नई दिल्ली: चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में विवाद और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। पंजाब में बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम SIR के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से गायब मिला है और उनके नाम के सामने “Permanently Shifted” दर्ज किया गया है। चड्ढा ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, झारखंड के गोड्डा जिले में SIR के दौरान Form 7 के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के अनुरोध सामने आने के बाद चुनाव अधिकारियों ने जांच शुरू करने का आदेश दिया है। हालांकि, दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं और इनमें अंतिम तौर पर किसी राजनीतिक दल की गैरकानूनी भूमिका साबित नहीं हुई है।
पंजाब में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से गायब
पंजाब में चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के तहत तैयार ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बीजेपी सांसद राघव चड्ढा का नाम नहीं मिला। उनके नाम को ASDD यानी Absent, Shifted, Deceased and Duplicate श्रेणी में रखा गया है और रिकॉर्ड में उन्हें “Permanently Shifted” बताया गया है। चड्ढा 2022 में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में पंजाब से राज्यसभा पहुंचे थे और अप्रैल 2026 में बीजेपी में शामिल हो गए थे।
चड्ढा का कहना है कि उनका वोटर आईडी मोहाली में पंजीकृत है और वह पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं। इसलिए उनके नाम के सामने स्थायी रूप से स्थानांतरित होने का उल्लेख गलत है। उन्होंने इस कार्रवाई को महज प्रशासनिक या क्लेरिकल गलती मानने से इनकार करते हुए इसे राजनीतिक बदले से जोड़ा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि मौजूदा सूची ड्राफ्ट है और इसमें नाम हटाए जाने के खिलाफ दावा और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया अभी खुली है।
AAP ने आरोपों से किया इनकार
राघव चड्ढा के आरोपों के बाद पंजाब में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी और पंजाब सरकार ने इस मामले में किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप से इनकार किया है। उनका कहना है कि SIR और मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है और राज्य सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है। यानी फिलहाल विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि चड्ढा जहां इसे राजनीतिक कार्रवाई बता रहे हैं, वहीं AAP का कहना है कि राज्य सरकार ने उनका नाम हटाने का कोई निर्णय नहीं लिया। अंतिम निर्णय दावा-आपत्ति और चुनाव अधिकारियों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
नाम वापस जुड़वाने का रास्ता खुला
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति स्थायी रूप से मतदान के अधिकार से बाहर हो गया है। SIR के बाद जारी ड्राफ्ट सूची पर मतदाताओं को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक राघव चड्ढा भी अपने नाम को दोबारा सूची में शामिल कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का इस्तेमाल कर सकते हैं।
यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि SIR प्रक्रिया में ड्राफ्ट सूची और अंतिम मतदाता सूची के बीच दावा-आपत्ति तथा सत्यापन का चरण होता है। इसलिए किसी व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट में नहीं होना अपने आप में अंतिम रूप से मतदाता सूची से बाहर होना नहीं माना जा सकता।












