नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की आगामी भारत यात्रा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मुंबई में होने वाली मुलाकात को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा कि रुबियो ने अपने ‘कर्मचारी’ को मुंबई बुलाया है। उनके इस बयान के बाद भारत की विदेश नीति और अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
राहुल गांधी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था कि रुबियो की मुंबई यात्रा के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के भी बैठक में शामिल होने की उम्मीद है। इसके बाद कांग्रेस ने सवाल उठाया कि भारत के विदेश मंत्री की बैठक की जानकारी अमेरिकी अधिकारी क्यों दे रहे हैं।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मिस्टर रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है।” इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस बात को लेकर भ्रमित दिखाई दे रहे हैं कि क्या हो रहा है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए—जब तक कि वह खुद ही इसका जवाब न देना चाहें।
राहुल गांधी की टिप्पणी को कांग्रेस ने भारत-अमेरिका संबंधों में शक्ति संतुलन और विदेश नीति के संचालन पर सवाल उठाने के रूप में पेश किया है। हालांकि, ‘कर्मचारी’ शब्द उनकी राजनीतिक टिप्पणी का हिस्सा है, न कि दोनों देशों के बीच आधिकारिक संबंधों का वर्णन।
अमेरिकी राजदूत के बयान से क्यों उठा विवाद?
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा था कि रुबियो मुंबई में भारत सरकार के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और उन्हें उम्मीद है कि एस. जयशंकर भी बैठक में शामिल होंगे। कांग्रेस नेताओं ने इस बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय मंत्री की आधिकारिक बैठकों की घोषणा भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से होनी चाहिए।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी पूछा कि भारतीय विदेश मंत्री की बैठक के बारे में जानकारी किसी दूसरे देश के अधिकारी की ओर से क्यों दी जा रही है। पार्टी के अन्य नेताओं ने इसे सरकार के कूटनीतिक संवाद और सूचना साझा करने के तरीके से जोड़कर आलोचना की।
विदेश मंत्रालय ने क्या सफाई दी?
विवाद के बीच विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि पिछले करीब एक दशक से विदेशी नेताओं और प्रतिनिधियों की मेजबानी दिल्ली के अलावा भारत के अन्य शहरों में भी की जाती रही है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पेन के प्रधानमंत्री की वडोदरा और जर्मनी के चांसलर की अहमदाबाद में मेजबानी की थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी पहले गोवा में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक और गुजरात के केवड़िया में विदेशी प्रतिनिधियों की मेजबानी कर चुके हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर 19 और 20 अक्टूबर को मुंबई में संयुक्त अरब अमीरात के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान की मेजबानी करेंगे। इसके बाद 20 अक्टूबर को वह रुबियो के साथ वार्ता करेंगे और मुंबई स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ से जुड़े समारोह में भी शामिल होंगे।
रुबियो की भारत यात्रा का एजेंडा क्या है?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 17 से 22 अक्टूबर के बीच उज्बेकिस्तान और भारत की यात्रा पर रहेंगे। भारत में उनके मुंबई और गुजरात के जामनगर जाने का कार्यक्रम है। जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज का बड़ा रिफाइनरी परिसर स्थित है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जयशंकर और रुबियो की बातचीत में भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा और उसे मजबूत करने के उपायों पर चर्चा होगी। दोनों पक्षों के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों और क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श होने की उम्मीद है।
भारत-अमेरिका संबंधों के बीच अहम बैठक
रुबियो की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत में रुकावटें आई हैं। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी टैरिफ, ऊर्जा सहयोग और अन्य रणनीतिक मुद्दे भी दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर रहे हैं।
राहुल गांधी ने मुंबई में होने वाली बैठक को लेकर सरकार की आलोचना की है, जबकि विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि विदेशी नेताओं की मेजबानी दूसरे भारतीय शहरों में करना कोई नई परंपरा नहीं है। अब इस मुलाकात पर नजर रहेगी कि दोनों पक्ष व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग के मुद्दों पर किस तरह आगे बढ़ते हैं।










