नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के आखिरी सप्ताह में छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा राजनीतिक टकराव का नया केंद्र बन गया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र आंदोलन और 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस और INDIA गठबंधन लगातार केंद्र सरकार तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग रहे हैं। अब सत्ता पक्ष ने झारखंड में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन और वहां हुई पुलिस कार्रवाई को मुद्दा बनाकर राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा है। मंगलवार को संसद के मकर द्वार के बाहर NDA और INDIA गठबंधन के सांसद आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने पोस्टर और नारेबाजी के जरिए एक-दूसरे को घेरने की कोशिश की। स्थिति तनावपूर्ण होने पर सुरक्षा कर्मियों ने दोनों समूहों के बीच मानव श्रृंखला बनाकर उन्हें अलग किया।
जंतर-मंतर से झारखंड तक पहुंचा छात्र आंदोलन का मुद्दा
पूरे विवाद की राजनीतिक पृष्ठभूमि शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों से जुड़ी है। दिल्ली में CJP के आंदोलन ने NEET-UG और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों तथा शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया था। 20 जुलाई को CJP के संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए आंसू गैस और बल प्रयोग किया था। इसके बाद राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों से माफी मांगने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी।
इसी बीच झारखंड में भी JPSC और JSSC से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज हुआ। राज्य में छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किए। बीजेपी ने इस मुद्दे को विधानसभा और संसद दोनों स्तरों पर उठाना शुरू किया और JPSC-JSSC से जुड़े मामलों की जांच की मांग की।
NDA ने राहुल गांधी को क्यों घेरा?
मकर द्वार पर प्रदर्शन के दौरान NDA सांसदों ने राहुल गांधी पर “दोहरा रवैया” अपनाने का आरोप लगाया। उनका सवाल था कि जब राहुल गांधी दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग रहे हैं, तो झारखंड में छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर उन्होंने उसी स्तर पर सवाल क्यों नहीं उठाए।
NDA सांसदों ने प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के खिलाफ नारे लगाए और उनसे झारखंड के छात्रों के मुद्दे पर जवाब देने की मांग की। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड के छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का उल्लेख करते हुए राज्य में आंदोलन के दौरान उनके साथ कथित मारपीट का मुद्दा उठाया। वहीं अनुराग ठाकुर ने भी झारखंड के युवाओं के साथ न्याय की मांग करते हुए राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा। हालिया रिपोर्टिंग में बीजेपी सांसदों द्वारा झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी कथित गड़बड़ियों पर संसद परिसर में प्रदर्शन और CBI जांच की मांग किए जाने का उल्लेख है।
क्या बीजेपी ने जंतर-मंतर के मुद्दे का जवाब झारखंड से दिया?
यही इस पूरे टकराव का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल है। विपक्ष का तर्क है कि दिल्ली में हुई पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही केंद्र सरकार की है, क्योंकि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती है। इसलिए विपक्ष अमित शाह से जवाब मांग रहा है। दूसरी ओर NDA का कहना है कि अगर पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष राजनीतिक जवाबदेही की बात करता है, तो उसे झारखंड में छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में भी समान मानदंड अपनाना चाहिए।
राजनीतिक तौर पर देखा जाए तो झारखंड का मुद्दा NDA के लिए एक counter-narrative तैयार करता है। जंतर-मंतर की कार्रवाई पर विपक्ष लगातार केंद्र को कटघरे में खड़ा कर रहा था, जबकि झारखंड का मामला कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर सवाल उठाने का अवसर देता है। यही वजह है कि संसद में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दों को सामने रखकर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश की।
हालांकि यह कहना कि बीजेपी ने “जंतर-मंतर से ध्यान हटाने के लिए झारखंड को ढाल बनाया” एक राजनीतिक व्याख्या है, स्थापित तथ्य नहीं। इतना जरूर है कि दोनों पक्ष अब पुलिस कार्रवाई और छात्र आंदोलनों को एक-दूसरे के खिलाफ राजनीतिक जवाबदेही के सवाल के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
बीजेपी का सवाल- राहुल गांधी झारखंड क्यों नहीं गए?
