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वक्फ बोर्ड में पहली बार हिंदू सदस्यों की एंट्री, फैसले पर शुरू हुआ विवाद

RK News by RK News
July 7, 2026
Reading Time: 1 min read
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वक्फ बोर्ड में पहली बार हिंदू सदस्यों की एंट्री, फैसले पर शुरू हुआ विवाद

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 के तहत राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए पहली बार दो हिंदू सदस्यों को बोर्ड में शामिल किया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।

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मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार ने इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव को वक्फ बोर्ड का गैर-मुस्लिम सदस्य नियुक्त किया है। वहीं सनवर पटेल को दोबारा बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है।

10 सदस्यीय बोर्ड का हुआ गठन

नवनियुक्त बोर्ड में नजमा हेपतुल्ला, आतिफ अकील, फैजान खान, फातिमा चौधरी, शाइस्ता सुल्तान और शबाना खान सहित कुल 10 सदस्य शामिल किए गए हैं। राज्य सरकार का दावा है कि वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 लागू होने के बाद मध्य प्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

नए कानून के अनुसार अब प्रत्येक राज्य वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य होगा। इससे पहले 1995 के वक्फ अधिनियम के तहत बोर्ड में केवल मुस्लिम समुदाय के सदस्य ही नियुक्त किए जाते थे।

नियुक्तियों पर उठे सवाल

मुस्लिम धर्मगुरु इमरान खोखर ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों को इस्लाम और वक्फ व्यवस्था की जानकारी नहीं है, उन्हें बोर्ड में शामिल करने का क्या औचित्य है। उन्होंने पूछा कि क्या किसी मुस्लिम को महाकाल मंदिर समिति या राम मंदिर ट्रस्ट का सदस्य बनाया जा सकता है।

सरकार के फैसले का समर्थन भी

वहीं हिंदू संत अनिलानंद महाराज ने सरकार के इस कदम का समर्थन किया। उनका कहना है कि इस फैसले से केवल उन लोगों को परेशानी हो रही है, जिन्होंने वक्फ की संपत्तियों पर कथित रूप से कब्जा कर रखा है। उनके अनुसार बोर्ड में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए यह फैसला जरूरी था।

फिलहाल सरकार के इस निर्णय को लेकर विभिन्न राजनीतिक और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बहस और तेज होने की संभावना है।

Tags: Delhi Waqf Boardmadhya pradeshmadhya pradesh governmentWaqf BoardWaqf Law: Muslim
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