इंडिया गठबंधन के भीतर बढ़ती खींचतान और सहयोगी दलों के सांसदों में टूट-फूट की खबरों के बीच कांग्रेस ने संसद के आगामी मानसून सत्र के लिए अपनी रणनीति लगभग तय कर ली है। कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि विपक्षी दल एकजुट नहीं होते हैं, तब भी वह जनहित के मुद्दों पर मोदी सरकार को अपने दम पर घेरने से पीछे नहीं हटेगी।
मानसून सत्र से पहले गुरुवार को कांग्रेस संसदीय दल की अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने सरकार को घेरने के लिए विस्तृत रणनीति पर चर्चा की। इस बैठक के साथ कांग्रेस ने सहयोगी दलों को यह राजनीतिक संदेश भी देने की कोशिश की है कि पार्टी विपक्ष की सबसे बड़ी ताकत के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
इंडिया गठबंधन की अगली बैठक 20 जुलाई को प्रस्तावित है। इस बैठक में सभी सहयोगी दलों के संसदीय नेताओं की मौजूदगी गठबंधन की एकजुटता की तस्वीर साफ करेगी। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के एनडीए के प्रति झुकाव और समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक स्पष्ट रुख न अपनाने से विपक्षी राजनीति में कई सवाल खड़े हो गए हैं।
इसी बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर परिसीमन (Delimitation) विधेयक में प्रस्तावित बदलावों को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। माना जा रहा है कि कांग्रेस इस मुद्दे को भी संसद में प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है।
बैठक कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के 10 जनपथ स्थित आवास पर आयोजित की गई। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, सोनिया गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, पी. चिदंबरम, शशि थरूर, मनीष तिवारी, कुमारी शैलजा, तारिक अनवर, के. सुरेश, नसीर हुसैन और मणिकम टैगोर सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
इन बड़े मुद्दों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष
बैठक में उन मुद्दों की सूची भी तैयार की गई, जिन पर संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार से जवाब मांगा जाएगा। कांग्रेस इस बार युवाओं, किसानों और आम जनता से जुड़े मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने की रणनीति बना रही है।
पार्टी के अनुसार, NEET पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में हुई कथित अनियमितताएं प्रमुख मुद्दा होंगी। कांग्रेस का कहना है कि लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और सरकार को इस पर जवाब देना होगा।इसके अलावा अयोध्या राम मंदिर में चंदे के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को लेकर भी सरकार से सवाल पूछे जाएंगे। कांग्रेस इस मुद्दे को धार्मिक आस्था और पारदर्शिता से जोड़कर संसद में उठाने की तैयारी में है।
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों तथा महंगाई का मुद्दा भी विपक्ष के एजेंडे में शामिल है। पार्टी का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का हवाला देकर आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ाया जा रहा है।भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी कांग्रेस सरकार से स्पष्टीकरण मांगने वाली है। पार्टी यह जानना चाहती है कि इस समझौते का देश के उद्योगों, किसानों और रोजगार पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
कांग्रेस की इस रणनीतिक बैठक को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे समय में जब विपक्षी गठबंधन के भीतर एकजुटता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, कांग्रेस ने यह संकेत दिया है कि वह संसद में सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई सहयोगी दलों के समर्थन के साथ या उसके बिना भी जारी रखेगी।










