नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रिश्ते को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। दीपके ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि सत्ता में लंबे समय तक रहने के बाद पार्टी को लगने लगा है कि वह अपने वैचारिक मार्गदर्शक RSS से भी बड़ी हो गई है। उन्होंने बीजेपी नेताओं को RSS प्रमुख मोहन भागवत की बात सुनने की सलाह देते हुए कहा कि बीजेपी सत्ता में RSS की वजह से है। दीपके की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मोहन भागवत के हालिया बयानों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है और RSS प्रमुख ने न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान हिंदू धर्म, मुस्लिम समुदाय और भारत की विविधता को लेकर समावेशी रुख की बात कही थी।
‘बीजेपी को लगता है कि वह RSS से बड़ी हो गई है’
अभिजीत दीपके ने कहा कि वह शुरुआत से ही बीजेपी से यह कह रहे हैं कि उसे मोहन भागवत और RSS की बातों पर ध्यान देना चाहिए। उनके मुताबिक, केंद्र की सत्ता में कई वर्षों तक रहने और केंद्रीय जांच एजेंसियों समेत कई संस्थागत शक्तियों के हाथ में होने के बाद बीजेपी को यह लगने लगा है कि वह RSS से बड़ी हो गई है। दीपके ने कहा कि यही सोच बीजेपी और RSS के बीच कथित वैचारिक दूरी को दिखाती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बीजेपी को अपने वैचारिक मार्गदर्शक की बातों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
मोहन भागवत के बयान का दिया हवाला
दीपके ने अपनी बात रखने के दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क में दिए गए हालिया बयान का हवाला दिया। भागवत ने वहां आयोजित एक बहुधार्मिक कार्यक्रम में भारत की विविधता और धार्मिक सौहार्द की बात करते हुए कहा था कि अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा। भागवत ने सभी इंसानों की गरिमा और अलग-अलग धार्मिक रास्तों के सम्मान की बात भी कही थी। दीपके ने इसी बयान को बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर पेश किया और कहा कि पार्टी को संघ प्रमुख के इस दृष्टिकोण को गंभीरता से सुनना चाहिए।
‘भागवत Gen Z को एंटी-नेशनल कहने के खिलाफ थे’
CJP नेता ने Gen Z के विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी बीजेपी और RSS के कथित अलग-अलग रुख का मुद्दा उठाया। दीपके के मुताबिक, मोहन भागवत ने पहले कहा था कि प्रदर्शन कर रहे Gen Z युवाओं को एंटी-नेशनल नहीं कहा जाना चाहिए और युवाओं की चिंताओं को समझने की जरूरत है। इसके विपरीत, दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों के लिए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द के इस्तेमाल का हवाला देते हुए कहा कि इससे साफ होता है कि प्रधानमंत्री मोहन भागवत की बात नहीं सुन रहे हैं।
‘RSS प्रमुख समावेशिता और बच्चों के सम्मान की बात करते हैं’
अभिजीत दीपके ने कहा कि एक तरफ RSS प्रमुख समावेशिता, विविधता और युवाओं की चिंताओं का सम्मान करने की बात करते हैं, जबकि दूसरी तरफ सत्ता पक्ष से जुड़े बयानों में प्रदर्शन कर रहे युवाओं को अलग-अलग कठोर शब्दों से संबोधित किया जाता है। उन्होंने इसे राजनीतिक और वैचारिक रूप से असंगत बताते हुए कहा कि ऐसा रुख अच्छा नहीं लगता। दीपके का कहना था कि बीजेपी को कम से कम अपने मार्गदर्शक मोहन भागवत की बात सुननी चाहिए।
‘बीजेपी सत्ता में है क्योंकि RSS उसके साथ है’
दीपके ने अपने बयान में बीजेपी और RSS के संबंध को लेकर सबसे सीधी टिप्पणी करते हुए कहा कि बीजेपी सत्ता में RSS की वजह से है। उनके मुताबिक, RSS लंबे समय से बीजेपी का वैचारिक और संगठनात्मक आधार रहा है और इसलिए बीजेपी को संघ के नेतृत्व और उसके प्रमुख संदेशों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बीजेपी और RSS के बीच नेतृत्व, संगठन और वैचारिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं। हालांकि, दीपके के इस दावे पर बीजेपी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
CJP के आंदोलन से भी जुड़ा है दीपके का नाम
अभिजीत दीपके हाल के महीनों में जंतर-मंतर पर Gen Z और छात्रों से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के कारण चर्चा में आए हैं। उन्होंने कथित NEET अनियमितताओं को लेकर हुए आंदोलन का नेतृत्व किया था और इसी पृष्ठभूमि में CJP के संस्थापक के तौर पर उनकी राजनीतिक पहचान बनी। हालिया बयानों में वह लगातार केंद्र सरकार और बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं।
सोनम वांगचुक की टिप्पणी पर भी दिया जवाब
इसी दौरान दीपके से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की CJP नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को लेकर की गई टिप्पणी पर भी सवाल पूछा गया। दीपके ने कहा कि वांगचुक के बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया है। उन्होंने दावा किया कि वांगचुक ने CJP नेताओं के बारे में उनकी ईमानदारी और आंदोलन के दौरान उनके काम की प्रशंसा की थी। दीपके ने यह भी कहा कि भविष्य में कोई व्यक्ति क्या करेगा, इसकी गारंटी कोई नहीं दे सकता और उन्होंने लोगों से किसी भी व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करने की अपील की।
बीजेपी-RSS रिश्ते पर फिर तेज हुई बहस
अभिजीत दीपके के बयान ने एक बार फिर बीजेपी और RSS के बीच संबंधों को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर बीजेपी लंबे समय से RSS को अपना वैचारिक मार्गदर्शक मानती रही है, वहीं दीपके का आरोप है कि सत्ता में लंबे समय तक रहने के बाद बीजेपी को यह भ्रम हो गया है कि वह अपने वैचारिक संगठन से बड़ी हो गई है। मोहन भागवत के हालिया समावेशी बयानों और बीजेपी सरकार की ओर से विरोध प्रदर्शनों को लेकर अपनाए गए रुख को एक साथ रखते हुए दीपके ने दोनों के बीच कथित अंतर को उजागर करने की कोशिश की है। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आकलन है और बीजेपी या RSS की ओर से इस टिप्पणी पर कोई समानांतर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।









