आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में गुरुवार को विजयादशमी उत्सव पर अपना संबोधन दिया. संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के बीच भागवत ने देश और दुनिया की बड़ी समस्याओं पर अपनी बातें रखीं. उन्होंने भारत के पड़ोसी देशों में हाल ही में हुए आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि हिंसक प्रदर्शनों से हालात नहीं बदलते, सिर्फ कुछ वक्त उथल-पुथल होती है. लोकतांत्रिक मार्गों से ही बदलाव आता है. राष्ट्रपिता को याद करते हुए संघ प्रमुख ने कहा, उन्होंने संप्रदायवाद के खिलाफ समाज की रक्षा की. स्वतंत्रता की लड़ाई में महात्मा गांधी जी का योगदान अविस्मरणीय है. स्वतंत्रता के बाद का जीवन कैसे चले ये भी हमने उनसे सीखा है. हमारे उस वक्त के दार्शनिक नेता का योगदान कमाल का है. देश के लिए उन्होंने अपने प्राण दिए, उनकी आज जयंती है.
भागवत ने कहा, श्रीलंका, बांग्लादेश और फिर नेपाल में उथल-पुथल दिख रही है. कभी-कभी शासन प्रशासन जनता के प्रति संवेदनशील नहीं होता है और जनता की मांगों को ध्यान में नहीं रखकर काम नहीं करती है. असंतोष रहता है, लेकिन इसे इस प्रकार से व्यक्त करना, किसी के लाभ की बात नहीं है. हिंसा और विनाश को डॉ. अंबेडकर ने अराजकता कहा है. प्रजातांत्रिक मार्गों से ही परिवर्तन आता है.
हिंदू समाज को एकजुट रहना होगा
आरएसएस प्रमुख ने कहा, हिन्दू समाज को एकजुट रहना होगा. हिंदू समुदाय को जिम्मेदार और जवाबदेह बनना होगा. हमें हिन्दू राष्ट्र बनाना होगा. हिन्दू समाज ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है. भारत प्राचीन हिंदू राष्ट्र है. मजबूत हिंदू सुरक्षा की गारंटी है. जो दूसरे धर्म ने नहीं दिया, वो हिंदू ने दिया है.
भागवत ने कहा, अमेरिका ने जो नीति टैरिफ की अपनाई है, वो अपने हित की सोचकर बनाई होगी, लेकिन उसकी मार पूरी दुनिया पर पड़ी है. कोई भी राष्ट्र अलगाव में जी नहीं सकता. लेकिन ये निर्भरता मजबूरी में न बदल जाए. ये कब बदलेगी, कैसे बदलेगी, इसके लिए हमें स्वदेशी और स्वावलंबन को आगे बढ़ाना होगा source:ndtv india












