ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत सरकार ने भारतीय नाविकों (Seafarers) की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने जहाज मालिकों, शिप मैनेजमेंट कंपनियों और भर्ती एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगले आदेश तक किसी भी भारतीय नाविक को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर तैनात न किया जाए। यह आदेश ऐसे समय में जारी किया गया है जब पिछले तीन दिनों में इस क्षेत्र में हुए हमलों में दो भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है।
भारत दुनिया में समुद्री नाविकों की आपूर्ति करने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल है। वर्तमान में तीन लाख से अधिक भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के जहाजों पर कार्यरत हैं। फरवरी 2026 में मिडिल ईस्ट में संघर्ष शुरू होने के बाद से खाड़ी क्षेत्र में कम से कम 13 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जिससे सरकार की चिंता और बढ़ गई है।
भारतीय समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (DGMA) ने बुधवार को जारी आदेश में कहा कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर यात्रा करने वाले किसी भी जहाज पर भारतीय नाविकों की तैनाती तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए। यह निर्णय भारतीय नाविकों की सुरक्षा, संरक्षा और कल्याण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
DGMA ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि फारस की खाड़ी और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास व्यावसायिक जहाजों को गंभीर सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। मोंबासा बी, अल बह्याह, जीएफएस गैलेक्सी, एमटी वेदयान और अल रेकय्यात जैसे कई जहाज संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं, जिनके लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतना आवश्यक हो गया है।
सरकार ने जहाजों के कप्तानों को निर्देश दिया है कि वे फारस की खाड़ी, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और उससे सटे समुद्री क्षेत्रों की सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखें। साथ ही सभी नौवहन चेतावनियों और सुरक्षा संबंधी अपडेट्स का पालन करना अनिवार्य होगा।










