नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। एक ओर कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है।
इस बीच CJP ने दावा किया है कि उसके सदस्यों, छात्रों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े 10,000 से अधिक लोगों को देशभर में हिरासत में लिया गया है। हालांकि, इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। Reuters के मुताबिक, संगठन ने हिरासत में लिए गए लोगों के वीडियो और जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की, लेकिन एजेंसी इन वीडियो और दावों की तत्काल स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सकी।
राष्ट्रपति भवन मार्च की तैयारी में विपक्ष
INDIA गठबंधन के नेताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रपति भवन तक मार्च करने और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी शिकायतें सौंपने की योजना बनाई है। विपक्ष का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
8 अक्टूबर को विपक्षी सांसदों ने दिल्ली के राजघाट पर धरना दिया था। इससे पहले दो दिनों तक चुनाव आयोग और निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की ओर मार्च करने की कोशिशों के दौरान पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बनी थी। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेताओं को भी पिछले प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिया गया था और बाद में छोड़ दिया गया।
राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए विपक्ष ने समय मांगा है। 9 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक, उस समय तक मुलाकात का समय अंतिम रूप से तय नहीं हुआ था। विपक्षी नेताओं ने कहा है कि यदि उन्हें मिलने का अवसर नहीं मिलता है, तो वे आगे के विरोध कार्यक्रमों पर फैसला करेंगे।
CJP का 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
कॉकरोच जनता पार्टी ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और अन्य छात्र तथा विपक्षी समूहों के साथ 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन की मांगों में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR के दौरान कथित रूप से हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच शामिल है।
CJP का आरोप है कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे छात्रों और कार्यकर्ताओं को रास्ते में रोका गया। संगठन ने अपने प्रवक्ता दीपक बालियान को भी हिरासत में लिए जाने का दावा किया। Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार, CJP ने कहा कि बालियान को राजस्थान स्थित उनके घर से हिरासत में लिया गया था और बाद में रात में छोड़ दिया गया। इस कार्रवाई पर पुलिस का विस्तृत पक्ष उस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं था।
दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राजधानी में सुरक्षा बढ़ा दी है। Indian Express के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 8 से 12 अक्टूबर के बीच दिल्ली पुलिस की सहायता के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 221 कंपनियां, यानी लगभग 23,000 कर्मियों की तैनाती की व्यवस्था की है। महिला प्रदर्शनकारियों की संभावित भागीदारी को देखते हुए अतिरिक्त महिला सुरक्षाकर्मियों को भी बुलाया गया है। पुलिस ने जंतर-मंतर, संसद और मध्य दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग बढ़ाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को आशंका है कि दिल्ली और आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन में शामिल होने पहुंच सकते हैं। citeturn831163search3
दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की है। प्रशासन का कहना है कि उसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और संवेदनशील सरकारी क्षेत्रों में भीड़ को नियंत्रित करना है। citeturn831163search3turn831163news8
क्या ट्रेनों पर भी रोक लगाई गई है?
दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले रेल और सड़क मार्गों से राजधानी पहुंचने वाले लोगों की जांच बढ़ाए जाने की खबरें सामने आई हैं। CJP ने दावा किया है कि पुणे से दिल्ली प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे कुछ छात्रों को रास्ते में रोककर बस से अज्ञात स्थान पर ले जाया गया।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्पष्ट नहीं होता कि देशभर में ट्रेनों पर कोई व्यापक या सामान्य प्रतिबंध लगाया गया है। इसलिए ट्रेनों पर पूर्ण रोक लगने की बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यात्रियों को किसी विशेष ट्रेन के रद्द होने, मार्ग बदलने या रोकने की जानकारी के लिए रेलवे की आधिकारिक सूचना देखनी चाहिए।
SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची की गहन समीक्षा की प्रक्रिया है। आयोग के अनुसार इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना और मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट प्रविष्टियों जैसी समस्याओं की पहचान करना है।
विपक्ष का आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम भी हटाए जा सकते हैं और इससे उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। विपक्षी दलों ने इस संबंध में पारदर्शिता, नाम हटाने के आधार और शिकायतों के निपटारे पर सवाल उठाए हैं।
चुनाव आयोग ने SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसके फैसले कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत लिए जाते हैं। इस विवाद में वास्तविक स्थिति समझने के लिए हटाए गए नामों, आपत्तियों, बहाल किए गए नामों और संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण जरूरी है।
42 पूर्व जजों ने चुनाव आयोग का बचाव किया
इस विवाद के बीच 42 पूर्व जजों ने एक खुला पत्र जारी कर चुनाव आयोग और SIR का समर्थन किया। पत्र में कहा गया कि संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन बिना प्रमाण गंभीर आरोप लगाने से संस्थाओं पर जनता का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
पूर्व जजों ने राजनीतिक दलों से चुनावी शिकायतों को उचित संवैधानिक और कानूनी मंच पर उठाने की अपील की। हालांकि, यह पत्र किसी अदालत का फैसला नहीं है और इससे SIR के क्रियान्वयन या मतदाता सूची से जुड़े हर विवाद का कानूनी समाधान अपने आप तय नहीं हो जाता।