बीजेपी सांसदों ने खास तौर पर यह सवाल उठाया कि राहुल गांधी ने दिल्ली के छात्रों के समर्थन में जिस तरह मुखर भूमिका निभाई, वैसी भूमिका झारखंड के छात्रों के मामले में क्यों नहीं दिखाई। NDA सांसदों ने इसे कांग्रेस के दोहरे राजनीतिक मानदंड के रूप में पेश किया।
बीजेपी का कहना है कि छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का विरोध किसी राज्य या सरकार के हिसाब से नहीं, बल्कि सिद्धांत के आधार पर होना चाहिए। अगर दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है, तो झारखंड में ऐसी कार्रवाई पर भी विपक्ष को समान रूप से आवाज उठानी चाहिए।
यहीं से बीजेपी का राजनीतिक तर्क बनता है कि कांग्रेस और राहुल गांधी छात्र आंदोलनों को लेकर चयनात्मक रुख अपना रहे हैं। हालांकि विपक्ष इस आरोप को खारिज करता है और दिल्ली तथा झारखंड की प्रशासनिक जिम्मेदारियों को अलग-अलग बताता है।
प्रियंका गांधी ने दिया बीजेपी को जवाब
मकर द्वार पर NDA सांसदों के प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी वहां पहुंचीं। बीजेपी सांसद राहुल गांधी के झारखंड नहीं जाने को लेकर नारे लगा रहे थे। प्रियंका गांधी ने बीजेपी सांसदों के पोस्टर की ओर देखा और जवाब दिया कि राहुल गांधी झारखंड के छात्रों से मिल चुके हैं।
इसके बाद वह विपक्षी सांसदों के प्रदर्शन में शामिल हो गईं। प्रियंका गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने पहली बार सत्ता पक्ष के सांसदों को इस तरह प्रदर्शन करते देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष के दबाव के कारण ऐसी स्थिति में पहुंची है जहां उसके सांसद भी प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। उन्होंने जंतर-मंतर मामले को लेकर एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद में बयान देने की मांग दोहराई।
कांग्रेस का पलटवार- दिल्ली की पुलिस केंद्र के अधीन, झारखंड की राज्य सरकार के
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों मामलों की संवैधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी अलग है। उनका तर्क है कि झारखंड में पुलिस राज्य सरकार के अधीन है, जबकि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आती है।कांग्रेस के मुताबिक, इसी वजह से दिल्ली में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्री से जवाब मांगना स्वाभाविक है। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी से झारखंड की पुलिस कार्रवाई की सीधी जवाबदेही मांगना राजनीतिक रूप से मुद्दे को भटकाने की कोशिश है।यानी विपक्ष का मूल सवाल यह है कि जिस घटना की प्रशासनिक जिम्मेदारी केंद्र के पास है, उसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री से जवाब क्यों न मांगा जाए। वहीं बीजेपी का सवाल है कि लोकतंत्र और छात्रों के अधिकारों की बात करने वाले राहुल गांधी को झारखंड के छात्रों के मामले में भी समान आवाज उठानी चाहिए।
झारखंड में आखिर छात्रों का आंदोलन क्यों?
झारखंड में छात्रों का आंदोलन JPSC और JSSC से जुड़ी कथित अनियमितताओं और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता के सवालों को लेकर तेज हुआ है। छात्रों की मांगों में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और कथित गड़बड़ियों पर कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं। जुलाई के अंत में झारखंड बीजेपी सांसदों ने भी संसद परिसर में इस मुद्दे को उठाते हुए जांच की मांग की थी। इसके बाद राज्य में आंदोलन और राजनीतिक दबाव बढ़ता गया। हालिया घटनाक्रम में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की घोषणा की है और दो अन्य JPSC परीक्षाओं को भी रद्द करने की बात कही है। सरकार ने TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं की जांच शुरू करने की भी घोषणा की है। इससे साफ है कि परीक्षा विवाद अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य सरकार के स्तर पर भी प्रशासनिक फैसलों तक पहुंच गया है।
संसद के बाहर क्यों बढ़ा टकराव?
संसद के मकर द्वार पर NDA और INDIA गठबंधन का आमना-सामना केवल एक दिन की नारेबाजी नहीं है। मानसून सत्र के दौरान छात्र आंदोलन, NEET विवाद, पुलिस कार्रवाई और शिक्षा मंत्री से जुड़ी राजनीतिक मांगों ने पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ा दिया था।
विपक्ष लगातार जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार को घेर रहा है। इसके जवाब में NDA ने झारखंड के छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को सामने रख दिया। इस तरह संसद के भीतर होने वाली बहस धीरे-धीरे संसद परिसर के बाहर राजनीतिक प्रदर्शन में बदल गई है। दोनों पक्ष अब यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि दूसरा पक्ष छात्रों और लोकतांत्रिक विरोध के सवाल पर “चयनात्मक” रवैया अपना रहा है।
राम मंदिर चंदे का मुद्दा भी विपक्ष के निशाने पर
इस टकराव में छात्र आंदोलन के अलावा अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित गड़बड़ी का मुद्दा भी विपक्ष ने उठाया। INDIA गठबंधन के सांसदों ने सरकार से इस मामले पर जवाब देने और चर्चा की मांग की।इससे संसद के बाहर का विरोध केवल छात्र आंदोलनों तक सीमित नहीं रहा। एक ओर विपक्ष जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चंदे से जुड़े आरोपों को लेकर सरकार को घेर रहा था, वहीं NDA सांसद झारखंड में छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी को निशाना बना रहे थे।
असली लड़ाई पुलिस कार्रवाई की नहीं, राजनीतिक नैरेटिव की?
पूरे घटनाक्रम को देखें तो दोनों गठबंधनों के बीच मूल संघर्ष जवाबदेही की परिभाषा को लेकर है। विपक्ष चाहता है कि दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय जवाब दें। सत्ता पक्ष चाहता है कि विपक्ष भी अपने शासन वाले राज्यों में पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी स्वीकार करे।इस राजनीतिक लड़ाई में छात्र आंदोलन एक साझा मुद्दा होने के बावजूद दोनों पक्षों की व्याख्या अलग है। बीजेपी के लिए झारखंड यह दिखाने का माध्यम है कि पुलिस कार्रवाई केवल केंद्र सरकार के शासन में नहीं होती। विपक्ष के लिए दिल्ली का मामला इसलिए अलग है क्योंकि दिल्ली पुलिस सीधे केंद्र के अधीन है।
इसलिए मौजूदा टकराव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि छात्र आंदोलनों का मुद्दा अब संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक जवाबी कार्रवाई का हिस्सा बन चुका है। जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई के बाद जिस जवाबदेही की मांग विपक्ष केंद्र से कर रहा था, उसी भाषा में NDA अब झारखंड सरकार और राहुल गांधी से जवाब मांग रहा है। आने वाले दिनों में यह बहस इस सवाल पर और तेज हो सकती है कि छात्रों के विरोध के अधिकार और पुलिस की कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।










