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हलाल प्रोडक्ट का सर्टिफिकेट देने वाली एजेंसियों के पास कोई टेस्टिंग लैब या विशेषज्ञता नहीं :FSDA

RK News by RK News
November 28, 2023
Reading Time: 1 min read
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सैयद ख़लीक अहमद
नई दिल्ली | उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव अनीता सिंह ने कहा है कि राज्य में हलाल मांस पर कोई प्रतिबंध नहीं है.
इंडिया टुमारो से फोन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रतिबंध मांस के अलावा अन्य सभी हलाल उत्पादों से संबंधित है.
सिंह ने कहा कि, आबादी के एक वर्ग की संवेदनशीलता के कारण मांस को प्रतिबंधित हलाल वस्तुओं की सूची से बाहर रखा गया है, जो केवल हलाल मांस खाते हैं. इसके अलावा, हलाल मांस के उत्पादन के लिए मानक प्रक्रियाएं हैं.
सौंदर्य प्रसाधन और चीनी आदि जैसे बाजार में बेचे जा रहे अन्य हलाल उत्पादों के बारे में उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि क्या कंपनियों को हलाल सर्टिफिकेट जारी करने वाली एजेंसियों के पास यह जांचने के लिए आवश्यक सुविधाएं और विशेषज्ञता हैं कि क्या विशेष उत्पाद इस्लामी कानून के अनुसार निर्मित किया गया था, उत्पाद पूरी तरह से हलाल था, मिलावटी नहीं था?
उन्होंने कहा कि, कोई एजेंसी ऐसे उत्पाद के लिए हलाल सर्टिफिकेट कैसे जारी कर सकती है जिसके लिए एजेंसी के पास गुणवत्ता की जांच और रखरखाव के लिए विशेषज्ञता और परीक्षण सुविधाएं नहीं हैं.
उन्होंने दावा किया कि हलाल सर्टिफिकेट जारी करने वाली किसी भी एजेंसी के पास इस्लामी मानकों के अनुसार उत्पादों के हलाल होने का परीक्षण करने की विशेषज्ञता नहीं है. उन्होंने कहा कि प्रमाणित करने की निगरानी के लिए निजी एजेंसियों के बजाय कोई सरकारी एजेंसी होनी चाहिए क्योंकि यह बहुत गंभीर मुद्दा है.
हलाल प्रमाणीकरण का मतलब है कि उत्पाद इस्लामी कानून के अनुसार तैयार किए गए हैं और पूरी तरह से मिलावट रहित हैं.
उन्होंने कहा कि, कोई भी निजी एजेंसी किसी भी उत्पाद के लिए प्रमाणन जारी नहीं कर सकती है, यदि एजेंसी, राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) के साथ पंजीकृत नहीं है.
सिंह ने कहा कि मान्यता प्राप्त एजेंसियां भी केवल उन्हीं उत्पादों के लिए प्रमाणन जारी कर सकती हैं जिनके लिए उन्हें एनएबीएल द्वारा लाइसेंस दिया गया है, न कि सभी हलाल उत्पादों के लिए.
उन्होंने दावा किया कि हलाल प्रमाणन जारी करने वाली अधिकांश एजेंसियां एनएबीएल के साथ पंजीकृत नहीं हैं. उन्होंने कहा, केवल एक निजी एजेंसी ने एनएबीएल के साथ पंजीकरण के लिए उनके विभाग से संपर्क किया.
सिंह ने कहा कि एनएबीएल की भागीदारी से हलाल प्रमाणन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की ज़रूरत है. उन्होंने बताया कि एनएबीएल उन वस्तुओं की एक सूची तैयार करने की प्रक्रिया में है जिनके लिए हलाल प्रमाणीकरण आवश्यक है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चीनी जैसे उत्पादों के लिए हलाल प्रमाणीकरण की आवश्यकता नहीं है, फिर भी कुछ कंपनियां हलाल-प्रमाणित चीनी बेचती हैं जो हास्यास्पद है.
मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाकर भारत और विदेशों में कुछ उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए निजी एजेंसियों द्वारा फर्जी प्रमाणीकरण किया जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, हलाल प्रमाणन जारी करने वाली एजेंसियों ने उन कंपनियों से बहुत पैसा कमाया जो अपनी सामग्रियों को हलाल उत्पादों के रूप में ब्रांड करके अपनी बिक्री बढ़ाना चाहते थे.
पिछले एक दशक से अधिक समय से चल रही इन गड़बड़ियों के आधार पर लखनऊ के शैलेन्द्र कुमार शर्मा ने हज़रतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई है. इसने एफएसडीए को राज्य में हलाल उत्पादों के निर्माण, भंडारण और बिक्री में शामिल कंपनियों पर कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया.
सिंह ने कहा कि किसी को यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि यह कार्रवाई किसी विशेष समुदाय के खिलाफ है. यह केवल लोगों की धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग करके व्यापारिक व्यवहार पर आधारित था.
मुस्लिम देशों, विशेषकर अरब मुस्लिम देशों में हलाल उत्पादों की मांग के कारण कई भारतीय कंपनियां हलाल-उत्पाद व्यवसाय में शामिल हो गईं. एक अनुमान के मुताबिक, वैश्विक हलाल कारोबार 3.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का है जो काफी आकर्षक है. इसने कई व्यवसायियों को हलाल व्यवसाय में शामिल होने के लिए आकर्षित किया है.
जिन एजेंसियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है उनमें हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड चेन्नई, जमीयत उलमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट दिल्ली, हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया मुंबई और जमीयत उलमा महाराष्ट्र शामिल हैं.
संपर्क करने पर जमीयत उलमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट दिल्ली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियाज़ फारूकी ने कहा कि, उनका ट्रस्ट केवल निर्यात के लिए बने कुछ उत्पादों के लिए हलाल प्रमाणीकरण जारी करने के लिए अधिकृत है, न कि घरेलू बाज़ार के लिए.

