Azamgarh:14सितंबर: शिबली नेशनल कॉलेज के इतिहास विभाग में “भाषा और ज़ुबान” विषय पर एक शैक्षिक गोष्ठी आयोजित हुई, जिसमें श्री राजीव रंजन ने छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। आपका संबंध आज़मगढ़ से है और आप हरियाणा पुलिस में पब्लिक रिलेशन ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं।
पिछले 25 वर्षों से आप आज़मगढ़ में हिंदी-उर्दू पुस्तक मेले का आयोजन करते आ रहे हैं, जिसमें सभी वर्गों के लोग भाग लेते हैं और इससे शैक्षिक व साहित्यिक लाभ प्राप्त करते हैं।
अपने व्याख्यान में उन्होंने भाषा के ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि ऐतिहासिक दस्तावेज़, सांस्कृतिक निरंतरता और सामाजिक व राजनीतिक परिवर्तनों पर भाषा के गहरे प्रभाव पड़ते हैं। उनके अनुसार राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक घटनाएँ भाषा की संरचना और उसके विकास पर प्रत्यक्ष रूप से असर डालती हैं। इसी प्रकार जब विभिन्न समुदाय और संस्कृतियाँ आपस में मिलती हैं तो एक नई भाषा जन्म लेती है, जिसकी सबसे उज्ज्वल मिसाल उर्दू भाषा है।
उन्होंने कहा कि भाषा के अध्ययन से इतिहास के विभिन्न युगों को अच्छी तरह समझा जा सकता है। इस संदर्भ में उन्होंने उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं के महत्व को रेखांकित किया और उनके लाभ बताए। उनका कहना था कि भाषा का कोई धर्म नहीं होता, इसलिए हर भाषा को सीखना और पढ़ना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अलाउद्दीन ख़ान ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि भाषा और इतिहास का गहरा संबंध है। भाषा किसी समुदाय के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक-राजनीतिक विकास की झलक प्रस्तुत करती है, जबकि इतिहास भाषा की संरचना और उसके विकास में सहायक होता है। उनके अनुसार इतिहास की बदौलत भाषाओं की उत्पत्ति, विस्तार और अन्य भाषाओं से संबंध स्पष्ट होता है।
उन्होंने छात्र-छात्राओं को सलाह दी कि वे विभिन्न भाषाएँ सीखें, क्योंकि यह न केवल उनके आर्थिक विकास का कारण बनेगा बल्कि उन्हें अपनी और दुनिया की इतिहास और संस्कृति को समझने में भी मदद करेगा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शहरयार ने किया, जबकि अतिथि का परिचय डॉ. तबरेज़ आलम ने प्रस्तुत किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सिद्धार्थ सिंह ने किया। इस अवसर पर इतिहास विभाग के छात्र-छात्राएँ बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।












