन और उनके स्वयं के दृष्टिकोण पर आधारित है और इसलिए ऐसे हिस्सों में बदलाव करना उचित नहीं होगा।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर Penguin Random House India का आधिकारिक पक्ष अलग है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि Penguin Random House India भारत में ‘Belonging: A Journey of Love’ की प्रकाशक नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा कि वह संबंधित चर्चाओं के दौरान किताब को प्रकाशित करने के लिए इच्छुक थी, लेकिन प्रकाशक के तौर पर तथ्य-जांच करना और लेखक को किताब के हित में सुझाव देना उसकी जिम्मेदारी और अधिकार का हिस्सा है। कंपनी ने गोपनीय बातचीत के बारे में आगे टिप्पणी करने से इनकार किया है।

भारत में किताब कौन प्रकाशित करेगा?

Penguin Random House India के इस स्पष्टीकरण के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत में सोनिया गांधी की इस बहुप्रतीक्षित किताब के प्रकाशन और वितरण की जिम्मेदारी किस प्रकाशक को मिलेगी। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ अन्य भारतीय प्रकाशक किताब के भारतीय अधिकार हासिल करने की दौड़ में हैं।

https://x.com/PenguinIndia/status/2093249144253190583?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2093249144253190583%7Ctwgr%5Eaee50464888787e14d770f8c54de4d94ca3dee05%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.ndtv.com%2Findia-news%2Fchina-rss-and-pm-modis-policies-3-issues-in-sonia-gandhis-book-why-penguin-backed-out-11972107

इनमें HarperCollins का नाम भी सामने आया है और उसके सौदा अंतिम रूप देने के करीब होने की रिपोर्ट है। हालांकि, जब तक आधिकारिक घोषणा नहीं होती, इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता।

कांग्रेस ने लगाया दबाव का आरोप, BJP ने किया पलटवार

किताब के भारतीय प्रकाशन को लेकर विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी में भी बदल गया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि किताब को भारत में प्रकाशित करने से पीछे हटने के पीछे दबाव की भूमिका हो सकती है। कांग्रेस के लोकसभा उपनेता गौरव गोगोई ने Penguin India के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में RSS और प्रधानमंत्री से संबंधित कई किताबें प्रकाशित होती रही हैं और इस मामले में भी किताब को लेकर डर का माहौल बनाया जा रहा है।

वहीं बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। बीजेपी नेता अजय आलोक ने कहा कि मामला किसी के दबाव में झुकने का नहीं बल्कि किताब में दिए गए तथ्यों की विश्वसनीयता और उनकी पुष्टि का है। उनका तर्क है कि किसी भी प्रकाशक के लिए तथ्य-जांच और किताब की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना सामान्य प्रक्रिया है। इस तरह किताब के प्रकाशन का विवाद अब कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नया मुद्दा बन गया है।

‘Belonging: A Journey of Love’ में क्या है?

सोनिया गांधी की यह किताब केवल उनके राजनीतिक जीवन पर केंद्रित नहीं है, बल्कि उनके निजी जीवन, परिवार और भारत में उनके छह दशकों के अनुभवों को भी समेटने वाली है। अमेरिकी प्रकाशक Alfred A. Knopf की घोषणा के अनुसार, संस्मरण में उनके जीवन के उन महत्वपूर्ण दौरों को शामिल किया गया है, जिनमें 1984 में उनकी सास और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या, 1991 में उनके पति और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या, इसके बाद उनका राजनीति में प्रवेश, कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उनका लंबा कार्यकाल और 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार न करने का फैसला शामिल है। किताब में इटली में उनके बचपन से लेकर भारत में राजीव गांधी की पत्नी और इंदिरा गांधी की बहू के रूप में बिताए वर्षों तक की निजी यात्रा भी दर्ज है।

सोनिया गांधी ने किताब की घोषणा के समय कहा था कि उनके परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन उनके मुताबिक बहुत कम कथाएं उनके परिवार के सदस्यों की प्रेरणाओं, फैसलों और मानवीय कमजोरियों तक पहुंच सकी हैं। उन्होंने अपनी किताब को परिवार की मानवीय कहानी के प्रति एक तरह की श्रद्धांजलि बताया और कहा कि इसमें भारत में छह दशकों के दौरान देखे गए सामाजिक और राजनीतिक बदलावों का उनका व्यक्तिगत नजरिया भी सामने आएगा।

10 नवंबर को होगी किताब की रिलीज

अमेरिकी प्रकाशक Alfred A. Knopf ने ‘Belonging: A Journey of Love’ के प्रकाशन की तारीख 10 नवंबर 2026 तय की है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किताब के प्रकाशन को लेकर स्थिति स्पष्ट है, लेकिन भारत में इसके प्रकाशक को लेकर विवाद बना हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारतीय बाजार में किताब किस प्रकाशक के जरिए पहुंचती है और क्या प्रकाशित संस्करण में उन राजनीतिक और संवेदनशील विषयों से जुड़े हिस्से उसी रूप में शामिल किए जाते हैं, जिनको लेकर अभी विवाद चल रहा है।

फिलहाल, सोनिया गांधी की किताब के भारत में प्रकाशन को लेकर तीन बड़े मुद्दे—चीन सीमा विवाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियां तथा RSS की भूमिका—राजनीतिक और प्रकाशन जगत में चर्चा के केंद्र में हैं। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन तीन विषयों को विवाद का कारण बताए जाने की जानकारी मुख्यतः कांग्रेस सूत्रों के हवाले से सामने आई है, जबकि Penguin Random House India ने किताब को भारत में प्रकाशित करने से जुड़े घटनाक्रम पर किसी विशिष्ट अंश या कथित संपादन विवाद की पुष्टि नहीं की है।

Tags: Belonging A Journey of LoveBJPChina BordercongressPenguin Random House IndiaPM ModiRSSSonia Gandhi BookSonia Gandhi Memoir
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