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ज़ोहरान ममदानी के RSS कार्यक्रम के विरोध पर विवाद,RSS ने दिया जवाब

RK News by RK News
August 28, 2026
Reading Time: 1 min read
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ज़ोहरान ममदानी के RSS कार्यक्रम के विरोध पर विवाद,RSS ने दिया जवाब

न्यूयॉर्क: न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ज़ोहरान ममदानी को लेकर भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय के बीच बहस तेज हो गई है। विवाद की वजह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत का 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वेयर गार्डन में प्रस्तावित कार्यक्रम है। ममदानी ने इस कार्यक्रम का समर्थन करने से इनकार किया है और कहा है कि उन्हें यह नहीं पता कि शहर के पास किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का कानूनी अधिकार है या नहीं। उनके बयान के बाद कार्यक्रम के समर्थकों और विरोधियों के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

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ममदानी ने कार्यक्रम का समर्थन करने से किया इनकार

ममदानी ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह मैडिसन स्क्वेयर गार्डन में होने वाले इस कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी निजी कार्यक्रम को रद्द करने का अधिकार शहर के पास है या नहीं, इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। ममदानी का यह बयान उस समय आया जब अमेरिका में कुछ लेफ्ट-लिबरल, नागरिक अधिकार और सामुदायिक संगठन कार्यक्रम को रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

ममदानी ने अपने बयान में भारत को लेकर अपने पारिवारिक अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने उन्हें भारत की जो तस्वीर सिखाई, वह एक बहुलतावादी समाज और धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र की थी, जिसमें सभी लोगों को अपनाने की भावना होनी चाहिए। उन्होंने बहिष्कारवादी सोच पर आधारित किसी आंदोलन के उभार को परेशान करने वाला बताया।

RSS ने ममदानी के बयान पर दिया जवाब

ममदानी के बयान के बाद RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने उनका नाम लिए बिना कार्यक्रम का बचाव किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाला ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ एक अंतरधार्मिक कार्यक्रम है, जिसमें RSS प्रमुख मोहन भागवत विविध, बहुसांस्कृतिक और अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोगों से संवाद करेंगे।

आंबेकर ने कहा कि यह कार्यक्रम खुले संवाद और आपसी सम्मान की भावना के साथ आयोजित किया जा रहा है और RSS के अनुसार यह भारतीय जीवन-दृष्टि की समावेशी प्रकृति को प्रदर्शित करता है। उन्होंने इसे भारत और दुनिया के विभिन्न समुदायों के साथ RSS के लंबे समय से चले आ रहे संवाद और संपर्क अभियान का हिस्सा बताया।

‘सभी को खुले संवाद के लिए आमंत्रित किया’

RSS की ओर से कहा गया कि कार्यक्रम का उद्देश्य अलग-अलग समुदायों के बीच आपसी समझ और साझा लक्ष्यों को बढ़ावा देना है। आंबेकर ने RSS की विचारधारा और दृष्टिकोण को समझने में रुचि रखने वाले लोगों को ऐसे खुले संवाद कार्यक्रमों में शामिल होने का न्योता भी दिया।यह कार्यक्रम RSS के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क अभियान के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मोहन भागवत की तीन देशों की प्रस्तावित यात्रा में अमेरिका उनका पहला पड़ाव है और न्यूयॉर्क में उनका संबोधन इसी यात्रा का हिस्सा बताया जा रहा है।

5 हजार भारतीय-अमेरिकियों के शामिल होने का दावा

‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ का आयोजन ‘अमेरिकन हिन्दूज फॉर इंगेजमेंट एंड डायलॉग’ कर रहा है। आयोजकों के अनुसार, 200 से अधिक हिंदू-अमेरिकी संगठन इस कार्यक्रम का समर्थन कर रहे हैं और करीब 5,000 भारतीय-अमेरिकियों के इसमें शामिल होने की उम्मीद है।हालांकि, दूसरी ओर 61 नागरिक अधिकार, धार्मिक और सामुदायिक संगठनों के गठबंधन ने मैडिसन स्क्वेयर गार्डन से कार्यक्रम रद्द करने की मांग की है। इस विरोध ने कार्यक्रम को धार्मिक और सामुदायिक संवाद के साथ-साथ अमेरिका में भारतीय राजनीति और हिंदू राष्ट्रवाद को लेकर चल रही बहस से भी जोड़ दिया है।

क्षमा सावंत ने की कार्यक्रम रद्द करने की मांग

कार्यक्रम के विरोध में सिएटल सिटी काउंसिल की पूर्व सदस्य और समाजवादी नेता क्षमा सावंत ने भी आवाज उठाई है। उन्होंने मोहन भागवत को भारत के दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्रवादी नेताओं में से एक बताते हुए ममदानी से कार्यक्रम रद्द करने की अपील की।

वहीं कार्यक्रम के विरोध को लेकर प्रतिक्रिया देने वालों में अफ्रीकी-अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन भी शामिल हैं। उन्होंने ममदानी और उनके समर्थकों पर कार्यक्रम का विरोध राजनीतिक कारणों से करने का आरोप लगाया और कहा कि मैडिसन स्क्वेयर गार्डन ऐसे राजनीतिक बयानों के लिए जवाबदेह नहीं है। उन्होंने विरोध करने वालों से कार्यक्रम स्थल खुद किराये पर लेकर अपनी बात रखने की बात कही।

हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स ने भी जताया विरोध

‘हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स’ की डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर स्राव्या ताडेपल्ली ने भी कार्यक्रम का विरोध किया। उन्होंने कहा कि मोहन भागवत सभी हिंदुओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते और RSS को धार्मिक राष्ट्रवाद को एकता के रूप में पेश करने के लिए मंच नहीं दिया जाना चाहिए।

उनका कहना है कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय और हिंदू समुदाय के भीतर भी RSS और हिंदू राष्ट्रवाद को लेकर अलग-अलग विचार हैं। संगठन ने बहुलतावादी भारत की अवधारणा और धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दे को इस विवाद के केंद्र में रखा है।

अमेरिका में RSS को लेकर पुराना विवाद

न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम को लेकर उठा विवाद अमेरिका में RSS को लेकर लंबे समय से मौजूद मतभेदों को भी सामने लाता है। RSS के आलोचक संगठन पर भारत में अल्पसंख्यकों के प्रति शत्रुतापूर्ण माहौल को बढ़ावा देने का आरोप लगाते रहे हैं। दूसरी ओर RSS और उसके समर्थक संगठन को सांस्कृतिक और सामाजिक संगठन बताते हुए ऐसे आरोपों को खारिज करते हैं।

अमेरिकी कमिशन फॉर इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने हाल के वर्षों में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति को लेकर अपनी रिपोर्टों में चिंता जताई है और RSS से जुड़े संगठनों के संदर्भ में भी टिप्पणियां की हैं। हालांकि, RSS को अमेरिका द्वारा विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित नहीं किया गया है।

2015 में RSS को लेकर अमेरिकी अदालत में पहुंचा था मामला

RSS को लेकर अमेरिका में विवाद नया नहीं है। 2015 में एक सिख अलगाववादी संगठन से जुड़े मुकदमे में RSS को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित करने की मांग की गई थी। तत्कालीन ओबामा प्रशासन ने इस कानूनी प्रयास का विरोध किया था। अमेरिकी सरकार ने अदालत में कहा था कि व्यवहारिक रूप से वह RSS को आतंकवादी संगठन नहीं मानती।

इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका में RSS की गतिविधियों और उसकी विचारधारा को लेकर लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण मौजूद रहे हैं।

RSS नेताओं का अमेरिका में संपर्क अभियान

RSS के वरिष्ठ पदाधिकारी राम माधव और महासचिव दत्तात्रेय होसबाले भी अप्रैल में अमेरिका का दौरा कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने थिंक टैंक, शिक्षाविदों और नीति विशेषज्ञों के साथ मुलाकातें की थीं। संगठन लंबे समय से विदेशों में भारतीय मूल के लोगों के साथ संपर्क और संवाद बढ़ाने की कोशिश करता रहा है।हिंदू राष्ट्रवाद और भारतीय प्रवासी समुदाय के विशेषज्ञ एडवर्ड एंडरसन के मुताबिक, न्यूयॉर्क जैसे बड़े मंच पर RSS प्रमुख का कार्यक्रम संगठन की सार्वजनिक पहुंच और आत्मविश्वास को दर्शाता है। उनके अनुसार, ऐसे बड़े आयोजनों से भारत में भी संगठन की गतिविधियों की तस्वीर और संदेश पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

मोदी भी मैडिसन स्क्वेयर गार्डन में कर चुके हैं संबोधन

मैडिसन स्क्वेयर गार्डन का भारतीय राजनीति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संदर्भ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2014 का कार्यक्रम भी है। प्रधानमंत्री बनने के कुछ ही महीनों बाद सितंबर 2014 में मोदी ने यहां करीब 18,000 लोगों की भीड़ को संबोधित किया था। उस कार्यक्रम को भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बीच मोदी की लोकप्रियता और भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण राजनीतिक आयोजन के तौर पर देखा गया था।

अब करीब 12 साल बाद इसी प्रमुख स्थल पर RSS प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर विवाद सामने आया है। एक तरफ आयोजक इसे अंतरधार्मिक संवाद और भारतीय जीवन-दृष्टि की प्रस्तुति बता रहे हैं, जबकि विरोधी संगठन इसे हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा को बड़ा सार्वजनिक मंच देने के रूप में देख रहे हैं।

प्रवासी भारतीय समुदाय में क्यों बढ़ी बहस?

इस पूरे विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय खुद भी एकसमान रुख में नहीं दिख रहा है। कार्यक्रम के आयोजकों के अनुसार सैकड़ों हिंदू-अमेरिकी संगठन इसके समर्थन में हैं, जबकि दूसरी ओर दर्जनों नागरिक अधिकार और धार्मिक संगठन इसे रद्द करने की मांग कर रहे हैं।

ज़ोहरान ममदानी का बयान इस बहस को और राजनीतिक बना चुका है। हालांकि उन्होंने कार्यक्रम को रद्द करने के लिए कोई प्रशासनिक आदेश जारी नहीं किया है और खुद भी शहर के कानूनी अधिकार को लेकर अनिश्चितता जताई है। फिलहाल 29 अगस्त को होने वाले कार्यक्रम को लेकर विरोध और समर्थन दोनों जारी हैं और यह विवाद अमेरिकी राजनीति, भारतीय-अमेरिकी समुदाय और RSS की वैश्विक पहुंच से जुड़े सवालों को एक साथ सामने ला रहा है।

Tags: Hindu NationalismIndian AmericansMadison Square Gardenmohan bhagwatNew YorkRSSUniversal Oneness CelebrationZohran Mamdani
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