हल्द्वानी: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी रैली के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद अब राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR तक पहुंच गया है। कांग्रेस नेता ने शनिवार को इस घटना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से FIR दर्ज कराने की मांग की थी और आरोप लगाया था कि यह कार्रवाई दलितों के साथ छुआछूत की मानसिकता को दर्शाती है। इसके ठीक अगले दिन रविवार को हल्द्वानी पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। FIR एक शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने घटना की पूरी जानकारी सत्यापित किए बिना इसे छुआछूत और दलितों के खिलाफ अपराध के रूप में पेश किया
राहुल गांधी के खिलाफ किस शिकायत पर FIR हुई?
हल्द्वानी के जवाहर नगर निवासी 26 वर्षीय अमित कुमार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने खुद को वाल्मीकि समुदाय का सदस्य बताया है। उसके मुताबिक, 11 अगस्त को रामलीला मैदान में सफाई अभियान और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया था और इसमें अनुसूचित जाति समुदाय के कुछ लोग भी शामिल थे। शिकायत में कहा गया कि इस आयोजन का संबंध किसी व्यक्ति या उसकी जाति से नहीं था।
अमित कुमार ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद राहुल गांधी ने 29 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पूरे घटनाक्रम को बिना तथ्यों की पुष्टि किए ‘छुआछूत’ और अनुसूचित जाति के खिलाफ अपराध बताया। शिकायतकर्ता का कहना है कि राहुल गांधी के बयान के बाद समुदायों के बीच तनाव और गलतफहमियां बढ़ीं और उन्हें तथा अन्य लोगों को ऐसी गतिविधि से जोड़कर पेश किया गया, जिसका उद्देश्य किसी जाति के खिलाफ भेदभाव करना नहीं था।
किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?
हल्द्वानी पुलिस ने राहुल गांधी के खिलाफ BNS की धारा 196, धारा 299 और SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(q) के तहत FIR दर्ज की है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, BNS की धारा 196 अलग-अलग समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने या सामाजिक सद्भाव के लिए प्रतिकूल गतिविधियों से संबंधित है, जबकि धारा 299 धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने वाले कृत्यों से जुड़ी है। SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(q) अनुसूचित जाति या जनजाति के किसी सदस्य को नुकसान पहुंचाने या परेशान करने के उद्देश्य से सार्वजनिक अधिकारी को झूठी या तुच्छ सूचना देने से संबंधित है।
हल्द्वानी के सिटी एसपी मनोज कुमार कत्याल ने FIR दर्ज होने की पुष्टि की है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
क्या था मल्लिकार्जुन खड़गे का ‘शुद्धिकरण’ विवाद?
विवाद की शुरुआत 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई रैली के बाद हुई। कांग्रेस का आरोप है कि खड़गे के कार्यक्रम के बाद उसी स्थान पर ‘शुद्धिकरण हवन’ किया गया। खड़गे अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं, इसलिए कांग्रेस नेताओं ने इस आयोजन को जातिगत भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता से जोड़कर देखा। कांग्रेस ने इस मामले में कार्रवाई की मांग की और इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताया।
खड़गे ने संसद में भी इस मुद्दे को उठाया था। उनका कहना था कि उन्होंने अपने भाषण में किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया था, लेकिन उनके कार्यक्रम के बाद वहां हवन किया गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई खड़गे की जाति को लेकर की गई थी।
राहुल गांधी ने PM मोदी से क्या मांग की थी?
29 अगस्त को राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की थी। उन्होंने कथित ‘शुद्धिकरण’ को छुआछूत से जोड़ते हुए कहा था कि ऐसी प्रथा संविधान के खिलाफ है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह घटना BJP-RSS की मानसिकता को दर्शाती है और दलितों को सम्मान के साथ आगे बढ़ने से रोकने वाली सोच का उदाहरण है। उन्होंने SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की थी।
राहुल गांधी ने उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ का बचाव करने वाली टिप्पणी पर भी सवाल उठाया था। उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा था कि यदि केंद्र सरकार सभी जातियों के सम्मान की बात करती है तो इस मामले में कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है।
बीजेपी और उत्तराखंड सरकार ने आरोपों को किया खारिज
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी या सरकार का इस धार्मिक अनुष्ठान से कोई संबंध नहीं था। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हवन करने वाले लोग बीजेपी कार्यकर्ता नहीं थे। उन्होंने कांग्रेस पर राजनीतिक मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया।
केंद्रीय राज्य मंत्री और उत्तराखंड के बीजेपी नेता अजय टम्टा ने भी राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान बीजेपी का नहीं है और वहां धार्मिक कार्यक्रम होते रहते हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस की रैली के बाद मैदान में कूड़ा-कचरा रह गया था, जिसके बाद एक धार्मिक संगठन ने सफाई और धार्मिक अनुष्ठान कराया। उन्होंने कहा कि ऐसे मैदानों में राजनीतिक कार्यक्रमों के बाद सफाई की प्रक्रिया पहले भी होती रही है।
आयोजकों ने ‘शुद्धिकरण’ की अलग वजह बताई
इस विवाद में धार्मिक अनुष्ठान के आयोजक गिरिश चंद्र पांडे ने भी कांग्रेस के आरोपों से इनकार किया है। उनका दावा है कि रैली के बाद मंच और आसपास के क्षेत्र में शराब की बोतलें, पान के दाग, पेशाब और अन्य कचरा मिला था। उनके मुताबिक, स्थल की सफाई के बाद उसे धार्मिक अनुष्ठान के लिए तैयार करने के उद्देश्य से हवन किया गया था, न कि किसी व्यक्ति की जाति के कारण।
यानी पूरे विवाद में दो अलग-अलग दावे सामने हैं। कांग्रेस इसे खड़गे की दलित पहचान से जोड़कर छुआछूत का मामला बता रही है, जबकि बीजेपी और आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि धार्मिक अनुष्ठान का उद्देश्य स्थल की सफाई और पवित्रता बहाल करना था और इसका खड़गे की जाति से कोई संबंध नहीं था।
अब FIR के बाद बढ़ेगा राजनीतिक टकराव
राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद यह विवाद अब केवल खड़गे के कार्यक्रम के बाद हुए धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस जहां इसे दलित सम्मान और सामाजिक समानता का मुद्दा बना रही है, वहीं बीजेपी राहुल गांधी के आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए उन पर ही सामाजिक तनाव बढ़ाने का आरोप लगा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि राहुल गांधी ने जिस दिन प्रधानमंत्री से इस मामले में FIR दर्ज कराने की मांग की, उसके अगले ही दिन उनके खिलाफ पुलिस केस दर्ज हो गया। इससे कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस की ओर से इस FIR को राजनीतिक कार्रवाई बताए जाने की संभावना है, जबकि पुलिस की कार्रवाई फिलहाल शिकायत और दर्ज धाराओं के आधार पर जांच के दायरे में है। मामले में आगे की दिशा जांच और दोनों पक्षों की कानूनी दलीलों पर निर्भर करेगी।