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आईपीसी की जिन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है उनमें 120बी (आपराधिक साजिश), 153ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 298 (धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए जानबूझकर कुछ बोलना आदि), 384 (जबरन वसूली), 420 (धोखाधड़ी) बेईमानी से संपत्ति की डिलीवरी के लिए प्रेरित करना), 467 (मूल्यवान सुरक्षा, वसीयत आदि की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को असली के रूप में उपयोग करना) और 505 (सार्वजनिक शरारत के लिए प्रेरित करने वाले बयान) शामिल हैं.
इंडिया टुमारो से बात करते हुए सिंह ने कहा कि, हलाल उत्पाद बेचने वाली कंपनियों को हलाल लेबल हटाने और फिर उन्हें बाज़ार में बेचने के लिए कहा गया है.
एफएसडीए अधिकारियों के अनुसार, विभाग ने 17 नवंबर को एफआईआर दर्ज होने के बाद राज्य के 38 जिलों में 92 छापे मारे हैं और पिछले चार दिनों में 5.5 लाख रुपय के 2,275 उत्पाद जब्त किए हैं. अधिकारियों ने कहा कि, यूपी में 92 कंपनियां हलाल-प्रमाणित उत्पाद बेच रही हैं और पूरे भारत में 600 कंपनियां हैं जिन्होंने अपने व्यवसायों के लिए हलाल प्रमाणपत्र प्राप्त किया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया भर में मुस्लिम उपभोक्ताओं के बीच बिक्री बढ़ाने के लिए कई खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों द्वारा हलाल ब्रांडिंग का इस्तेमाल किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि कैविंकरे, बिकानो, दावत, गोल्डविनर ऑयल, वाडीलाल आइसक्रीम, अमृतांजन हेल्थ केयर और गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट्स, इकोट्रेल पर्सनल केयर प्राइवेट लिमिटेड और गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट्स जैसी कंपनियों ने मुस्लिम देशों में अपने उत्पादों को निर्यात करने के लिए हलाल प्रमाणीकरण का उपयोग किया.
कैविंकरे के एक अधिकारी ने मीडियाकर्मियों को बताया कि हलाल प्रमाणीकरण ने अन्य प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त हासिल कर ली है. 31 मार्च, 2022 को समाप्त होने वाले कैविंकेयर का वार्षिक कारोबार 500 करोड़ रूपए बताया गया जबकि सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली कंपनी इकोट्रेल के आईबीए ब्रांड की कीमत 2.45 मिलियन अमेरिकी डॉलर रही. इकोट्रेल को अहमदाबाद में दो जैन बहनें चलाती हैं.
बिकानो के एक अधिकारी ने खुलासा किया कि नमकीन और अन्य उत्पादों के कई ब्रांड बनाने वाली उनकी कंपनी को हलाल प्रमाणीकरण मिलने के बाद मलेशियाई और अन्य मुस्लिम देशों में बिक्री में 30 प्रतिशत का उछाल आया है. एक अखबार के साथ एक साक्षात्कार में, इसके अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रमुख सचिन आनंद ने कहा कि हलाल मुस्लिम समाज में गुणवत्ता के उच्चतम मानकों का प्रतीक है.
दर्द निवारक बाम बनाने वाली अमृतांजन ने हलाल सर्टिफिकेशन मिलने के बाद मुस्लिम देशों में प्रवेश किया. अमृतांजन के हरीश बिजूर कहते हैं कि इस्लाम जीवन जीने का एक तरीका है और इसलिए इस्लामिक ब्रांडिंग हलाल खाद्य पदार्थों से लेकर फार्मास्यूटिकल्स और कॉस्मेटिक उद्योग तक भी आगे बढ़ सकती है.
एक ब्रांडिंग कंपनी के प्रमुख का कहना है कि चूंकि मुसलमान इस्लामी मूल्यों के बारे में भावुक हैं और इसलिए उत्पादों को हलाल-प्रमाणित के रूप में ब्रांड करने से मुस्लिम देशों में अच्छा बाज़ार मिलता है और यही कारण है कि कई कंपनियां निजी एजेंसियों से हलाल प्रमाणीकरण प्राप्त करने के बाद अपने उत्पादों को हलाल-प्रमाणित के रूप में लेबल करती हैं. (साभार:इंडिया टुमॉरो)

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