Roznama Khabrein
No Result
View All Result
  • होम
  • समाचार
  • देश-विदेश
  • पड़ताल
  • एजुकेशन
  • विचार
  • हेट क्राइम
  • अन्य
  • रोजनामा खबरें विशेष
  • اردو
اردو
  • होम
  • समाचार
  • देश-विदेश
  • पड़ताल
  • एजुकेशन
  • विचार
  • हेट क्राइम
  • अन्य
  • रोजनामा खबरें विशेष
  • اردو
No Result
View All Result
No Result
View All Result
Home समाचार

पश्चिमी UP में कैसी है सियासी बिसात और कौन पड़ेगा भारी? सभी दलों की निगाहें मुस्लिम वोट पर, जाट फैक्टर भी अहम

RK News by RK News
April 1, 2024
Reading Time: 1 min read
0

प्रदेश में जहां बसपा ने अकेले चुनाव मैदान में है, वहीं पश्चिमांचल की जाट बिरादरी में असर रखने वाला रालोद इस बार भाजपा के साथ खड़ा है, जबकि सपा उस कांग्रेस के साथ गठबंधन कर मैदान में है जो पिछले तीन दशक से भी ज्यादा समय से प्रदेश में अपनी खोई जमीन तलाश रही है. सभी दल और गठबंधन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बना रहे हैं, लेकिन पिछले कई चुनावों के रुझानों पर नजर डालें तो पश्चिमांचल में ध्रुवीकरण एवं जातीय समीकरण ही हार-जीत का आधार रहे हैं
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिन लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं का बाहुल्य है उनमें रामपुर (42 प्रतिशत), अमरोहा (32 प्रतिशत), सहारनपुर (30 प्रतिशत), बिजनौर, नगीना और मुरादाबाद (28-28 प्रतिशत), मुजफ्फरनगर (27 प्रतिशत), कैराना और मेरठ (23-23 प्रतिशत) और सम्भल (22 प्रतिशत) शामिल हैं. इसके अलावा बुलंदशहर, बागपत और अलीगढ़ में मुस्लिम मतदाताओं की भागीदारी (19-19 फीसद) हैं. अगर मुस्लिम मतदाता एकजुट होकर किसी एक पार्टी या गठबंधन को वोट दें तो वे परिणाम बदलने का माद्दा रखते हैं.
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा ने मुस्लिम-दलित बहुल सहारनपुर, बिजनौर, नगीना और अमरोहा सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि उसके गठबंधन की सहयोगी सपा को मुरादाबाद, रामपुर और संभल सीटें मिली थीं. हालांकि पश्चिमांचल की कई सीटों पर मुस्लिम मतों के बिखराव का फायदा भाजपा को मिला था, और उसने मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता के बावजूद मुजफ्फरनगर, कैराना, मेरठ, बुलंदशहर, बागपत और अलीगढ़ की सीटों पर जीत दर्ज की थी.
बदले हालात में सपा और कांग्रेस गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चिंता मुस्लिम वोटों के बिखराव को रोकने की होगी, क्योंकि मुस्लिम बहुल सीटों पर उसकी जीत की संभावना, तभी बन सकती है जब मुस्लिम वोट उसके पक्ष में एकजुट हों. राजनीतिक विश्लेषक परवेज अहमद मानते हैं कि इस बार मुस्लिम मतदाताओं को अपने पक्ष में एकजुट रखना समाजवादी पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. उसकी एक बड़ी वजह यह है कि सपा 2019 के बाद से अब तक मुसलमान से जुड़े मुद्दों को लेकर उतनी मुखर नहीं रही है जितना कि उससे उम्मीद की जाती है.
उन्होंने कहा कि एक बात यह भी है कि बसपा ने हर उस सीट पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारा है जहां मुस्लिमों के बाद दलित मतदाताओं का दबदबा है. उन्होंने कहा कि रालोद के भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ जाने से वह जाट मतदाता भी भाजपा से जुड़ गया है जो अभी तक उससे दूर था. हालांकि समाजवादी पार्टी प्रवक्ता फखरुल हसन का दावा है कि मुस्लिम मतदाता अब भी पूरी मजबूती से सपा के साथ खड़े हैं.
वहीं, रालोद के भाजपा के साथ जाने का भी सपा गठबंधन की संभावनाओं पर कोई असर नहीं होगा क्योंकि भाजपा और रालोद का गठजोड़ नैसर्गिक नहीं है. साथी पिछले कई चावन में यह साबित हुआ है कि रालोद का अब उतना असर नहीं रहा जितना की उसे उम्मीद की जाती है. उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2019 में हुए पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा को सपा के मुस्लिम वोटों का फायदा मिला था जिसकी बदौलत वह 10 सीटें जीतने में कामयाब रही थी.
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और बसपा का गठबंधन नहीं था और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अनेक मुस्लिम बहुल सीटों पर सपा ने बसपा को पकड़ते हुए जीत हासिल की थी इसलिए यह कहना सही नहीं है कि मुस्लिम मतदाताओं का सपा से मोह भंग हो रहा है.
उधर, भाजपा पिछले लोकसभा चुनाव में मुस्लिम बहुल सीटों पर जीत हासिल करने की रणनीति के तहत मैदान में उतर रही है. भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने बताया कि पिछले लोकसभा चुनाव में लगभग 20 हजार ऐसे बूथ थे जहां भाजपा हारी थी इस बार इन सभी बूथों पर 11-11 सदस्यों की टीमें बनाई गई हैं, जिनमें महिलाओं को भी शामिल किया गया है.
उन्होंने कहा कि ये टीम खासतौर पर मुस्लिम समाज के उन वर्गों से संपर्क करके उनका वोट भाजपा को दिलाने का प्रयास कर रही है जो सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हासिल कर रहे हैं. जिन बूथों पर भाजपा दो, तीन या पांच वोट पाई थी वहां इस बार कम से कम 50 वोट हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है.
उन्होंने कहा कि पिछली बार लोकसभा चुनाव में भाजपा को मुस्लिम समाज का लगभग 10 फीसदी वोट हासिल हुआ था. इस बार इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य है. खासकर पसमांदा मुसलमान को भाजपा से जोड़ा जा रहा है जिन्हें सरकार की योजनाओं का सबसे ज्यादा लाभ मिला है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मुस्लिम बहुल सीटों पर विभिन्न पार्टियों द्वारा घोषित प्रत्याशियों पर गौर करें तो भाजपा ने इस बार भी एक भी मुसलमान को टिकट नहीं दिया है.

