नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर मुंबई में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद मुंबई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को व्हाट्सएप के माध्यम से नोटिस जारी कर जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। छात्र संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने इस कदम को युवाओं की आवाज़ दबाने और भय का माहौल बनाने की कोशिश करार दिया है।
सोमवार को मुंबई के विभिन्न हिस्सों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवा संगठनों ने हिस्सा लिया था। इनमें दिल्ली में चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में आयोजित प्रदर्शन भी शामिल थे। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया था, जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।
व्हाट्सएप के जरिए भेजे जा रहे हैं नोटिस
प्रदर्शन के अगले ही दिन कई युवाओं के मोबाइल फोन पर मुंबई पुलिस की ओर से व्हाट्सएप नोटिस पहुंचने लगे। इन नोटिसों में संबंधित व्यक्तियों को जांच अधिकारी के समक्ष निर्धारित तिथि पर उपस्थित होने को कहा गया है।
मुंबई पुलिस का कहना है कि ये नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत जारी किए गए हैं। इस प्रावधान के अनुसार, जिन मामलों में अधिकतम सजा सात वर्ष से कम है, उनमें पुलिस सीधे गिरफ्तारी करने के बजाय पहले नोटिस जारी कर व्यक्ति को जांच में शामिल होने का अवसर देती है।
पुलिस अधिकारियों ने इसे नियमित कानूनी प्रक्रिया बताते हुए कहा है कि नोटिस भेजने का उद्देश्य केवल जांच को आगे बढ़ाना है और इसे किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
करीब 900 लोगों के नाम पुलिस रिकॉर्ड में
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई पुलिस ने सोमवार को हुए प्रदर्शनों के संबंध में कम से कम सात अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। इन मामलों में 300 से अधिक लोगों के खिलाफ सीधे केस दर्ज किया गया है।इसके अतिरिक्त, शिवाजी पार्क में आयोजित प्रदर्शन में शामिल लगभग 600 अन्य लोगों के नाम भी विभिन्न एफआईआर में जोड़े गए हैं। इस तरह कुल मिलाकर करीब 900 प्रदर्शनकारी अब पुलिस रिकॉर्ड का हिस्सा बन चुके हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से कई लोगों को नोटिस भेजे जा चुके हैं और आने वाले दिनों में उनसे पूछताछ की जा सकती है।
छात्र संगठनों ने जताई नाराजगी
छात्र संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले छात्रों को नोटिस भेजना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वे केवल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि NEET पेपर लीक और अन्य परीक्षा विवादों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और ऐसे में विरोध प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है।










