तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान की ओर से हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को फिर से बंद किए जाने का दावा किया गया है। इसी बीच ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने का संकल्प दोहराया है। इन घटनाक्रमों ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है।
हॉर्मुज़ स्ट्रेट बंद होने का दावा
ईरान का दावा है कि उसकी नौसेना ने एक मालवाहक जहाज को निर्धारित समुद्री मार्ग का पालन न करने पर चेतावनी दी थी। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के अनुसार कुछ जहाजों ने निर्देशों की अनदेखी की, जिसके बाद चेतावनी स्वरूप गोलीबारी की गई।
ईरानी पक्ष का कहना है कि अगली सूचना तक हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद रखने का फैसला किया गया है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अमेरिका ने फिर शुरू किए सैन्य हमले
ईरानी घोषणा के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि उसने ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान शुरू किए हैं। अमेरिकी सेना के अनुसार इन कार्रवाइयों का उद्देश्य समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है।
ईरानी सरकारी मीडिया ने बंदर अब्बास और सीरिक क्षेत्र में कई विस्फोटों की सूचना दी है।
जहाज पर हमले का दावा
अमेरिका ने आरोप लगाया है कि हॉर्मुज़ क्षेत्र में साइप्रस के झंडे वाले एक कंटेनर जहाज पर हमला हुआ, जिससे उसके इंजन रूम को भारी नुकसान पहुंचा और चालक दल का एक सदस्य लापता हो गया। दूसरी ओर ईरान ने इस पूरे घटनाक्रम को अपनी सुरक्षा कार्रवाई का हिस्सा बताया है।
मुजतबा खामेनेई का पहला सार्वजनिक संदेश
अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद पहली बार जारी संदेश में मुजतबा खामेनेई ने कहा कि ईरानी जनता अपने नेता की हत्या का बदला लेकर रहेगी।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार उन्होंने कहा कि शहीदों के खून का हिसाब लिया जाएगा और यह केवल किसी एक नेता का नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र का संकल्प है।
तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक माना जाता है। यदि यहां लंबे समय तक तनाव बना रहता है या आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल आ सकता है। इसका असर भारत समेत कई देशों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर भी पड़ सकता है।