RELATED POSTS

संसद में अकेले मोदी सरकार को घेरेगी कांग्रेस, खड़गे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र;

हॉर्मुज़ से दूर रहें भारतीय नाविक! ईरान युद्ध के बीच भारत सरकार का बड़ा आदेश

“क्या तुम मुस्लिम हो?” पूछकर भारतीय युवक पर 15 बार चाकू से हमला, अमेरिका के मॉल में दिल दहला देने वाली वारदात

इसके अलावा बसपा ने सहारनपुर से माजिद अली, कैराना से श्रीपाल सिंह, मुजफ्फरनगर से दारा सिंह प्रजापति, बिजनौर से विजेंद्र सिंह, नगीना से सुरेंद्र पाल सिंह, मुरादाबाद से इरफान सैफी, रामपुर से जीशान खान, संभल से सौलत अली, अमरोहा से मुजाहिद हुसैन, मेरठ से देववृत्त त्यागी, बुलंदशहर से गिरीश चंद्र जाटव, अलीगढ़ से गुफरान नूर और बागपत से प्रवीण बंसल को उम्मीदवार बनाया है.
पिछले चुनावों के नतीजों पर गौर करें तो जाहिर होता है कि भाजपा को उन निर्वाचन क्षेत्रों में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है जहां मुस्लिम वोट 30 से 42 प्रतिशत तक हैं. इन चुनावों की गतिशीलता हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण से आकार लेती है, जिसमें मुस्लिम बहुल सीटें कभी दलित समुदायों के साथ जुड़ती हैं तो कभी स्वतंत्र रूप से खड़ी होती हैं. इसके अलावा जाट फैक्टर ने भी चुनावी नतीजों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
सपा और कांग्रेस से मिलकर बने विपक्षी गठबंधन के लिए चुनौतियां बनी हुई हैं क्योंकि वह मुस्लिम वोटों को प्रभावी ढंग से अपने पक्ष में करना चाहता है. अब सभी की निगाहें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम बहुल सीटों की जटिल गतिशीलता को अपने पक्ष में करने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीतियों पर टिकी हैं. दांव ऊंचे हैं और इन चुनावों के नतीजों का इस क्षेत्र और उससे आगे के लिए दूरगामी प्रभाव हो सकता है. लोकसभा चुनाव के पहले चरण में उत्तर प्रदेश की सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, नगीना, मुरादाबाद, रामपुर और पीलीभीत सीटों के लिए आगामी 19 अप्रैल को मतदान होगा.

