पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी बगावत के बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने पहली बार खुलकर बागी नेताओं को चुनौती दी है। विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद कई सांसद, विधायक और वरिष्ठ नेताओं के टीएमसी छोड़ने तथा अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाने के बीच उन्होंने बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए कहा है कि यदि पार्टी छोड़ चुके नेता दोबारा ममता बनर्जी के नेतृत्व में वापस लौट आते हैं, तो वह एक घंटे के भीतर पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे देंगे।
‘अगर समस्या मैं हूं तो वापस लौट आइए’
कोलकाता में मीडिया से बातचीत के दौरान अभिषेक बनर्जी ने कहा कि यदि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं की वास्तविक शिकायत उनसे है और वे उन्हें ही टीएमसी छोड़ने का कारण बता रहे हैं, तो उन्हें बिना किसी हिचकिचाहट के ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी में वापस लौट आना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके लिए पार्टी और ममता बनर्जी सर्वोपरि हैं और यदि उनकी वजह से संगठन में कोई समस्या उत्पन्न हुई है तो वह अपने सभी पदों का त्याग करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
अभिषेक बनर्जी ने कहा, “जो लोग आज पार्टी छोड़कर मुझे दोष दे रहे हैं, मैं उन्हें खुली चुनौती देता हूं कि वे दीदी के नेतृत्व में वापस लौट आएं। अगर वे ऐसा करते हैं, तो मैं एक घंटे के भीतर पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दूंगा।”
21 जुलाई से पहले पार्टी में वापसी का दिया न्योता
टीएमसी के शहीद दिवस कार्यक्रम से पहले अभिषेक बनर्जी ने बागी नेताओं के लिए पार्टी के दरवाजे खुले होने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि जो भी नेता 21 जुलाई से पहले पार्टी में वापस आना चाहते हैं, उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि वह स्वयं यह सुनिश्चित करेंगे कि लौटने वाले नेताओं को पार्टी में उचित सम्मान और जिम्मेदारी मिले।
अभिषेक ने कहा कि टीएमसी उन नेताओं को वापस लेने के लिए तैयार है जो पार्टी की विचारधारा और ममता बनर्जी के नेतृत्व पर विश्वास रखते हैं। उनके मुताबिक, यदि किसी को वास्तव में संगठन से प्रेम है तो उसे व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को किनारे रखकर पार्टी के साथ खड़ा होना चाहिए।
बीजेपी से समझौते का लगाया आरोप
अपने बयान में अभिषेक बनर्जी ने बागी नेताओं पर गंभीर आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी छोड़ने वाले अधिकांश नेताओं ने केंद्रीय जांच एजेंसियों के दबाव और राजनीतिक लाभ के लिए भारतीय जनता पार्टी के साथ समझौता कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं का एक तयशुदा राजनीतिक फॉर्मूला है, जिसके तहत पहले पार्टी छोड़ी जाती है, फिर बागी गुट या बीजेपी का दामन थाम लिया जाता है और उसके बाद ईडी तथा सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों से राहत हासिल करने की कोशिश की जाती है।
उन्होंने कहा कि इसके बाद वही नेता सार्वजनिक मंचों पर अभिषेक बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व पर आरोप लगाने लगते हैं। उनके अनुसार, ऐसे नेताओं का उद्देश्य राजनीतिक संरक्षण प्राप्त करना होता है, न कि जनता की सेवा करना।
ईडी और सीबीआई जांच से डरकर पार्टी छोड़ने वालों पर साधा निशाना
अभिषेक बनर्जी ने उन नेताओं को भी आड़े हाथों लिया जिन्होंने जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद पार्टी छोड़ दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने कोई गलत काम नहीं किया है तो उसे जांच का सामना करने में कोई डर नहीं होना चाहिए। उन्होंने अपने उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि वह स्वयं कई बार ईडी और अन्य एजेंसियों के समन का सामना कर चुके हैं और उनके खिलाफ कई मामलों की जांच चल चुकी है, लेकिन उन्होंने कभी भी राजनीतिक संरक्षण हासिल करने की कोशिश नहीं की।
उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास है और वह किसी भी जांच एजेंसी से मिलने वाली राहत या राजनीतिक सौदेबाजी पर भरोसा नहीं करते। उनके मुताबिक, राजनीतिक जीवन में पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण है।टीएमसी में जारी आंतरिक संकट के बीच अभिषेक बनर्जी का यह बयान पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बागी नेता उनकी इस खुली चुनौती का किस तरह जवाब देते हैं।