ShareTweetSend
RK News

RK News

Related Posts

संसद में अकेले मोदी सरकार को घेरेगी कांग्रेस, खड़गे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र;
समाचार

संसद में अकेले मोदी सरकार को घेरेगी कांग्रेस, खड़गे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र;

July 16, 2026
हॉर्मुज़ से दूर रहें भारतीय नाविक! ईरान युद्ध के बीच भारत सरकार का बड़ा आदेश
समाचार

हॉर्मुज़ से दूर रहें भारतीय नाविक! ईरान युद्ध के बीच भारत सरकार का बड़ा आदेश

July 16, 2026
“क्या तुम मुस्लिम हो?” पूछकर भारतीय युवक पर 15 बार चाकू से हमला, अमेरिका के मॉल में दिल दहला देने वाली वारदात
समाचार

“क्या तुम मुस्लिम हो?” पूछकर भारतीय युवक पर 15 बार चाकू से हमला, अमेरिका के मॉल में दिल दहला देने वाली वारदात

July 16, 2026
सोनम वांगचुक के अनशन पर मोदी सरकार की पहली प्रतिक्रिया, दिल्ली हाईकोर्ट को बताया ‘…के रूप में हस्तक्षेप करेंगे'”
समाचार

सोनम वांगचुक के अनशन पर मोदी सरकार की पहली प्रतिक्रिया, दिल्ली हाईकोर्ट को बताया ‘…के रूप में हस्तक्षेप करेंगे'”

July 16, 2026
आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर की तैयारी, 40 में से 38 भवनों को अवैध घोषित
समाचार

आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर की तैयारी, 40 में से 38 भवनों को अवैध घोषित

July 15, 2026
शालिग्राम गर्ग गिरफ्तार
समाचार

बागेश्वर धाम में मची हलचल! धीरेंद्र शास्त्री के भाई शालिग्राम गर्ग गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा जेल

July 15, 2026
Next Post

यूपी: बरेली में BJP मैंने खींचतान’कैंडिडेट छत्रपाल गंगवार का जमकर विरोध कहा'मैं टिकट वापस कर दूंगा'

Congress:UP की 80 सीटों पर कांग्रेस ने उतारे 40 स्टार प्रचारक

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended Stories

नेपाल के व्यापारियों ने भारत से आलू, प्याज आयात करना बंद किया, यह है वजह

June 14, 2023

मुख्यमंत्री ने कहा:असम में बेदख़ल किए गए लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे

August 26, 2025

हमास ने दे दिया संकेतण :ट्रंप की धमकी के आगे नहीं झुकेगा,शान्ति प्लान करेगा रिजेक्ट!

October 2, 2025

Popular Stories

  • दिल्ली में 1396 कॉलोनियां हैं अवैध, देखें इनमें आपका इलाका भी तो नहीं शामिल ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • मेवात के नूह में तनाव, 3 दिन इंटरनेट सेवा बंद, 600 परFIR

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • कौन हैं जामिया मिलिया इस्लामिया के नए चांसलर डॉक्टर सैय्यदना सैफुद्दीन?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • NCERT Recruitment 2023 में नौकरी पाने का जबरदस्त मौका, कल से शुरू होगा आवेदन, जानें तमाम डिटेल

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में महिला यूट्यूबर ज्योति गिरफ्तार, पूछताछ में किए बड़े खुलासे

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • हमारे  पास ठोस सबूत नहीं, कनाडा  ने माना|भारत ने कहा- हमारे आरोपों की पुष्टि

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Roznama Khabrein

The Roznama Khabrein advocates rule of law, human rights, minority rights, national interests, press freedom, and transparency on which the newspaper and newsportal has never compromised and will never compromise whatever the costs.

More... »

Recent Posts

  • संसद में अकेले मोदी सरकार को घेरेगी कांग्रेस, खड़गे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र;
  • हॉर्मुज़ से दूर रहें भारतीय नाविक! ईरान युद्ध के बीच भारत सरकार का बड़ा आदेश
  • “क्या तुम मुस्लिम हो?” पूछकर भारतीय युवक पर 15 बार चाकू से हमला, अमेरिका के मॉल में दिल दहला देने वाली वारदात

Categories

  • Uncategorized
  • अन्य
  • एजुकेशन
  • देश-विदेश
  • पड़ताल
  • रोजनामा खबरें विशेष
  • विचार
  • समाचार
  • हेट क्राइम

Quick Links

  • About Us
  • Support Us
  • Terms & Conditions
  • Privacy Policy
  • Grievance
  • Contact Us

© 2021 Roznama Khabrein Hindi

No Result
View All Result
  • होम
  • समाचार
  • देश-विदेश
  • पड़ताल
  • एजुकेशन
  • विचार
  • हेट क्राइम
  • अन्य
  • रोजनामा खबरें विशेष
  • اردو

© 2021 Roznama Khabrein Hindi